
भोपाल। “मैं पिछले एक साल से भोपाल में रहकर एक प्राइवेट कॉलेज में पढ़ाई कर रहा हूँ। मेरा घर खरगोन जिले में है। मेरे पिता किसान हैं, उनकी आमदनी बहुत सीमित है। उन्होंने बड़ी मुश्किलों से मुझे पढ़ने के लिए यहां भेजा, क्योंकि सबने कहा था कि छात्रवृत्ति मिल जाएगी तो पढ़ाई का खर्च संभल जाएगा। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि छात्रवृत्ति नहीं आई है और सेमेस्टर की फीस भरने का समय आ गया है। समझ नहीं आ रहा आगे कैसे पढ़ाई जारी रख पाऊँगा… सब कुछ अधर में लटका हुआ लगता है।”
भोपाल में अध्ययनरत एक आदिवासी छात्र ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर द मूकनायक से बातचीत में अपनी व्यथा साझा की।
दरअसल, मध्य प्रदेश के शासकीय एवं निजी महाविद्यालयों में अध्ययनरत करीब 1.44 लाख विद्यार्थियों की शिक्षा पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। विशेष वर्गों के लिए संचालित छात्रवृत्ति योजनाओं की राशि समय पर जारी न होने से आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राएं भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। जिन योजनाओं का उद्देश्य शिक्षा को सुलभ बनाना है, वही भुगतान में देरी के कारण विद्यार्थियों के लिए बाधा बनती दिख रही हैं। छात्र बताते हैं कि छात्रवृत्ति उनकी पढ़ाई जारी रखने का मुख्य आधार होती है, लेकिन राशि अटकने से न केवल फीस जमा नहीं हो पा रही बल्कि किताबें, आवास और दैनिक खर्च भी प्रभावित हो रहे हैं।
कई विद्यार्थियों ने बताया कि फीस जमा न होने पर कॉलेज प्रशासन परीक्षा फॉर्म भरने, प्रवेश नवीनीकरण और कक्षाओं में बैठने तक पर रोक लगा देता है। आर्थिक दबाव के कारण कई छात्र बीच सत्र में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जबलपुर से पिछले एक सप्ताह में ही छह विद्यार्थियों ने आर्थिक कारणों से अपना पाठ्यक्रम छोड़ दिया। ऐसी स्थिति अन्य जिलों के कॉलेजों में भी सामने आ रही है, जहां छात्रवृत्ति न मिलने से पढ़ाई जारी रखना कठिन हो गया है।
विद्यार्थियों का कहना है कि कई कॉलेजों में बकाया फीस को लेकर प्रबंधन की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा है। फीस जमा न होने पर परीक्षा फॉर्म स्वीकार नहीं किए जा रहे और प्रवेश नवीनीकरण रोका जा रहा है। इससे छात्रों में असुरक्षा और तनाव का माहौल है। उनका कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो हजारों विद्यार्थियों का शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हो सकता है।
एक अन्य छात्र ने द मूकनायक प्रतिनिधि से कहा- “सबसे बड़ी चिंता यही है कि फीस कैसे भरें, जब अभी तक स्कॉलरशिप ही नहीं मिली। घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि तुरंत पैसे भेज सकें। कॉलेज से लगातार फीस जमा करने का दबाव है, लेकिन बिना छात्रवृत्ति के यह संभव नहीं लग रहा। डर है कि कहीं फीस न भर पाने की वजह से पढ़ाई बीच में ही न छूट जाए।”
राज्य में कई प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाओं की राशि लंबित बताई जा रही है, जिससे हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति, अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक सहायता, ग्रामीण क्षेत्रों की मेधावी छात्राओं हेतु गांव की बेटी योजना तथा शहरी गरीब परिवारों की छात्राओं के लिए प्रतिभा किरण योजना शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में निरंतरता देना है, लेकिन भुगतान में देरी के कारण जरूरतमंद छात्र-छात्राओं के सामने फीस जमा करने और पढ़ाई जारी रखने का संकट खड़ा हो गया
अधिकारियों के अनुसार भुगतान में देरी के पीछे कई कारण सामने आए हैं बजट आवंटन में विलंब, विभागीय सत्यापन प्रक्रिया लंबित होना, कॉलेजों द्वारा समय पर पोर्टल अपडेट न करना, तकनीकी गड़बड़ी और कुछ मामलों में बैंक खातों का आधार से लिंक न होना। उच्च शिक्षा विभाग का कहना है कि डेटा अपडेट होने के बाद भुगतान प्रक्रिया तेज की जाएगी।
उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने कहा कि छात्रवृत्ति पोर्टल खुला है और लंबित प्रकरणों का सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी होते ही छात्रों के खातों में राशि भेज दी जाएगी।
द मूकनायक से बातचीत में एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही छात्रों की लंबित स्कॉलरशिप जारी नहीं की गई तो संगठन प्रदेशभर में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेगा। उन्होंने कहा कि छात्र आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और सरकार की देरी उनकी पढ़ाई पर सीधा असर डाल रही है, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
द मूकनायक से बातचीत में आदिवासी विकास परिषद के छात्र विभाग के प्रदेशाध्यक्ष नीरज बारिवा ने कहा कि छात्रवृत्ति में देरी की समस्या हर साल सामने आती है। कभी तकनीकी कारणों का हवाला दिया जाता है तो कभी बजट की कमी बताकर भुगतान रोक दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वर्षों से यही दिक्कत दोहराई जा रही है तो आखिर सिस्टम अब तक दुरुस्त क्यों नहीं किया गया। उनके अनुसार प्रशासनिक उदासीनता के कारण ही छात्र हर बार परेशानी झेलते हैं। उन्होंने मांग की कि लंबित छात्रवृत्ति राशि तत्काल जारी की जाए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
शिक्षाविदों का मानना है कि छात्रवृत्ति केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और समान अवसर की नीति का अहम हिस्सा है। भुगतान में देरी से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों का उच्च शिक्षा से विश्वास डगमगा सकता है। छात्रों और अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि लंबित छात्रवृत्ति तुरंत जारी कर स्थायी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि भविष्य में किसी छात्र को आर्थिक कारणों से पढ़ाई न छोड़नी पड़े।
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