
नई दिल्ली- कॉकरोच जनता पार्टी ने नई दिल्ली जिले के विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के 19 अक्टूबर के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की है। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 126/170 के तहत निवारक कार्यवाही में पार्टी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में रखने से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उनके स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। पार्टी ने मुख्य न्यायाधीश से तत्काल सुनवाई, जिसमें रात्रिकालीन सुनवाई भी शामिल है, का अनुरोध किया है ताकि दोनों नेताओं की रिहाई हो सके। SEM के समक्ष मामला 21 अक्टूबर को सूचीबद्ध है।
पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने कहा, "सौरव दास और आशुतोष रांका के लगातार सात दिन सलाखों के पीछे रहने का कोई कारण नहीं है। SEM द्वारा दिए गए आधार पूरी तरह अजीब, बेतुके और पुलिस आवेदनों से यांत्रिक रूप से लिए गए हैं। इन दोनों के मौलिक अधिकारों का खुला हनन हो रहा है। नैसर्गिक न्याय में हम सब विश्वास रखते हैं, फिर भी उसे पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। हमने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है ताकि संवैधानिक स्वतंत्रताएं बरकरार रहें और दोनों नेता तुरंत रिहा हों।"
याचिका की "तिथियों और घटनाओं की सूची" के अनुसार:
10 अक्टूबर: याचिकाकर्ताओं को IGI एयरपोर्ट, नई दिल्ली के टर्मिनल 3 पर पहुंचने पर विमान से ही हिरासत में ले लिया गया।
11 अक्टूबर: डीडी संख्या 02A, थाना स्पेशल स्टाफ के तहत BNSS की धारा 126/170 में निवारक कार्रवाई की गई। दक्षिण-पश्चिम जिले के SEM के समक्ष उन्होंने 50,000 रुपये प्रत्येक के बॉन्ड भरे और धारा 135(3) BNSS के तहत रिहा हुए। मामला 27 अक्टूबर 2026 के लिए पुनः सूचीबद्ध हुआ। उसी दिन आदेश संख्या 2901-3050/रिकॉर्ड ब्रांच/PHQ द्वारा जंतर मंतर को निर्धारित धरना स्थल की सूची से हटा दिया गया। इस अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में W.P.(C) 1357/2026 और दिल्ली हाईकोर्ट में W.P.(C) 15166/2026 के जरिए चुनौती दी गई है।
13 अक्टूबर: याचिकाकर्ता राष्ट्रीय ध्वज के साथ जंतर मंतर गए। उन्हें सुबह हिरासत में लेकर थाना जाफरपुर कलां ले जाया गया।
14 अक्टूबर: तड़के करीब 2:30 बजे उन्हें थाना पार्लियामेंट स्ट्रीट लाया गया और धारा 126/170 BNSS (डीडी संख्या 07A) में गिरफ्तार दिखाया गया। याचिका के अनुसार गिरफ्तारी के सभी आधार उन घटनाओं से जुड़े हैं जो पहले ही घटित हो चुकी थीं। नई दिल्ली जिले के SEM ने धारा 130 BNSS के तहत नोटिस जारी किए और उस समय कोई उपयुक्त ज़मानतदार पेश न होने के कारण पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। बॉन्ड की अवधि या राशि निर्दिष्ट नहीं की गई।
16 अक्टूबर: ज़मानतदारों की स्वीकृति और सत्यापन लंबित रहने तक व्यक्तिगत बॉन्ड पर रिहाई के लिए अल्दानिश रेन के आधार पर आवेदन दिए गए। सावधि जमा (FDR) बैंक द्वारा सत्यापित थीं।
17 अक्टूबर: ज़मानत सत्यापन रिपोर्टों में श्री बाल कृष्ण शुक्ला और श्री दीपक कुमार की FDR "वास्तविक और वैध" पाई गईं और दोनों ज़मानतदार अपने पते पर मौजूद मिले। आपत्ति केवल उनके पूर्व आचरण और याचिकाकर्ताओं से "संबंध" को लेकर की गई।
18 अक्टूबर: 16 अक्टूबर को पेश किए गए ज़मानतदारों को SEM ने अस्वीकार कर दिया।
19 अक्टूबर: पुलिस ने 14 अक्टूबर से पहले की घटनाओं, तीसरे व्यक्तियों के बयानों और कलंदरा से बाहर की सामग्री तथा शांति भंग की आशंका के आधार पर पांच दिन और न्यायिक हिरासत मांगी। याचिकाकर्ताओं के वकील ने पोषणीयता और गुण-दोष दोनों पर आपत्ति की, आदेश पारित करने पर जोर दिया और कहा कि वे जवाब दाखिल नहीं करना चाहते। SEM ने नए ज़मानतदारों (तीरथ और मन्नू राज आनंद) को अस्वीकार कर दिया और मामला स्थगित कर याचिकाकर्ताओं से जवाब मांगा कि शांति भंग की आशंका क्यों न मानी जाए।
1. दिल्ली हाईकोर्ट के अल्दानिश रेन बनाम राज्य (NCT दिल्ली) (2018 SCC OnLine Del 12207) के विपरीत। याचिका के अनुसार, हाईकोर्ट ने कहा था कि ज़मानत बॉन्ड जमा होने के बाद सत्यापन लंबित रहने तक व्यक्ति को व्यक्तिगत बॉन्ड पर रिहा किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता कई बार ज़मानतदार पेश करने के बावजूद 6 दिन से हिरासत में हैं।
2. धारा 135(3) BNSS का मनमाना प्रयोग। हिरासत का आधार "बॉन्ड निष्पादित न करना" बताया गया, जबकि 19 अक्टूबर को पेश ज़मानतदार कानूनन सही थे।
3. अन्य ज़मानतदार पेश करने का मौका नहीं। SEM ने माना कि कोई और ज़मानतदार मौजूद नहीं था, जबकि याचिकाकर्ताओं के अनुसार दो और ज़मानतदार विधिवत निष्पादित बॉन्ड और FDR के साथ उपलब्ध थे, पर उन्हें पेश करने का अवसर नहीं दिया गया।
4. धारा 130 BNSS का पालन नहीं। मजिस्ट्रेट ने किसी भी आदेश में ज़मानतदारों की संख्या, बॉन्ड की राशि और अवधि निर्दिष्ट नहीं की, जो याचिका के अनुसार धारा 135(3) की कार्यवाही की पूर्व शर्त है।
5. सत्यापन योग्यता की जांच है, उत्पीड़न नहीं। मद्रास हाईकोर्ट के सगायम @ देवसगायम बनाम राज्य (2017 SCC OnLine Mad 1653) का हवाला देते हुए कहा गया है कि सत्यापन कोई "कठोर कवायद" नहीं है।
6. आसन्न आशंका का निष्कर्ष विरोधाभासी। 19 अक्टूबर को "नए ज़मानतदार" पेश करने का निर्देश देकर SEM का अपना आदेश हिरासत को उचित ठहराने वाले किसी आसन्न खतरे से मेल नहीं खाता।
7. अनुच्छेद 19(3) की कसौटी। सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की आशंका पर लगाए गए प्रतिबंध में निकट और वास्तविक संबंध होना चाहिए, "बारूद के ढेर में चिंगारी" जैसा, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने एस. रंगराजन बनाम पी. जगजीवन राम (1989) 2 SCC 574 में कहा।
8. धारा 140 का गलत प्रयोग। ज़मानतदार को केवल तभी अस्वीकार किया जा सकता है जब वह बॉन्ड के प्रयोजन के लिए "अयोग्य व्यक्ति" हो। याचिका के अनुसार ज़मानतदारों को इस आधार पर खारिज किया गया कि उनका याचिकाकर्ताओं पर कथित तौर पर "कोई नियंत्रण नहीं" है और वे एक याचिकाकर्ता के माता-पिता का नाम याद नहीं रख सके।
9. धारा 140 की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
10 . देरी रिहाई का उद्देश्य विफल करती है। ज़मानतदारों की स्वीकृति और सत्यापन में देरी व बाधा रिहाई का मकसद खत्म कर देती है, जैसा सुजीत कुमार सिंह बनाम महानिदेशक, जेल (2024:DHC:1860, W.P.(Crl) 748/2024) में कहा गया।
11. गैर-अधिसूचित स्थल पर विरोध नियमन का प्रश्न है, सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा नहीं, और अधिसूचना वापसी स्वयं सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट में चुनौती के अधीन है।
12. स्वतंत्र विवेक का अभाव। याचिका के अनुसार हर निष्कर्ष जांच अधिकारी के आवेदन से लिया गया है। आशा पंत बनाम राज्य (2008) 102 DRJ 216 का हवाला देते हुए कहा गया कि पुलिस सामग्री को यांत्रिक रूप से अपनाने से शक्ति का प्रयोग "अमान्य किए जाने के प्रति संवेदनशील" हो जाता है।
पार्टी ने दोहराया कि कार्यपालिका की धमकी या न्यायिक देरी उसे संस्थागत ईमानदारी, नागरिक अधिकारों और चुनावी जवाबदेही के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष से नहीं रोक सकती।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
'द मूकनायक' जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है। अगर आप भी चाहते हैं कि 'द मूकनायक' हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहें तो सब्सक्राइब करें।
यहां सब्सक्राइब करें