जामिया में छात्रों की मांग के आगे प्रशासन नरम: संघ चुनाव का रास्ता खुला, नोटिस-निलंबन वापस

रजिस्ट्रार का लिखित आदेश जारी; 12 अक्टूबर से चल रहे आंदोलन के बाद प्रशासन का फैसला, छात्रों ने चुनाव संबंधी आश्वासन को ठुकराया, आंदोलन जारी रखने का संकल्प
छात्र संघ के चुनाव 2006 से नहीं हुए हैं।
जामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने और छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग को लेकर 12 अक्टूबर से छात्र भूख हड़ताल पर बैठे।सोशल मीडिया
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नई दिल्ली- करीब दो हफ्ते चले आंदोलन के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन ने सोमवार को एक औपचारिक आदेश जारी कर दो दशक से रुके छात्र संघ चुनाव की दिशा में पहला लिखित कदम उठाया है। रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी के हस्ताक्षर वाले 26 अक्टूबर के इस आदेश में कहा गया है कि छात्र संघ का चुनाव संघ के संविधान की मंज़ूरी के 15 दिन बाद कराया जाएगा, आंदोलन के दौरान छात्रों को दिए गए निलंबन और कारण-बताओ नोटिस वापस लिए जाएंगे, और सुरक्षा कर्मियों के आचरण की जांच के लिए समिति बनेगी। आदेश के मुताबिक यह फैसला भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों और उनके प्रतिनिधियों के मांग-पत्र पर विचार के बाद लिया गया है।

आदेश की सामग्री तीन हिस्सों में है और एक अतिरिक्त शर्त के साथ आती है। पहला, चुनाव की समय-सीमा: संघ के संविधान की मंज़ूरी की तारीख से 15 दिन बाद चुनाव होगा। दूसरा, आंदोलन की अवधि में छात्रों को जारी किए गए सभी निलंबन और कारण-बताओ नोटिस रद्द माने जाएंगे। तीसरा, आंदोलन के दौरान सुरक्षा कर्मियों की कार्रवाई की जांच के लिए एक समिति गठित होगी।

आदेश के अनुसार आंदोलनकारी छात्रों ने सहमति दी है कि आंदोलन के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ किए गए किसी भी मानहानिकारक बयान, कार्य या पोस्ट के लिए वे प्रेस कॉन्फ्रेंस करके सार्वजनिक माफी मांगेंगे। ऐसे सभी पोस्ट सोशल मीडिया चैनलों से तुरंत हटाए जाएंगे। आदेश में कहा गया है कि इस प्रस्तुति को रिकॉर्ड पर लिया गया है और इसके अनुपालन की निगरानी की जाएगी। आदेश के अंत में लिखा है कि इसके जारी होते ही आंदोलन तुरंत खत्म माना जाएगा।

रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी द्वारा जारी आदेश
रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी द्वारा जारी आदेश

हालाँकि, छात्रों ने संविधान को मंजूरी देने और चुनाव कराने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा न होने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि इस आदेश में प्रॉक्टर के इस्तीफे की उनकी मांग पर कोई बात नहीं की गई है।

छात्र सगंठन का कहना है. "ठोस फैसलों और स्पष्ट रोडमैप के बिना दिए गए आश्वासनों को हमारी मांगों का पूरा होना नहीं माना जा सकता।" छात्रों ने कहा कि जब तक प्रशासन उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए लिखित रूप में कोई स्पष्ट वादा नहीं करता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

आगे कहा गया है कि इस विरोध-प्रदर्शन का मकसद कैंपस में लोकतांत्रिक अधिकारों को हासिल करना और छात्रों का सार्थक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है, न कि उन अस्पष्ट आश्वासनों को मान लेना जिन्हें छात्र महज दिखावा मानते हैं।

विश्वविद्यालय के आदेश में यह भी दर्ज है कि विरोध कर रहे छात्रों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की बात कही है। यह माफी उन कथित अपमानजनक बयानों, कार्यों या सोशल मीडिया पोस्ट के लिए होगी, जो विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ किए गए थे।

आदेश में कहा गया है कि इन पोस्ट को तुरंत सोशल मीडिया से हटा दिया जाए, और यह भी बताया गया है कि इस निर्देश का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी निगरानी की जाएगी।

यह घटनाक्रम विश्वविद्यालय में लगभग दो सप्ताह से चल रहे उस आंदोलन के बीच सामने आया है, जिसमें जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) को बहाल करने की मांग की जा रही है; इस छात्र संघ के चुनाव 2006 से नहीं हुए हैं।

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