
नई दिल्ली- जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली को लेकर 12 अक्टूबर से चल रहा आंदोलन गुरुवार देर रात खत्म हो गया। देर रात कुलगुरु प्रो. मजहर आसिफ व रजिस्ट्रार प्रो. महताब आलम रिजवी भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के बीच पहुंचे और सभी मांगें मान लेने की जानकारी दी। रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ के संविधान का अनुमोदन और उसे लागू करने की प्रक्रिया 15 मई 2027 तक पूरी कर ली जाएगी।
रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर वाले 29 अक्टूबर के आदेश में प्रशासन ने पहली बार संविधान की मंज़ूरी की तारीख तय की है।रजिस्ट्रार कार्यालय ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) के संविधान को मंज़ूर करने और लागू करने की तारीख 15 मई 2027 तय की है और आदेश गुरुवार देर रात पढ़कर सुनाया गया। जामिया प्रशासन के आदेश के बाद अनशनकारी छात्रों ने अपना उपवास तोड़ दिया। यह आंदोलन 18 दिन चला।
छात्रों के मुताबिक भूख हड़ताल और अनिश्चितकालीन धरने के बाद, जामिया के छात्र अपनी मुख्य मांगों को मनवाने में सफल रहे हैं। छात्र लगातार यह मांग कर रहे थे कि छात्र संघ की बहाली के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए। छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद, अब इस जीत पर मुहर लग गई है। बातचीत में छात्रों की ओर से मोहियुद्दीन (एनएसयूआई के एबिन बेसिल के प्रतिनिधि), फरहान इसराइल (रेहान खान के प्रतिनिधि), लुबैब, उत्तरा, नेविल थामस, सहद और हबीबा शामिल रहे।
आदेश तीन बिंदुओं का है। पहला, जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ के संविधान की मंज़ूरी और उसका कार्यान्वयन 15 मई 2027 तक पूरा किया जाएगा। दूसरा, संविधान की मंज़ूरी के बाद विश्वविद्यालय लिंगदोह समिति की सिफारिशों और दिशा-निर्देशों के अनुसार चुनाव की अधिसूचना जारी करेगा। आदेश के पाठ के मुताबिक चुनाव अकादमिक सत्र शुरू होने के छह हफ्ते के भीतर कराए जाएंगे, यानी 16 जुलाई 2027 से लगभग छह हफ्ते के अंदर चुनाव होने की उम्मीद है। इस हिसाब से समय-सीमा अगस्त के अंत तक पहुंचती है। तीसरा, आंदोलन की अवधि में दिए गए सभी चालू कारण-बताओ नोटिस, अनुशासनात्मक कार्रवाइयां, रस्टिकेशन, निलंबन और कैंपस प्रतिबंध के आदेश रद्द किए गए हैं। आदेश के अंत में हड़ताली छात्रों से तुरंत हड़ताल और प्रदर्शन खत्म करने को कहा गया है।
रजिस्ट्रार रिज़वी ने कहा कि विश्वविद्यालय को छात्रों की ओर से तीन लिखित मांगें मिली थीं। उनके मुताबिक पहली मांग 15 मई 2027 तक छात्र संघ के संविधान का मसौदा तैयार करने की थी और दूसरी यह कि संविधान तैयार होते ही चुनाव लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार कराए जाएं। रजिस्ट्रार के अनुसार प्रशासन ने यह मांग मान ली है और मसौदा 15 मई 2027 तक तैयार करने पर सहमति दी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि संविधान तैयार करने वाली समिति में प्रोफेसरों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ छात्र प्रतिनिधि भी होंगे। हर फैकल्टी से प्रतिनिधि चुने जाएंगे ताकि छात्रों की लोकतांत्रिक भागीदारी और उनके विचारों पर उचित ध्यान सुनिश्चित हो।
आदेश का महत्व पिछले आदेश से तुलना करने पर समझ आता है। 26 अक्टूबर को विश्वविद्यालय ने संविधान की मंज़ूरी के 15 दिन बाद चुनाव कराने का आदेश दिया था, लेकिन उसमें कोई तारीख नहीं थी। नया आदेश मंज़ूरी की एक निश्चित तारीख देता है। छात्रों ने 26 अक्टूबर के आदेश को ठुकरा दिया था। उस समय जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन ने कहा था कि आदेश में छात्र संघ की बहाली पर स्पष्ट और असंदिग्ध घोषणा नहीं है। पहले छात्र चाहते थे कि संविधान 20 दिसंबर तक तैयार और मंज़ूर हो और उसके 15 दिन बाद चुनाव हों, जबकि नया आदेश समय-सीमा को मई 2027 तक ले जाता है। यह तथ्य दिलचस्प इसलिए है कि रजिस्ट्रार का कहना है कि 15 मई की तारीख छात्रों की अपनी लिखित मांग का हिस्सा थी।
दूसरा फर्क कार्रवाई की वापसी का दायरा है। 26 अक्टूबर के आदेश में निलंबन और कारण-बताओ नोटिस रद्द किए गए थे, जबकि 29 अक्टूबर के आदेश में रस्टिकेशन और कैंपस प्रतिबंध भी जोड़े गए हैं। यानी एबिन बेसिल जैसे छात्रों पर लगी कार्रवाई का मामला भी इसमें आता है, जिनके बारे में पहले की रिपोर्टों में एक साल के रस्टिकेशन का जिक्र था।
आदेश के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने जामिया परिसर में जश्न मनाना शुरू कर दिया। यह छात्र संघ की बहाली की मांग करने वाले छात्रों के लिए बड़ा मोड़ बताया जा रहा है। हालाँकि विशेषज्ञ कहते है यह जीत एक लिखित, समयबद्ध प्रतिबद्धता की है, चुनाव की नहीं। असली परीक्षा संविधान के मसौदे, उसकी मंज़ूरी और लिंगदोह सिफारिशों के अनुरूप अधिसूचना की होगी।
एबिन बासिल इस आंदोलन के सबसे चर्चित अनशनकारी थे। 23 साल के बासिल जामिया में कानून के तीसरे वर्ष के छात्र हैं और 12 अक्टूबर से उपवास पर थे। 29 अक्टूबर को उनके अनशन का 18वां दिन था। बासिल राष्ट्रीय छात्र संगठन NSUI से जुड़े हैं और उन्होंने कहा था कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन चलेगा। 16 अक्टूबर को विश्वविद्यालय ने उन्हें एक साल के लिए रस्टिकेट किया था। एबिन के अलावा मोहम्मद जासिम खान, रेहान हैदर, रेहान खान और फैज़ान अली खान भी अनशन पर थे, 17 अक्टूबर की कार्रवाई में जासिम खान की सेहत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, और जासिम तथा रेहान हैदर को निलंबित कर कैंपस से प्रतिबंधित किया गया। रेहान खान और एबिन बासिल उपवास जारी रखे रहे। बाद में SFI के अबूज़र, अल्ताफ समेत तीन और छात्र अनशन में जुड़े।
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