
नई दिल्ली- दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार 7 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के एक्स अकाउंट को अनब्लॉक करने का आदेश दे दिया। जस्टिस स्वराना कांता शर्मा की पीठ ने अभिजीत दीपके की याचिका को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार की मुख्य चिंता को अब प्रासंगिक नहीं माना। अदालत ने कहा कि चूंकि एनईईटी परीक्षा समाप्त हो चुकी है, इसलिए अकाउंट ब्लॉक करने का मूल आधार अब लागू नहीं होता।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार ने पार्टी के अकाउंट को ब्लॉक करने का मुख्य कारण यह था कि उनके पोस्ट एनईईटी परीक्षा के दौरान छात्रों और अभिभावकों में अराजकता पैदा कर सकते थे। अदालत ने इस दलील को ध्यान में रखते हुए कहा कि परीक्षा प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है और संबंधित चिंता समाप्त हो गई है। इसके आधार पर याचिका मंजूर कर अकाउंट को तुरंत अनब्लॉक करने का निर्देश दिया गया।
गौरतलब है कि 21 मई को सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के निर्देश पर CJP का X अकाउंट भारत में निलंबित कर दिया था। एक अधिकारी ने मीडिया को बताया कि Intelligence Bureau ने MeitY को सूचित किया था कि यह अकाउंट 'देश की संप्रभुता के लिए खतरा' है और 'राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुँचा सकने वाला भड़काऊ कंटेंट' पोस्ट कर रहा है।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस फैसले की घोषणा करते हुए एक्स पर पोस्ट किया, “कॉकरोच जनता पार्टी के लिए बड़ी जीत। दिल्ली हाईकोर्ट ने हमारे मूल एक्स अकाउंट @CJP_2029 को अनब्लॉक करने का आदेश दिया है। यह जीत सिर्फ सीजेपी और आंदोलन के लिए नहीं, बल्कि फ्री स्पीच और डिजिटल अधिकारों के लिए भी बड़ी जीत है। हम युवाओं की आवाज को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह उठाते रहेंगे।”
इस बीच, एनईईटी पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन में सोनम वांगचुक भूख हड़ताल के 11वें दिन पहुंच गए हैं। उनके स्वास्थ्य में गिरावट के बावजूद उन्होंने अन्य युवा हड़तालियों से मुलाकात की और शरीर व मन को संयम में रखने के टिप्स साझा किए।
दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और युवा आंदोलनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अनब्लॉकिंग के बाद सीजेपी अब अपने अभियान को और मजबूती से आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने एक सुनवाई के दौरान बेरोज़गार युवाओं की तुलना 'कॉकरोच' और 'परजीवियों' से की थी। CJI ने बाद में सफाई दी कि उनके शब्दों को मीडिया ने गलत संदर्भ में पेश किया और उनका आशय नकली डिग्रियों से नौकरी पाने वालों से था। लेकिन तब तक वह चिंगारी लाखों-करोड़ों निराश युवाओं के सीने में लगी आग को हवा दे चुकी थी।
16 मई 2026 की शाम, बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस के स्टूडेंट और महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर निवासी 30 वर्षीय अभिजीत दीपके ने एक ट्वीट किया।
पेशे से राजनीतिक संचार रणनीतिकार दीपके ने उस अपमान को ही अपना हथियार बना लिया। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) लांच की, जो सीधे-सीधे PM नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी (BJP) का व्यंग्यात्मक रूपांतरण था। पार्टी का घोषणापत्र, उसका लोगो, उसका सदस्यता फॉर्म सब कुछ एक सोची-समझी बौद्धिक चुनौती की तरह था। पार्टी की पात्रता शर्तें मज़ेदार लेकिन तीखी थीं: बेरोज़गार हों, आलसी हों, क्रॉनिकली ऑनलाइन रहते हों और पेशेवर तरीके से शिकायत कर सकते हों। नारा था — 'Secular – Socialist – Democratic – Lazy'
जो बात महज़ एक व्यंग्यात्मक पोस्ट से शुरू हुई थी, वह तूफान में तब्दील हो गई। एक हफ्ते से भी कम समय में CJP के इंस्टाग्राम पर 2 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हो गए- यह संख्या BJP के 88 लाख और कांग्रेस के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स से कहीं अधिक थी। गूगल फॉर्म के ज़रिए 3.5 लाख से ज़्यादा लोगों ने पार्टी की सदस्यता ली। पार्टी की वेबसाइट cockroachjantaparty.org पर दीपके के अनुसार लगभग 10 लाख उपयोगकर्ताओं ने पंजीकरण कराया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करने की माँग वाली ऑनलाइन पिटीशन पर करीब 6 लाख हस्ताक्षर एकत्र हो गए। cjp की इसी बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर सरकार ने पांचवे दिन इसके ट्विटर अकाउंट को बंद करवा दिया। अकाउंट ब्लॉक होने के बाद संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने केंद्र सरकार के जवाब के आधार पर यह फैसला सुनाया।
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