PM मोदी के जन्मदिन पर ‘आशीर्वाद का दीया’: सरकारी तंत्र की भागीदारी पर क्या है विवाद?

विवाद का केंद्र मुख्यतः यह सवाल है कि सरकारी मशीनरी और सार्वजनिक संस्थानों की भागीदारी किस सीमा तक हो और लाभार्थियों, विद्यार्थियों तथा सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी स्वैच्छिक है या प्रशासनिक निर्देश के रूप में लागू की जा रही है।
इस अभियान को लेकर अब यह सवाल भी उठ रहा है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन और उनकी सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के नाम पर आयोजित कार्यक्रमों में सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और आंगनवाड़ी तंत्र की भूमिका किस सीमा तक होनी चाहिए।
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन और उनके 25 साल के सार्वजनिक सेवा काल के अवसर पर भाजपा द्वारा 'सेवा संकल्प अभियान' चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत आज शाम को लोगों से 'आशीर्वाद का दीया' (दीपक) जलाने की अपील की गई है।सोशल मीडिया
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन यानी 17 सितंबर को भारतीय जनता पार्टी और कई भाजपा-शासित राज्यों में ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। अभियान में लाभार्थी परिवारों से प्रधानमंत्री के लिए दीप जलाने, विभिन्न स्थानों पर सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन, स्कूल-कॉलेजों में गतिविधियां और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से संपर्क जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।

इस अभियान को लेकर अब यह सवाल भी उठ रहा है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन और उनकी सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के नाम पर आयोजित कार्यक्रमों में सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और आंगनवाड़ी तंत्र की भूमिका किस सीमा तक होनी चाहिए।

राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कार्यक्रम को लेकर स्पष्ट नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा, "जिस देश में छात्र और युवा नौकरी और एक ईमानदार परीक्षा व्यवस्था के लिए संघर्ष कर रहे हों, जहाँ देश का एक बड़ा हिस्सा अलग-अलग आपदाओं से जूझ रहा हो, जहाँ आय की असमानता विकराल रूप ले चुकी हो और जहाँ छात्रावासों की कमी तक मौत का कारण बन जाए….उस देश और इस दौर में “एक दिया आशीर्वाद के नाम” जैसी कवायद एक सनक-सी लगती है। माफ़ कीजिए, लेकिन अब नीरो और रोम के जलने का उदाहरण भी बासी लगता है। जय हिन्द।"

राजद सांसद पप्पू यादव ने भी x पर किये एक पोस्ट में लिखा, " PM के जन्मदिन पर दीया जलाने को कितनी बेचैन है सरकार?सारी शर्म को ताक पर रख दिया। राज्य का 18 जिला बाढ़ प्लावित है,उस दौरान सारे शिक्षकों को मोदी जी के जन्मदिन पर दीया जलाने के अभियान में लगाना,इनके बेशर्मी के विश्वगुरु होना का नग्न प्रमाण है। मूर्खों शिक्षकों का तो न करो अपमान।"

Cockroach Janta Party (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास ने 16 सितंबर को X पर एक संदेश साझा किया। उनके अनुसार, यह संदेश मध्य प्रदेश में कार्यरत एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की बेटी ने उन्हें भेजा है। संदेश में दावा किया गया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से ग्रामीण महिलाओं को एकत्र करने, दीये जलवाने, प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन मनाने और सरकार की योजनाओं की प्रशंसा करते हुए वीडियो रिकॉर्ड करने के लिए कहा गया है। संदेश में यह भी दावा है कि ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

मध्य प्रदेश में क्या आधिकारिक रूप से तय है?

मध्य प्रदेश सरकार ने 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान-2026’ चलाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई तैयारियों की समीक्षा के मुताबिक अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से होगी।

सरकारी योजना के अनुसार शाम 7 बजे उज्जैन के महाकाल लोक सहित प्रदेश की ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों के प्रत्येक वार्ड में दीप प्रज्ज्वलन की योजना है। अभियान में लाभार्थी परिवारों और विभिन्न सरकारी योजनाओं से जुड़े लोगों की भागीदारी भी रखी गई है।

मध्य प्रदेश में अभियान के तहत कुल 13 प्रमुख कार्यक्रमों की योजना बताई गई है। इनमें ‘आशीर्वाद का दीया’, ‘नमो सेवा गाथा’, ‘आंगन का उत्सव’, ‘कहानी बदलाव की’, ‘सेवा ज्योति यात्रा’, ‘सेवा मेरा योगदान’, ‘सेवा सेतु अभियान’ और ‘जनसेवक महाकुंभ’ जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।

मध्य प्रदेश में भाजपा की ओर से जारी अभियान संबंधी जानकारी में यह भी कहा गया है कि 17 सितंबर को प्रदेश के 71,930 बूथों पर ‘आशीर्वाद का दीया’ आयोजित किया जाएगा। पार्टी के अनुसार, प्रत्येक दीपक प्रधानमंत्री मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा के प्रति कृतज्ञता और विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक होगा।

मध्य प्रदेश की आधिकारिक अभियान योजना में आंगनवाड़ी केंद्रों से संबंधित कार्यक्रम भी शामिल हैं। ‘आंगन का उत्सव’ के तहत 25 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच आंगनवाड़ी केंद्रों पर कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। इनमें कार्यकर्ताओं और आशा कार्यकर्ताओं के सम्मान तथा महिलाओं और बच्चों से संबंधित स्वास्थ्य एवं पोषण योजनाओं की जानकारी देने की योजना है।

यानी यह तथ्य आधिकारिक रूप से पुष्ट है कि आंगनवाड़ी तंत्र को सेवा संकल्प अभियान की गतिविधियों में शामिल किया गया है।

मध्य प्रदेश के छतरपुर से संबंधित एक स्थानीय रिपोर्ट में भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा ‘लाड़ली बहना’ और ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ के लाभार्थियों को पीले चावल देकर ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण देने की जानकारी प्रकाशित हुई है।

 जिला शिक्षा पदाधिकारी, जहानाबाद के कार्यालय के आदेश के मुताबिक प्रत्येक विद्यालय/महाविद्यालय में शिक्षक, प्राचार्य और व्याख्याता शाम 6:30 बजे एकत्र होंगे और शाम 7:15 बजे कम से कम 100 दीपों का सुरक्षित रूप से प्रज्ज्वलन करेंगे।
जिला शिक्षा पदाधिकारी, जहानाबाद के कार्यालय के आदेश के मुताबिक प्रत्येक विद्यालय/महाविद्यालय में शिक्षक, प्राचार्य और व्याख्याता शाम 6:30 बजे एकत्र होंगे और शाम 7:15 बजे कम से कम 100 दीपों का सुरक्षित रूप से प्रज्ज्वलन करेंगे।

बिहार के जहानाबाद में स्कूलों को 100 दीये जलाने का लिखित निर्देश

इसी बहस के बीच बिहार के जहानाबाद जिले से सामने आया एक लिखित प्रशासनिक आदेश इस मुद्दे को एक अलग आयाम देता है। जिला शिक्षा पदाधिकारी, जहानाबाद के कार्यालय के आदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित करने का उल्लेख है। आदेश में 17 सितंबर की गतिविधि की थीम ‘आशीर्वाद का दीया’ दी गई है।

आदेश के मुताबिक प्रत्येक विद्यालय/महाविद्यालय में शिक्षक, प्राचार्य और व्याख्याता शाम 6:30 बजे एकत्र होंगे और शाम 7:15 बजे कम से कम 100 दीपों का सुरक्षित रूप से प्रज्ज्वलन करेंगे। इसके फोटो और वीडियो शिक्षा विभाग के WhatsApp ग्रुप में समय पर साझा करने को कहा गया है, ताकि उन्हें जिला स्तर पर समेकित कर वीडियो/प्रदर्शनी तैयार की जा सके।

प्रधानाध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापक/प्राचार्य को कार्यक्रम के लिए साझा किए गए फ्लैक्स का प्रिंट निकालकर कार्यक्रम में इस्तेमाल करने और फोटो/वीडियो साझा करने की जिम्मेदारी भी दी गई है। आदेश में यह भी कहा गया है कि विद्यालय प्रधान को इस कार्य के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार माना जाएगा और किसी प्रकार की लापरवाही को अवांछनीय बताया गया है।

उत्तर प्रदेश में भी 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभियान की कार्ययोजना साझा की है। ‘आशीर्वाद का दीया’ के तहत प्रदेश के गांवों और वार्डों में दीप प्रज्ज्वलन की योजना है।

केंद्र एवं राज्य की योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों का त्रिस्तरीय डेटा बैंक तैयार होगा। कुल 4.19 करोड़ परिवारों और 15.74 करोड़ लाभार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य है। 17 सितंबर को ‘सेवा दिवस-आशीर्वाद का दीया’ से कार्यक्रम की शुरुआत होगी। शाम सात बजे घरों और प्रतिष्ठानों पर दीप प्रज्वलन कर सेवा एवं विकसित भारत के संकल्प से जुड़ने का आह्वान किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के अभियान में स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों को भी जोड़ा गया है। ‘मेरे सपनों का भारत चित्र सेवा’ के तहत सरकारी और निजी स्कूलों में 17 सितंबर से 7 अक्टूबर के बीच चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं की योजना है। उच्च शिक्षा संस्थानों में भी चित्रकला, भाषण और वाद-विवाद जैसी गतिविधियां प्रस्तावित हैं।

‘नमो सेवा—अनकही कहानियां’ के तहत स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों और सार्वजनिक स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और नुक्कड़ नाटक आयोजित करने की भी योजना बताई गई है।

राजस्थान में आयोजन को लेकर विवाद- पीयुसीएल ने किया विरोध

राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर कॉलेज शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक आदेश को लेकर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी कॉलेजों के प्राचार्यों को ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम आयोजित करने, उसमें विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और उसकी तस्वीरें व वीडियो पोर्टल पर अपलोड करने के कड़े निर्देश दिए हैं। इस सरकारी फरमान के सामने आने के बाद मानवाधिकार संगठन People’s Union for Civil Liberties (PUCL) Rajasthan ने इस पर तीव्र आपत्ति जताई है और इस निर्देश को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

PUCL के अनंत भटनागर, भंवर मेघवंशी और राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों को इस तरह के राजनीतिक और व्यक्ति-केंद्रित आयोजनों से दूर रखना चाहिए। संगठन के अनुसार, विश्वविद्यालय और कॉलेज स्वतंत्र सोच तथा वैज्ञानिक चेतना विकसित करने के केंद्र हैं। उन पर किसी व्यक्ति विशेष के जन्मदिन से जुड़े धार्मिक या राजनीतिक प्रतीकों (जैसे दीया जलाना) को अनिवार्य रूप से थोपना शिक्षण संस्थानों की मूल भावना के खिलाफ है। कॉलेजों से कार्यक्रम की फोटो और वीडियो अपलोड कराने के आदेश को लेकर भी विरोध हो रहा है, जिसे आलोचक छात्रों और प्राचार्यों पर अनुचित प्रशासनिक दबाव मान रहे हैं।

‘आशीर्वाद का दीया’ आखिर है क्या?

‘आशीर्वाद का दीया’ भाजपा के एक महीने चलने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ का शुरुआती कार्यक्रम है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने लोगों से 17 सितंबर की शाम अपने घरों में दीप जलाकर प्रधानमंत्री मोदी की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करने की अपील की थी।

अभियान के तहत सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के घर जाकर दीप जलाने की योजना भी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बूथ कार्यकर्ताओं को लाभार्थियों के घर जाकर दीप जलाने के लिए प्रेरित करने और इसकी तस्वीरें ऑनलाइन साझा करने की योजना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने 17 सितंबर को स्वयं ‘आशीर्वाद का दीया’ को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने X पर लिखा कि यह स्नेह की अभिव्यक्ति उन्हें गहराई से छू गई और हर आशीर्वाद भारत की सेवा के उनके संकल्प को मजबूत करता है।

भाजपा और सरकारों की ओर से अभियान को प्रधानमंत्री के जन्मदिन तक सीमित व्यक्तिगत उत्सव के बजाय उनकी सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष पूरे होने और ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़कर पेश किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार अभियान में रक्तदान, स्वच्छता, स्वास्थ्य, नवाचार, सरकारी योजनाओं तक पहुंच और जनभागीदारी जैसी गतिविधियां भी होंगी। उत्तर प्रदेश की कार्ययोजना में भी सेवा, जनकल्याण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, छात्र प्रतियोगिताएं और लाभार्थियों से संपर्क जैसी गतिविधियां शामिल हैं।

यानि अभियान में केवल दीप प्रज्ज्वलन ही नहीं है। विवाद का केंद्र मुख्यतः यह सवाल है कि सरकारी मशीनरी और सार्वजनिक संस्थानों की भागीदारी किस सीमा तक हो और लाभार्थियों, विद्यार्थियों तथा सरकारी कर्मचारियों की भागीदारी स्वैच्छिक है या प्रशासनिक निर्देश के रूप में लागू की जा रही है।

‘आशीर्वाद का दीया’ के आयोजन और इसमें आम नागरिकों की स्वैच्छिक भागीदारी अपने आप में अलग मुद्दा है। लेकिन जब स्कूल, कॉलेज, आंगनवाड़ी केंद्र, सरकारी कर्मचारी या कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी प्रशासनिक निर्देशों के माध्यम से किसी राजनीतिक नेता के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रम में शामिल किए जाते हैं, तब सार्वजनिक संस्थानों की भूमिका और स्वैच्छिक भागीदारी का सवाल उठना स्वाभाविक है।

इस अभियान को लेकर अब यह सवाल भी उठ रहा है कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन और उनकी सार्वजनिक सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के नाम पर आयोजित कार्यक्रमों में सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों और आंगनवाड़ी तंत्र की भूमिका किस सीमा तक होनी चाहिए।
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