
मदुरै। मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने 27 जुलाई 2025 को तिरुनेलवेली के केटीसी नगर में हुई दलित आईटी कर्मचारी सी. कविन सेल्वगणेश की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सुरजीत के माता-पिता सरवनन और कृष्णकुमारी के खिलाफ दायर चार्जशीट को रद्द कर दिया है। जस्टिस आर. विजयकुमार ने यह आदेश देते हुए सुरजीत के रिश्तेदार जयपाल की याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ चार्जशीट रद्द करने की मांग की थी।
लगभग 25 वर्ष के कविन सेल्वगणेश तूतीकोरिन जिले के अरुमुगमंगलम गांव के रहने वाले थे। वे देवेंद्र कुला वेल्लार (अनुसूचित जाति/पल्लर) समुदाय से ताल्लुक रखते थे। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे चेन्नई में टीसीएस जैसी आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करते थे। वे विश्वविद्यालय गोल्ड मेडलिस्ट और अपने परिवार के पहले पीढ़ी के स्नातक थे। उनकी मां तमिलसेल्वी सरकारी स्कूल शिक्षिका हैं।
27 जुलाई 2025 को कविन अपनी मां के साथ तिरुनेलवेली के केटीसी नगर स्थित एक निजी सिद्धा क्लिनिक गए थे, जहां उनकी प्रेमिका सुभाषिनी (सिद्धा चिकित्सक) काम करती थीं। सुभाषिणी मरावर (मुक्कुलथोर/थेवर समुदाय, एमबीसी) समुदाय से हैं। उनके भाई सुरजीत ने कथित तौर पर यह कहकर कविन को क्लिनिक से बाहर बुलाया कि उनके माता-पिता उनसे मिलना चाहते हैं। बाइक पर ले जाते हुए रास्ते में सुरजीत ने जातिसूचक गालियां दीं और पीछे छिपाई हुई दरांती से उन पर कई वार किए। कविन भागने की कोशिश करते हुए भी कई गंभीर चोटों के कारण मौके पर ही दम तोड़ गए। हत्या दिनदहाड़े हुई। कविन की मां तमिलसेल्वी ने शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस के अनुसार यह अंतरजातीय प्रेम संबंध के कारण जाति-आधारित ‘ऑनर किलिंग’ थी। सुरजीत ने आत्मसमर्पण किया। उनके माता-पिता दोनों तमिलनाडु स्पेशल पुलिस फोर्स में सब-इंस्पेक्टर थे, जिन्हें निलंबित कर दिया गया। सरवनन और जयपाल को पहले गिरफ्तार किया गया, जबकि कृष्णकुमारी को बाद में (मई 2026 में) गिरफ्तार किया गया।
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि माता-पिता को योजना की जानकारी थी और उन्होंने मदद की। मामला सीबी-सीआईडी को सौंपा गया। सीबी-सीआईडी ने अक्टूबर 2025 में 83 गवाहों के बयानों के आधार पर चार्जशीट दाखिल की।
कविन के परिवार ने शव स्वीकार करने से पहले आरोपी के माता-पिता की गिरफ्तारी की मांग की थी। हाईकोर्ट ने पहले भी सीसीटीवी फुटेज (तिरुनेलवेली-सीवलापेरी एनएचएआई स्ट्रेच) की जांच के निर्देश दिए थे।
नवीनतम आदेश में अदालत ने माता-पिता के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने का हवाला देते हुए चार्जशीट रद्द कर दी, जबकि जयपाल के खिलाफ कार्यवाही जारी रहेगी। यह फैसला जाति-आधारित हिंसा के मामलों में जांच और सबूतों की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है।
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