
बाराबंकी- उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में रविवार को नगीना सांसद और भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद का काफिला पुलिस ने रोक लिया। वह गोंडा जिले के परसपुर थाना क्षेत्र में मारे गए बर्तन कारोबारी विनोद कुमार साहनी के परिजनों से मिलने जा रहे थे। मसौली थाना क्षेत्र के शहाबपुर टोल प्लाजा और रामनगर इलाके में पुलिस ने काफिले को आगे नहीं बढ़ने दिया। सांसद वाहन से उतरकर पुलिस अधिकारियों से बात करने पहुंचे। इस दौरान उनके समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई। समर्थकों द्वारा टोल बैरियर तोड़े जाने के भी आरोप हैं। पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए आजाद को रामनगर स्थित गेस्ट हाउस ले जाकर आगे जाने से रोक दिया।
आजाद ने कहा कि वे परिवार को सांत्वना देने जा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने काफिले और कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी की। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो, परिवार को न्याय और आर्थिक सहायता मिले तथा आरोपियों को किसी स्तर पर संरक्षण न दिया जाए। उन्होंने बताया कि वे करीब दो महीने पहले विनोद साहनी से मिले थे। इससे पहले शनिवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय का काफिला भी इसी मार्ग पर रोका गया था। पुलिस उन्हें लेकर मसौली थाने चली गई। प्रदेश अध्यक्ष के हिरासत में लेने की सूचना पर धरना दिया।
सांसद को रोके जाने की कार्रवाई को लेकर उनके समर्थकों में सवाल उठ रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि यदि कोई जनप्रतिनिधि पीड़ित परिवार से मिलने जा रहा है तो उसे रोकने के बजाय सुरक्षा के साथ आगे जाने दिया जाना चाहिए। वहीं पुलिस की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि चंद्रशेखर आजाद को किस आधार पर रोका गया। पुलिस का कहना है कि घटना के संबंध में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। टोल प्लाजा पर बैरियर तोड़े जाने के आरोपों की भी जांच की जा सकती है। यदि संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।
गोंडा के रेक्सडिया गांव निवासी 45 वर्षीय विनोद कुमार साहनी शाहपुर बाजार में बर्तन की दुकान चलाते थे। निषाद पार्टी के जिला प्रचारक साहनी 9 सितंबर की रात दुकान बंद कर मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे तभी परसपुर थाना क्षेत्र के शाहपुर इलाके में 8-10 लोगों ने उन्हें रोक लिया। सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद के बाद उन पर लाठी-डंडे और धारदार हथियारों से हमला हुआ। गंभीर रूप से घायल साहनी को पहले स्थानीय अस्पताल और फिर लखनऊ के केजीएमयू ले जाया गया, जहां 10 सितंबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
हत्या की वजह सोशल मीडिया पर साहनी द्वारा किये जाने वाले पोस्ट बताये जाते हैं, इंटरनेट मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्टों ने विनोद की दुश्मनी बढ़ाई थी। विनोद के फेसबुक एकाउंट पर हिंदू धर्म, ब्राह्मण व क्षत्रियों को लेकर किए गए कुछ पोस्ट अब इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं।
परिवार का कहना है कि हमले के बाद थाने और चौकी पर तत्काल सुनवाई नहीं हुई। पुलिस ने शुभम सिंह उर्फ गोलू, सुभाष सिंह, आकाश सिंह और वरुण सिंह उर्फ अंशु समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। परसपुर एसएचओ कमला शंकर चतुर्वेदी, शाहपुर चौकी प्रभारी अंकित सिंह और एक सिपाही को लापरवाही के आरोप में निलंबित किया गया है। निषाद समुदाय से जुड़े इस मामले में मंत्री संजय निषाद समेत विपक्षी दलों ने कार्रवाई और मुआवजे की मांग की है।
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