IIT मंडी जन्माष्टमी पोस्टर विवाद: जांच समिति ने कहा- समुदाय को निशाना बनाने की मंशा नहीं, अब छात्रों की काउंसलिंग होगी

जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह निष्कर्ष भी दिया कि इस मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधान लागू नहीं होते।
पोस्टर में शूद्रों की भूमिका के तौर पर “उच्च वर्गों की सेवा करना” लिखे होने पर सबसे ज्यादा आपत्ति सामने आई और इसे जातिगत पदानुक्रम को बढ़ावा देने वाला बताया गया।
IIT मंडी अब परिसर में छात्र कार्यक्रमों के आयोजन के लिए नियम और दिशा-निर्देश तैयार करेगा तथा ऐसे आयोजनों की निगरानी के लिए एक तंत्र स्थापित करेगा।
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मंडी- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी में जन्माष्टमी कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित जाति-आधारित विवादित पोस्टर को लेकर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने संबंधित छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के बजाय काउंसलिंग और संवेदनशीलता प्रशिक्षण (sensitisation) की सिफारिश की है। समिति ने यह भी कहा कि उसे किसी व्यक्ति या समुदाय को निशाना बनाने, अपमानित करने या आहत करने की मंशा का कोई सबूत नहीं मिला।

जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह निष्कर्ष भी दिया कि इस मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधान लागू नहीं होते।

विवाद के बाद IIT मंडी अब परिसर में होने वाले छात्र कार्यक्रमों के लिए स्पष्ट नियम और दिशा-निर्देश तैयार करेगा तथा ऐसे आयोजनों की निगरानी के लिए एक व्यवस्था स्थापित करेगा।

क्या था पूरा विवाद?

विवाद की शुरुआत 4 सितंबर को IIT मंडी परिसर में आयोजित छात्र-आधारित जन्माष्टमी कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित एक पोस्टर से हुई। पोस्टर का शीर्षक “Bhagavad Gita – The Timeless Wisdom” था।

सोशल मीडिया पर पोस्टर की तस्वीर और वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। पोस्टर में समाज को चार समूहों- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और क्षुद्र में विभाजित करते हुए उनके लिए अलग-अलग भूमिकाएं लिखी गई थीं।

पोस्टर पर लिखा था कि ब्राह्मण ईश्वर का सन्देश प्रसारित करते हैं, क्षत्रिय समाज की सुरक्षा करते हैं, वैश्य अर्थव्यस्था चलाकर दूसरों को सपोर्ट करते हैं और क्षूद्र उच्च जातियों की सेवा करते हैं।

पोस्टर में भगवद्गीता के एक श्लोक का भी उल्लेख था, जिसमें मानव समाज के चार विभाजनों को प्रकृति के तीन गुणों और उनसे संबंधित कर्मों के आधार पर बताए जाने की बात कही गई थी। पोस्टर में शूद्रों की भूमिका के तौर पर “उच्च वर्गों की सेवा करना” लिखे होने पर सबसे ज्यादा आपत्ति सामने आई और इसे जातिगत पदानुक्रम को बढ़ावा देने वाला माना गया।

पोस्टर की तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद IIT मंडी प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठे। जाति भेदभाव, सामाजिक समानता और शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की गरिमा को लेकर कई लोगों ने चिंता जताई। विवाद के बीच IIT मंडी ने स्पष्ट किया था कि यह कार्यक्रम संस्थान की ओर से आधिकारिक रूप से आयोजित नहीं किया गया था और पोस्टर को संस्थान ने न तो मंजूरी दी थी और न ही उसका समर्थन किया था। इसके बाद 6 सितंबर को IIT मंडी के निदेशक प्रोफेसर लक्ष्मीकांत बेहरा ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की।
पोस्टर में शूद्रों की भूमिका के तौर पर “उच्च वर्गों की सेवा करना” लिखे होने पर सबसे ज्यादा आपत्ति सामने आई और इसे जातिगत पदानुक्रम को बढ़ावा देने वाला बताया गया।
'शूद्रों को उच्च वर्गों की सेवा करनी चाहिए’: IIT मंडी में जन्माष्टमी पर जाति आधारित पोस्टर पर बवाल, निदेशक ने बिठाई जांच

जांच समिति ने क्या पाया?

अब जांच पूरी होने के बाद समिति ने मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं।

समिति के अनुसार कार्यक्रम IIT मंडी ने आयोजित नहीं किया था। इसमें संस्थान का कोई आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त छात्र संगठन शामिल नहीं था। कार्यक्रम के लिए IIT मंडी के किसी फंड का इस्तेमाल नहीं किया गया। खर्च स्वैच्छिक योगदान से पूरा किया गया।

विवादित पोस्टर को संस्थान के किसी भी प्राधिकरण ने न तो देखा, न मंजूर किया और न ही उसका समर्थन किया। पोस्टर की सामग्री एक छात्र की व्यक्तिगत व्याख्या को दर्शाती थी और IIT मंडी के विचार या आधिकारिक रुख का प्रतिनिधित्व नहीं करती थी। समिति को किसी व्यक्ति या समुदाय को निशाना बनाने, अपमानित करने या आहत करने की मंशा का कोई सबूत नहीं मिला। जांच के दौरान उस छात्र की पहचान भी कर ली गई जिसने पोस्टर प्रदर्शित किया था।

जांच समिति ने संबंधित छात्रों के खिलाफ सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश नहीं की है। इसके बजाय उसने काउंसलिंग और संवेदनशीलता प्रशिक्षण की सिफारिश की है।

IIT के एक वरिष्ठ संकाय सदस्य के अनुसार, समिति ने पाया कि छात्रों को इस तरह के मुद्दों पर संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है और इसलिए उनके लिएकाउंसलिंग तथा सेन्सेटाईज करने को उचित कदम माना गया।

समिति ने साथ ही संस्थान के स्तर पर एक महत्वपूर्ण कमी की ओर भी ध्यान दिलाया।

समिति ने पाया कि IIT मंडी परिसर में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने के लिए स्पष्ट और परिभाषित प्रक्रिया का अभाव है। इसे समिति ने एक संस्थागत कमी माना है, जिस पर प्राथमिकता के आधार पर काम किए जाने की जरूरत है। इसी सिफारिश के आधार पर IIT मंडी अब परिसर में छात्र कार्यक्रमों के आयोजन के लिए नियम और दिशा-निर्देश तैयार करेगा तथा ऐसे आयोजनों की निगरानी के लिए एक तंत्र स्थापित करेगा।

जांच रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि समिति ने मामले में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के प्रावधानों को लागू नहीं पाया।

रिपोर्ट में कहा गया कि जांच के दौरान किसी व्यक्ति या समुदाय को निशाना बनाने, अपमानित करने या आहत करने की मंशा का कोई प्रमाण नहीं मिला और समिति के अनुसार इस मामले में SC/ST Act के प्रावधान आकर्षित नहीं होते। हालाँकि पोस्टर विवाद सामने आते ही संस्थान निदेशक ने स्वयं स्वीकार किया था कि पोस्टर से समुदाय के सदस्यों को ठेस पहुंची और इस पर खेद व्यक्त किया। संस्थान ने प्रभावित लोगों के प्रति खेद और सहानुभूति व्यक्त करते हुए कहा है कि वह समानता, सामाजिक न्याय और भेदभाव-मुक्त परिसर के लिए प्रतिबद्ध है।

जांच प्रक्रिया में IIT मंडी के रिजर्वेशन सेल के छह सदस्यों ने समिति की सहायता की। इससे जांच में आरक्षण और सामाजिक न्याय से जुड़े संस्थागत प्रतिनिधित्व को भी शामिल किया गया।

समिति ने उपलब्ध तथ्यों और संबंधित लोगों से मिली जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला कि कार्यक्रम संस्थान का आधिकारिक आयोजन नहीं था और विवादित पोस्टर संस्थान के किसी अधिकारी द्वारा स्वीकृत या अनुमोदित नहीं किया गया था।

अब आगे क्या?

जांच समिति की सिफारिशों के बाद IIT मंडी के सामने अब दो स्तरों पर कार्रवाई का रास्ता है।

पहला, विवादित पोस्टर प्रदर्शित करने वाले संबंधित छात्रों की काउंसलिंग और संवेदनशीलता प्रशिक्षण किया जाएगा। दूसरा, संस्थान परिसर में भविष्य में होने वाले छात्र आयोजनों के लिए स्पष्ट नियम, अनुमति प्रक्रिया और निगरानी तंत्र तैयार करेगा। इस तरह जांच का निष्कर्ष छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई से ज्यादा संवेदनशीलता और संस्थागत सुधार पर केंद्रित है। कुल मिलाकर, IIT मंडी की जांच ने विवादित पोस्टर को संस्थान की आधिकारिक स्थिति से अलग माना है। साथ ही, संस्थान ने यह स्वीकार किया है कि पोस्टर से समुदाय के सदस्यों को ठेस पहुंची। अब संबंधित छात्रों की काउंसलिंग और संवेदनशीलता प्रशिक्षण के साथ-साथ परिसर में छात्र आयोजनों के लिए नई नियमावली और निगरानी व्यवस्था तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

पोस्टर में शूद्रों की भूमिका के तौर पर “उच्च वर्गों की सेवा करना” लिखे होने पर सबसे ज्यादा आपत्ति सामने आई और इसे जातिगत पदानुक्रम को बढ़ावा देने वाला बताया गया।
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