राजस्थान यूनिवर्सिटी ने रीवैल्यूएशन फीस का हिसाब छुपाया, आशुतोष रांका बोले- पूरे बैच की बैक लगाकर लूट...

विश्वविद्यालय के जवाब में कोई आंकड़ा नहीं दिया गया। केवल यही कहा गया कि सूचना उपलब्ध कराना संभव नहीं है।
रांका ने पांच शैक्षणिक वर्षों (2021-22 से 2025-26) तक रीवैल्यूएशन के लिए छात्रों से वसूली गई फीस से जुड़ी जानकारी मांगी थी।
रांका ने पांच शैक्षणिक वर्षों (2021-22 से 2025-26) तक रीवैल्यूएशन के लिए छात्रों से वसूली गई फीस से जुड़ी जानकारी मांगी थी।
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जयपुर- राजस्थान विश्वविद्यालय ने परीक्षा रीवैल्यूएशन (रीचेकिंग/रीटोटलिंग) के नाम पर छात्रों से वसूली गई फीस का ब्योरा देने से इनकार कर दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत दाखिल आवेदन का जवाब देते हुए विश्वविद्यालय ने कहा है कि चाही गई सूचना विस्तृत और श्रमसाध्य है, मांगे गए प्रारूप में संधारित नहीं है, प्रश्नवाचक प्रकृति की है, विशिष्टता का अभाव है और लोकहित स्पष्ट नहीं है। इसलिए सूचना उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

रांका ने पांच शैक्षणिक वर्षों (2021-22 से 2025-26) की जानकारी मांगी थी। इसमें रीवैल्यूएशन के लिए छात्रों से वसूली गई कुल फीस, प्रत्येक वर्ष प्रति विषय/पेपर निर्धारित फीस, हर साल आए आवेदनों की संख्या और वसूली गई राशि का मदवार उपयोग शामिल था। उन्होंने अनुरोध किया था कि जानकारी सारणीबद्ध प्रारूप में सॉफ्ट कॉपी में दी जाए। अगर समेकित रिपोर्ट, ऑडिट स्टेटमेंट या वित्तीय रिकॉर्ड मौजूद हैं तो उनकी प्रति भी उपलब्ध कराई जाए।

विश्वविद्यालय के जवाब में इन बिंदुओं पर कोई आंकड़ा नहीं दिया गया। केवल यही कहा गया कि सूचना उपलब्ध कराना संभव नहीं है।

इस जवाब पर आशुतोष रांका ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, “पिछले कुछ महीनों में मैं कई बार राजस्थान यूनिवर्सिटी से एग्जाम रीवैल्यूएशन के नाम पर छात्रों से वसूली गई फीस के बारे में जानकारी मांग चुका हूं। पूरे राजस्थान में तमाम कॉलेज में रीवैल्यूएशन के नाम पर लूट मचा रखी है। पूरे के पूरे बैच की एग्जाम में बैक लगाकर मोटे पैसे लिए जा रहे हैं। लेकिन इस बारे में जानकारी मांगो तो इनके पसीने छूट जाते हैं। लगता है कि पैसा ऊपर तक जा रहा है। सच का पता तो लगाकर रहेंगे! यह लूट बंद करवाकर ही दम लेंगे।”

रांका का कहना है कि बार-बार जानकारी मांगने के बावजूद विश्वविद्यालय पारदर्शिता नहीं दिखा रहा। छात्र संगठन और शिक्षा कार्यकर्ता लंबे समय से रीवैल्यूएशन प्रक्रिया में मनमाने शुल्क और बड़े पैमाने पर बैक पेपर लगने की शिकायत करते रहे हैं। इस RTI जवाब के बाद अब सवाल यह है कि अगर फीस का हिसाब लोकहित में नहीं माना जा रहा तो विश्वविद्यालय इस राशि का उपयोग कैसे कर रहा है।

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