
चित्तौड़गढ़- राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में हाल के दिनों में चौथा रैगिंग मामला सामने आया है। इस बार राजकीय मेडिकल कॉलेज, चित्तौड़गढ़ के गर्ल्स हॉस्टल से शिकायत आई है, जिसमें प्रथम वर्ष की छात्राओं के साथ रैगिंग, दबाव और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने कॉलेज प्रशासन से 24 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
बीते एक माह के भीतर राजस्थान के 6 अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों कोटा, भीलवाड़ा, जोधपुर, बीकानेर और जयपुर से रैगिंग की शिकायतें दर्ज हुई हैं जिसमे चार घटनाएं एक सप्ताह में हुईं हैं। डॉक्टरों के संगठनों ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन से इस पर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत निष्पक्ष जांच करने और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल ने राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में लगातार आ रहे रैगिंग के मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मित्तल ने इन मामलों में तत्काल, निष्पक्ष व गोपनीय जांच की मांग की है।
जानकारी के मुताबिक छात्रावास की छठी मंजिल पर प्रथम वर्ष की करीब 17 छात्राएं रहती हैं, जबकि चौथी और पांचवीं मंजिल पर वरिष्ठ छात्राएं निवास करती हैं। लगभग 30-35 वरिष्ठ छात्राओं का एक समूह नियमित रूप से जूनियर छात्राओं को नीचे बुलाकर उन्हें असहज, अपमानजनक और तथाकथित मनोरंजक गतिविधियां करने के लिए मजबूर करता है। इन गतिविधियों के दौरान दुर्व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना की जाती है तथा ये गतिविधियां अक्सर आधी रात के बाद तक चलती रहती हैं। शिकायत में विशेष रूप से रूम नंबर 513 और 517 का उल्लेख किया गया है, जिनकी जांच की मांग की गई है।
UDF ने NMC को भेजे गए पत्र में कहा है कि ये आरोप एंटी-रैगिंग नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का गंभीर उल्लंघन हो सकते हैं। इससे छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। साथ ही हॉस्टल की निगरानी व्यवस्था और कॉलेज के एंटी-रैगिंग तंत्र की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठते हैं।
पत्र में NMC से अनुरोध किया गया है कि कॉलेज प्रशासन से 24 घंटे के भीतर पैरा-वाइज कमेंट्स और व्यापक एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी जाए। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
एंटी-रैगिंग कमेटी और स्क्वाड ने शिकायत का संज्ञान लिया है या नहीं, जांच की स्थिति और निष्कर्ष क्या हैं।
30-35 वरिष्ठ छात्राओं द्वारा जूनियरों को नीचे बुलाकर अपमानजनक गतिविधियां कराने के आरोप की जांच हुई या नहीं, शामिल छात्राओं की पहचान और बैच क्या है।
आधी रात के बाद तक चलने वाले दुर्व्यवहार, दबाव और मानसिक उत्पीड़न की जांच के निष्कर्ष।
रूम नंबर 513, 517 और संबंधित मंजिलों का निरीक्षण किया गया या नहीं।
रात्रिकालीन निगरानी व्यवस्था, वार्डन, सुरक्षा कर्मियों और एंटी-रैगिंग स्क्वाड के ड्यूटी रोस्टर तथा निरीक्षण रिकॉर्ड।
सीसीटीवी फुटेज, एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड आदि साक्ष्यों की जांच और संरक्षण।
प्रथम वर्ष की छात्राओं से गोपनीय और व्यक्तिगत बातचीत की गई या नहीं, शिकायतकर्ता और प्रभावित छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के कदम।
आगे रैगिंग रोकने और छात्राओं की सुरक्षा-सलाह सेवाएं सुनिश्चित करने के तत्काल उपाय।
पहले भी कोई शिकायत आई थी या नहीं और उस पर क्या कार्रवाई हुई।
जांच रिपोर्ट, बयान, मीटिंग मिनट्स और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं।
पत्र में साफ कहा गया है कि शिकायतकर्ता और प्रभावित छात्राओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए। किसी भी छात्रा पर दबाव, धमकी, प्रतिशोध या शैक्षणिक नुकसान न हो। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
इसी मामले की एक गोपनीय शिकायत राष्ट्रीय एंटी रैगिंग हेल्पलाइन को भी भेजी गई है। इसमें भी तत्काल निष्पक्ष जांच, हॉस्टल की मंजिलों और उल्लिखित कमरों का सत्यापन, रात्रिकालीन निगरानी मजबूत करने, सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और छात्राओं को किसी भी तरह के दबाव से बचाने की मांग की गई है। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह शिकायत छात्राओं की सुरक्षा और संभावित प्रतिशोध की आशंका को देखते हुए बिना नाम के की जा रही है।
शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि इस शिकायत का उद्देश्य किसी को पूर्वाग्रह से दोषी ठहराना नहीं, बल्कि सच्चाई सामने लाना और छात्रावास में सभी छात्राओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और रैगिंग-मुक्त माहौल सुनिश्चित करना है।
राजस्थान के कोटा, भीलवाड़ा, जोधपुर मेडिकल कॉलेजों में अक्टूबर में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के छात्रों के साथ रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के एंटी-रैगिंग सेल ने दोनों कॉलेजों के प्रशासन से सख्त जवाब और एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी है।
कोटा में फर्स्ट ईयर के छात्रों ने शिकायत की है कि सेकंड ईयर के सीनियर छात्रों ने "इंटरेक्शन" के नाम पर उनसे अश्लील हरकतें करवाईं, उन्हें 'मुर्गा' और 'बिच्छू' जैसी अपमानजनक स्थितियों में खड़ा किया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। शिकायत के अनुसार, यह प्रताड़ना न केवल कॉलेज परिसर में बल्कि कॉलेज के बाहर किराए के फ्लैटों में भी दी गई। इसमें कुछ फैकल्टी सदस्यों की मिलीभगत होने का भी अंदेशा जताया गया है।
भीलवाड़ा में भी एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र ने सीनियर छात्रों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों को डराने-धमकाने, बाल कटवाने का दबाव बनाने और बात न मानने पर परीक्षा में फेल करने या 'बैक' लगवाने की धमकियां दी गईं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब पीड़ित छात्रों के माता-पिता ने कॉलेज प्रशासन या सीनियर्स से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्हें भी डराया-धमकाया गया।
जोधपुर के डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में प्रथम वर्ष की छात्राओं से रैगिंग का मामला सामने आया था। एंटी रैगिंग टीम और कॉलेज प्रशासन को एक मेल भेजा गया था, जिसमें करीब 90 छात्रों के मोबाइल नंबरों के साथ सीनियर्स द्वारा 'बॉस' कहने का दबाव बनाने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया था।
जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का एक मामला सामने आया था, हालांकि बाद की जांच में यह शिकायत आपसी रंजिश और मनमुटाव की निकली थी।
बीकानेर के सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज में भी हाल ही में नए शैक्षणिक सत्र (2026-27) के दौरान रैगिंग और जूनियर छात्रों पर दबाव बनाने की घटनाओं की शिकायतें सामने आई। सोशल मीडिया और प्लेटफॉर्म्स पर साझा हुई जानकारियों के अनुसार, प्रथम वर्ष के नए छात्रों को मानसिक उत्पीड़न, अश्लील और अपमानजनक हरकतों, तथा जबरन डराने-धमकाने जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा। कॉलेज प्रशासन और एंटी-रैगिंग कमेटी ने सख्त रुख अपनाते हुए नए सत्र के लिए रैगिंग विरोधी समितियों का गठन किया है। नव-प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अलग बॉयज हॉस्टल चिन्हित किया गया है, जहाँ 24 घंटे सुरक्षा और CCTV निगरानी की व्यवस्था की गई।
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) और मेडिकल एक्टिविस्ट्स ने राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में लगातार सामने आ रहे रैगिंग के मामलों पर गहरी चिंता जताई है।
डॉ मित्तल ने कहा कि रैगिंग मामलों में राजस्थान सरकार और संबंधित अधिकारियों की तरफ से निर्णायक कार्रवाई अभी तक नजर नहीं आ रही है। बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं पूरे राज्य में सख्त प्रवर्तन और डीन/प्रधानाचार्यों की जवाबदेही तय करने की मांग करती हैं। जीरो टॉलरेंस सिर्फ नारा न बने, बल्कि मैदान पर लागू हो। छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और रैगिंग पर तुरंत रोक लगाई जाए।
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