JNU कावेरी हॉस्टल में 12 साल बाद दलित छात्र ने किया अध्यक्ष पद का दावा तो हो गया हंगामा, चुनाव निरस्त- पूरा मामला जानें

छात्रों का कहना है कि जातिवादी और मनुवादी मानसिकता वाले लोगों को दलित उम्मीदवार की दावेदारी बर्दाश्त नहीं हुई, इसलिए उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही हैक करके व्यवधान डाला।
अजय कुमार का कहना है कि एक दलित छात्र के अध्यक्ष बनने के विचार से ही विपक्षी पक्ष बौखला गया और उन्होंने जानबूझकर हंगामा किया। छात्रों के बीच हाथापाई और मारपीट हुई जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया रद्द हो गई।
अजय कुमार का कहना है कि एक दलित छात्र के अध्यक्ष बनने के विचार से ही विपक्षी पक्ष बौखला गया और उन्होंने जानबूझकर हंगामा किया। छात्रों के बीच हाथापाई और मारपीट हुई जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया रद्द हो गई। ग्राफिक: आसिफ निसार/द मूकनायक
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नई दिल्ली- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के कावेरी हॉस्टल में छात्र संघ चुनाव को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हॉस्टल के चुनाव प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया है, जिसके पीछे दलित उम्मीदवार के अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर जातिवादी मानसिकता और हिंसा का आरोप लगा है। यह वही कावेरी हॉस्टल है, जहां कुछ समय पहले दीवारों पर " चमार, दलित भारत छोड़ो", "ब्राह्मण बनिया जिंदाबाद" जैसे घृणित जातिवादी नारे लिखे गए थे, जिसकी व्यापक निंदा हुई थी।

कावेरी हॉस्टल में पीजी, यूजी और पीएचडी मिलाकर कुल 308 छात्र रहते हैं। यहां हर साल छात्रों के कल्याण से जुड़े मुद्दों जैसे बेहतर बुनियादी सुविधाएं, अच्छा खाना, साफ-सफाई, मेस व्यवस्था और अन्य छात्र हितों को हल करने के लिए छात्र संघ (स्टूडेंट्स बॉडी) का चुनाव होता है। इस बार 12 साल बाद किसी दलित छात्र ने अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी की थी। इतने बरसों से छात्रवास कमेटी में कोई एससी समुदाय का प्रतिनिधि नहीं रहा, आदिवासी समुदाय के छात्र रहे लेकिन वे कट्टर आरएसएस विचारधारा से बताये जाते हैं।

प्रोग्रेसिव पैनल की ओर से अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अजय कुमार राव, जो हिंदी साहित्य में पीएचडी के छात्र हैं, ने द मूकनायक को अपनी आपबीती बताई। उन्होंने कहा कि हॉस्टल में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने, छात्रों के हितों की रक्षा करने और कल्याणकारी मुद्दों पर काम करने के लिए हर साल चुनाव होते हैं।

हॉस्टल चुनाव की प्रक्रिया पूरी तरह लोकतांत्रिक और पारदर्शी होती है। विभिन्न पदों (जैसे अध्यक्ष, सदस्य आदि) के लिए नामांकित उम्मीदवारों के नाम चुनाव समिति (Election Committee) जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) में सामने रखती है।

इस मीटिंग में प्रत्येक उम्मीदवार के नाम के सामने छात्रों से समर्थन मांगा जाता है। छात्र हाथ उठाकर (hand raising) अपना सपोर्ट दिखाते हैं। जिन उम्मीदवारों को बहुमत (majority) के रूप में सबसे अधिक हाथ उठते हैं, वे संबंधित पद के लिए चुने जाते हैं।

यह प्रक्रिया सहमति (consensus) और प्रत्यक्ष लोकतंत्र पर आधारित होती है, जिसमें सभी निवासी छात्र भाग ले सकते हैं। JNU जैसे कैंपस में हॉस्टल स्तर पर यह तरीका आम है, जहां वोटिंग बैलट पेपर की बजाय हाथ उठाकर निर्णय लिया जाता है, ताकि प्रक्रिया तेज, निष्पक्ष और सभी की भागीदारी सुनिश्चित हो। यह विधि छात्रों की सामूहिक इच्छा को स्पष्ट रूप से व्यक्त करती है और किसी भी विवाद की स्थिति में GBM में ही तुरंत फैसला हो जाता है।

इस बार चुनाव की प्रक्रिया इस प्रकार शुरू हुई, 3 फरवरी को चुनाव अधिसूचना जारी की गई।चुनाव करवाने वाली बॉडी चुनाव कमिटी (Election Committee) होती है, जिसमें 6 न्यूट्रल और ओपन आइडियोलॉजी वाले छात्र शामिल होते हैं। हॉस्टल की जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) में चुनाव कमिटी चुनी गई, जिसमें ताल्हा अंसारी जनरल बॉडी मीटिंग में चुने गए, बाकी 5 स्टूडेंट्स विजय जायसवाल,अनुभव त्रिपाठी, प्रियांशु चतुर्वेदी,रितुल जोशी और अनिमेश कुमार का चुनाव लोकतान्त्रिक नहीं था क्योंकि ये आरएसएस विचारधारा के हैं और प्रॉक्टर द्वारा कुछ के विरुद्ध जांच भी चल रही है।

अजय कुमार राव का आरोप है कि ताल्हा अंसारी को छोड़कर बाकी सदस्यों का चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से सहमति से नहीं हुआ था। एक दलित छात्र के अध्यक्ष बनने के विचार से ही विपक्षी पक्ष बौखला गया और उन्होंने हंगामा किया। छात्रों के बीच हाथापाई और मारपीट हुई। विवाद के बीच अजय का चश्मा टूट गया, कुछ को मामूली चोटें भी आई, छात्रों ने इसकी शिकायत वार्डन को दी, जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया निरस्त कर दी गई।

अजय कुमार का कहना है कि एक दलित छात्र के अध्यक्ष बनने के विचार से ही विपक्षी पक्ष बौखला गया और उन्होंने जानबूझकर हंगामा किया। छात्रों के बीच हाथापाई और मारपीट हुई जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया रद्द हो गई।
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बहुजन छात्रों का कहना है कि जातिवादी और मनुवादी मानसिकता वाले लोगों को दलित उम्मीदवार की दावेदारी बर्दाश्त नहीं हुई, इसलिए उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही हैक करके व्यवधान डाला। अजय ने देशभर के कैंपसों में हो रही जातिगत भेदभाव की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि कावेरी हॉस्टल भी इससे अछूता नहीं है।

हॉस्टल में दो प्रमुख छात्र संगठन सक्रिय हैं ABVP और प्रोग्रेसिव पैनल। प्रोग्रेसिव पैनल कांग्रेस, लेफ्ट और अंबेडकरवादी विचारधारा के छात्रों का संयुक्त गठबंधन है, जो सामाजिक समावेशन, समता और समानता के सिद्धांतों पर आधारित व्यवस्था चाहता है। वहीं, विपक्षी विचारधारा वाले छात्र सदियों पुरानी ऊंच-नीच की संकीर्ण सोच में जकड़े हुए हैं।

हॉस्टल में मेस में 5 दिन नॉन-वेज भोजन मिलता है, लेकिन त्योहारों पर नॉन-वेज न बनाने को लेकर भी बहस और विरोध होते रहे हैं। कैंपस में राम नवमी जैसे धार्मिक आयोजन, जुलूस आदि ऐसी चीजें होती हैं, जो शिक्षण कैंपस में संवैधानिक मूल्यों और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ हैं। यह घटना JNU जैसे कथित प्रगतिशील कैंपस में जातिवाद की गहरी जड़ों को उजागर करती है, जहां दलित छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिशें जारी हैं। अजय कुमार और उनके साथियों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने की अपील की है।

अजय कुमार का कहना है कि एक दलित छात्र के अध्यक्ष बनने के विचार से ही विपक्षी पक्ष बौखला गया और उन्होंने जानबूझकर हंगामा किया। छात्रों के बीच हाथापाई और मारपीट हुई जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया रद्द हो गई।
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अजय कुमार का कहना है कि एक दलित छात्र के अध्यक्ष बनने के विचार से ही विपक्षी पक्ष बौखला गया और उन्होंने जानबूझकर हंगामा किया। छात्रों के बीच हाथापाई और मारपीट हुई जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया रद्द हो गई।
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अजय कुमार का कहना है कि एक दलित छात्र के अध्यक्ष बनने के विचार से ही विपक्षी पक्ष बौखला गया और उन्होंने जानबूझकर हंगामा किया। छात्रों के बीच हाथापाई और मारपीट हुई जिसके बाद चुनाव प्रक्रिया रद्द हो गई।
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