
कोल्हापुर: महाराष्ट्र में बी.एससी. ऑनर्स एग्रीकल्चर में एसटी सीट पर दाखिला लेने वाली एक छात्रा की ट्राइब वैलिडिटी लंबित होने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसे राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि जब सरकार ने दूसरी आरक्षित श्रेणियों के विद्यार्थियों को जाति वैधता प्रमाणपत्र जमा करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया है, तो एसटी छात्रा को इस लाभ से बाहर रखने का प्रथमदृष्टया कोई कारण नहीं है।
यह आदेश जस्टिस शर्मिला यू. देशमुख और जस्टिस नीरज पी. धोटे की पीठ ने 4 सितंबर को रिट याचिका संख्या 4410/2026 में दिया। यह मामला एक आदिवासी छात्रा स्नेहल आनंदाराव भोसले से जुड़ा है। छात्रा ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 में बी.एससी. ऑनर्स एग्रीकल्चर पाठ्यक्रम में एसटी श्रेणी की सीट पर दाखिला लिया था। उसकी ट्राइब वैलिडिटी की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई थी।
छात्रा ने अपने ट्राइब क्लेम की जांच के लिए 30 मार्च को संबंधित कास्ट स्क्रूटिनी कमेटी के पास प्रस्ताव जमा किया था। लेकिन 4 सितंबर तक कमेटी ने उसके दावे पर फैसला नहीं किया था।
इसी बीच ट्राइब/कास्ट वैलिडिटी प्रमाणपत्र जमा करने की अंतिम तारीख 4 सितंबर शाम 6 बजे थी। छात्रा को आशंका थी कि वैलिडिटी प्रमाणपत्र जमा नहीं करने के कारण उसका दाखिला रद्द हो सकता है।
इसीलिए उसने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपना दाखिला रद्द नहीं करने और प्रमाणपत्र जमा करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय देने की मांग की।
पीठ ने कहा कि 4 सितंबर के सरकारी परिपत्र में लगभग सभी आरक्षित श्रेणियों को तीन महीने की राहत दी गई है, लेकिन एसटी को इसमें शामिल नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि अगर एसटी को इस लाभ से बाहर रखा गया है, तो यह प्रथमदृष्टया भेदभावपूर्ण है।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि 4 सितंबर के सरकारी परिपत्र के जरिए अनुसूचित जाति, घुमंतू जनजाति, विमुक्त जाति एवं घुमंतू जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और विशेष पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को कास्ट वैलिडिटी प्रमाणपत्र जमा करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया गया है।
लेकिन इस परिपत्र में अनुसूचित जनजाति (ST) का नाम शामिल नहीं था। कोर्ट ने कहा कि यह समझ में नहीं आता कि एसटी छात्र को उसी तरह की मोहलत क्यों नहीं दी जानी चाहिए।
पीठ ने कहा कि 4 सितंबर के सरकारी परिपत्र में लगभग सभी आरक्षित श्रेणियों को तीन महीने की राहत दी गई है, लेकिन एसटी को इसमें शामिल नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि अगर एसटी को इस लाभ से बाहर रखा गया है, तो यह प्रथमदृष्टया भेदभावपूर्ण है।
कोर्ट ने इसी आधार पर कहा कि 4 सितंबर के सरकारी परिपत्र का तीन महीने की मोहलत वाला लाभ एसटी विद्यार्थियों को भी दिया जाना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी देखा कि छात्रा का दाखिला पहले ही हो चुका है और उसकी ट्राइब वैलिडिटी का मामला स्क्रूटिनी कमेटी के पास लंबित है। इसलिए हाईकोर्ट ने कहा कि छात्रा को वैलिडिटी प्रमाणपत्र जमा करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए।
साथ ही कोर्ट ने संबंधित स्क्रूटिनी कमेटी को छात्रा के प्रस्ताव पर छह सप्ताह के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक छात्रा का शैक्षणिक वर्ष 2026-27 का बी.एससी. ऑनर्स एग्रीकल्चर दाखिला रद्द न किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
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