पंजाब यूनिवर्सिटी: दलित प्रोफेसर का गंभीर आरोप, 'जाति के आधार पर रोका गया प्रमोशन, विभागाध्यक्ष करती हैं अपमान'

'यह संस्थागत जातिवाद है': डॉ. हरप्रीत सिंह ने विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिता शर्मा पर लगाए जातिसूचक टिप्पणी के आरोप, सोमवार से अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी।
Dalit Professor Harassment, Caste Discrimination
Panjab University में 'संस्थागत जातिवाद'? दलित प्रोफेसर ने HOD पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- 2024 से रोका गया है प्रमोशन।Pic- maktoobmedia.com
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चंडीगढ़: शिक्षा के प्रतिष्ठित संस्थान पंजाब यूनिवर्सिटी (Panjab University) के गलियारों से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ इकोनॉमिक्स विभाग के एक दलित असिस्टेंट प्रोफेसर ने विश्वविद्यालय प्रशासन और अपने ही विभाग की अध्यक्ष (Chairperson) पर जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। पीड़ित प्रोफेसर का कहना है कि पिछले दो सालों से उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

मामले ने तब तूल पकड़ा जब डॉ. हरप्रीत सिंह (असिस्टेंट प्रोफेसर, इकोनॉमिक्स विभाग) ने अपनी मांगों को लेकर वाइस चांसलर (Vice Chancellor) के कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

विभागाध्यक्ष पर लगाए जातिसूचक टिप्पणी के आरोप

मक्तूब मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. हरप्रीत सिंह ने सीधे तौर पर विभाग की चेयरपर्सन डॉ. स्मिता शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि डॉ. शर्मा ने न केवल उनके खिलाफ, बल्कि विभाग के एक अन्य सहयोगी और उनके एक पीएचडी (PhD) छात्र के खिलाफ भी जातिसूचक टिप्पणियाँ की हैं। डॉ. सिंह के अनुसार, विभाग का माहौल जानबूझकर ऐसा बनाया जा रहा है जहाँ उन्हें अपमानित महसूस हो।

2024 से अटका है प्रमोशन: 'यह संस्थागत जातिवाद है'

विरोध प्रदर्शन के दौरान अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए डॉ. हरप्रीत सिंह ने बताया कि प्रोफेसर के पद पर उनका प्रमोशन (Promotion) 2024 से लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्री-स्क्रीनिंग कमेटियों की मिलीभगत से उनकी पदोन्नति की प्रक्रिया को जानबूझकर रोका गया है।

उन्होंने कहा कि इस अन्याय के खिलाफ वे मई 2024 से लगातार विश्वविद्यालय के अधिकारियों को पत्र लिख रहे हैं और अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। अब तक उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

डॉ. सिंह ने भारी मन से कहा: "यह पंजाब यूनिवर्सिटी में 'संस्थागत जातिवाद' (Institutional Casteism) के सिवाय और कुछ नहीं है। यहाँ एक शिक्षक को भी उसकी जाति की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। विश्वविद्यालयों के भीतर इस तरह का भेदभाव न केवल फैकल्टी के लिए, बल्कि वंचित समाज से आने वाले छात्रों के लिए भी एक शत्रुतापूर्ण और डरावना माहौल पैदा करता है।"

सोमवार तक का अल्टीमेटम

प्रदर्शन के दौरान डॉ. सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन को एक ज्ञापन (Memorandum) सौंपा। इसमें उन्होंने दो मुख्य मांगें रखी हैं:

  1. डॉ. स्मिता शर्मा के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

  2. उनकी रुकी हुई प्रमोशन प्रक्रिया को तत्काल पूरा किया जाए।

उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई और कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे सोमवार से वाइस चांसलर के कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन 'धरने' पर बैठ जाएंगे।

छात्र संगठन भी आए समर्थन में

इस लड़ाई में डॉ. हरप्रीत सिंह अकेले नहीं हैं। अंबेडकर स्टूडेंट्स फोरम (ASF) ने उनके साथ एकजुटता दिखाई है। एएसएफ (ASF) ने विश्वविद्यालय प्रशासन और चांसलर से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और पीड़ित प्रोफेसर को न्याय दिलाएं। छात्र संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मामले का समाधान नहीं किया गया, तो वे भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो जाएंगे।

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