तमिलनाडु में जाति-सूचक गांवों के नाम बदलने की मुहिम: अब ‘वडक्कू अचंतविल्थन’ नाम से जाना जाएगा ‘पऱैचेरी’ गांव

राजस्व विभाग का यह कदम केवल किसी एक बस्ती के नाम का मामला नहीं है। यह तमिलनाडु सरकार द्वारा राजस्व गांवों, बस्तियों और सार्वजनिक स्थानों के नामों से जाति-सूचक पहचान हटाने के लिए बनाए गए व्यापक प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत आता है।
निवासियों के लंबे संघर्ष और अप्रैल में विधानसभा चुनाव बहिष्कार के बाद, राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत इस बदलाव को लागू किया गया है।
पराईचेरी जातिसूचक नाम था जो ग्रामीणों के लंबे सघर्षों के बाद अब से "वडक्कू अच्चमथविझ्थान" नाम से जाना जायेगा।एआई निर्मित सांकेतिक चित्र
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विरुधुनगर- किसी गांव का नाम सिर्फ नक्शे पर दर्ज एक पहचान नहीं होता, वह वहां रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की पहचान और उनके सामाजिक अनुभवों से भी जुड़ा होता है। लेकिन जब यही नाम किसी समुदाय या जाति की पहचान को सार्वजनिक रूप से सामने लाने वाला हो, तो वह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या किसी व्यक्ति की पहचान उसके गांव के नाम से तय होनी चाहिए।

तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में ‘पऱैचेरी’ नाम को बदलकर ‘वडक्कू अचंतविल्थन’ करने की प्रक्रिया इसी सवाल की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ रही है। निवासियों के लंबे संघर्ष और अप्रैल में विधानसभा चुनाव बहिष्कार के बाद, राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत इस बदलाव को लागू किया गया है।

जिले में एक राजस्व गांव के उपखंडीय बस्ती के नाम में दर्ज जाति-सूचक शब्द को हटाकर नया नाम देने की प्रक्रिया को राज्य के राजस्व प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन आयुक्तालय ने आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। आयुक्तालय ने 25 सितंबर को जिला कलेक्टर को पत्र भेजकर श्रीविल्लिपुथुर तालुक के पिल्लैयारकुलम उप-राजस्व क्षेत्र के अच्चम्तविऴ्थान राजस्व गांव के अंतर्गत आने वाली बस्ती ‘पऱैचेरी’ का नाम बदलकर ‘वडक्कू अचंतविल्थन’ करने के संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव/राजस्व प्रशासन आयुक्तालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि ‘पऱैचेरी’ नाम सरकारी दस्तावेजों और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेजों में इस तरह दर्ज है कि इससे जाति की पहचान होती है। इसी आधार पर इसका नाम बदलने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। अब आयुक्तालय ने जिला प्रशासन से सरकार द्वारा जारी नाम परिवर्तन संबंधी दिशा-निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई करने को कहा है।

जब जाति पहचान बन गया गांव का नाम

अचमथाविलथन रेवेन्यू गांव के उत्तरी हिस्से में, परैयार समुदाय के 60 से ज़्यादा परिवार एक अलग बस्ती में रहते हैं। समय के साथ, इस इलाके को पऱैचेरी कहा जाने लगा। निवासियों का कहना है कि अब यह नाम सामाजिक और सरकारी, दोनों तरह के रिकॉर्ड में इस्तेमाल होता है।

यह नाम वोटर लिस्ट, बैंक रिकॉर्ड, आधार और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज़ों में दिखता है। हालांकि, ज़मीन के पट्टे के रिकॉर्ड में गांव का नाम अभी भी आधिकारिक तौर पर अचमथाविलथन ही दर्ज है। इस तरह, कुछ सरकारी दस्तावेज़ों में अचमथाविलथन का ज़िक्र है, तो कुछ में "पराचेरी" का इस्तेमाल होता है। इस अंतर की वजह से रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जाति की पहचान बनी रहती है।

निवासियों का कहना है कि इससे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में जाति की पहचान पक्की हो गई है।

ग्रामीण कहते हैं, "हम जहां भी जाते हैं, जैसे ही अपने गांव का नाम बताते हैं, लोग हमारी जाति पहचान लेते हैं।" पिछले 15 सालों से ज़्यादा समय से, निवासी अधिकारियों, तहसीलदार से लेकर मुख्यमंत्री तक से इस इलाके का नाम बदलकर "नॉर्थ अचमथाविलथन" करने की अपील कर रहे हैं। इस कोशिश की अगुवाई कर रहे एस.वी. कुमार ने कहा कि इसका असर सिर्फ़ प्रशासनिक दिक्कतों तक ही सीमित नहीं है।

उन्होंने कहा, "जब हम अपने गांव का नाम बताते हैं, तो दूसरे लोग तुरंत उसे सुधारकर 'पराचेरी' कहते हैं। वह पल बहुत अपमानजनक होता है।"

गैर-जाति-सूचक नामों का होगा इस्तेमाल

25 सितंबर के पत्र के अनुसार, विरुधुनगर जिले के श्रीविल्लिपुथुर तालुक, पिल्लैयारकुलम उप-राजस्व क्षेत्र के अच्चम्तविऴ्थान राजस्व गांव में ‘पऱैचेरी’ नाम की एक उप-बस्ती है। पत्र में कहा गया है कि यह नाम सरकारी अभिलेखों और अन्य पहचान दस्तावेजों में इस्तेमाल होता रहा है और यह जाति की पहचान करने वाला नाम है।

इसी कारण इसका नाम बदलकर ‘वडक्कू अचंतविल्थन’ करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था। राजस्व प्रशासन आयुक्तालय ने अब जिला कलेक्टर को इस प्रस्ताव पर आगे की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है।

आयुक्तालय के पत्र में इस मामले से संबंधित पहले के पत्राचार का भी उल्लेख किया गया है। इनमें राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष सचिव का 2 जून 2025 का पत्र, राजस्व प्रशासन आयुक्तालय के जुलाई 2026 के पत्र, विरुधुनगर जिला कलेक्टर का 6 अप्रैल 2026 का पत्र तथा 24 सितंबर 2026 का सरकारी पत्र शामिल हैं।

इस मामले की पृष्ठभूमि तमिलनाडु सरकार के G.O.(Ms) No.313, दिनांक 6 अक्टूबर 2025 से जुड़ी है। इस सरकारी आदेश में बस्तियों, सड़कों, गलियों, जलस्रोतों और राजस्व गांवों के नामों में मौजूद जाति-सूचक नामों को हटाने अथवा उनका पुनर्नामकरण करने के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए गए थे।

सरकारी आदेश का उद्देश्य ऐसे नामों की पहचान कर उनके स्थान पर गैर-जाति-सूचक नामों के इस्तेमाल के लिए प्रक्रिया निर्धारित करना था। आदेश के संबंध में प्रकाशित विवरणों में ‘परैयार स्ट्रीट’ और ‘चक्किलियार रोड’ जैसे जाति-सूचक नामों को हटाने की आवश्यकता का उल्लेख किया गया था।

यही सरकारी दिशानिर्देश अब विरुधुनगर जिले के ‘पऱैचेरी’ नाम को बदलने की प्रक्रिया के लिए प्रशासनिक आधार बनाए गए हैं।

राजस्व प्रशासन आयुक्तालय के 25 सितंबर के पत्र में जिला कलेक्टर से कहा गया है कि ‘पऱैचेरी’ को‘वडक्कू अचंतविल्थन’ के रूप में दर्ज करने की प्रक्रिया G.O.(Ms) No.313 के संबंधित दिशानिर्देशों के अनुसार आगे बढ़ाई जाए।

पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पहले ही राज्य सरकार को भेजा जा चुका है। अब जिला प्रशासन को सरकारी आदेश में दिए गए प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करनी है। इसका अर्थ यह है कि 25 सितंबर का पत्र स्वयं अंतिम नाम परिवर्तन की अधिसूचना नहीं है, बल्कि जिला प्रशासन को नाम परिवर्तन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करने का निर्देश है।

राजस्व प्रशासन आयुक्तालय ने जिला कलेक्टर से कहा है कि सरकारी आदेश के संबंधित दिशानिर्देशों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।

राजस्व विभाग का यह कदम केवल किसी एक बस्ती के नाम का मामला नहीं है। यह तमिलनाडु सरकार द्वारा राजस्व गांवों, बस्तियों और सार्वजनिक स्थानों के नामों से जाति-सूचक पहचान हटाने के लिए बनाए गए व्यापक प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत आता है।

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