गुलजार सिंह मामला: चंद्रशेखर आजाद बोले- ‘परिवार की सहमति के बिना अंतिम संस्कार की जल्दबाजी क्यों की?'

ड्रग्स के मुद्दे पर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा से सवाल करने के बाद दलित मजदूर गुलजार सिंह ने जहरीला पदार्थ खाया था; परिवार ने दबाव और अपमान का आरोप लगाया, पांच लोगों पर केस और SIT जांच जारी
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले में रिपोर्ट तलब की है।
गुलजार सिंह संगरूर के तूर बंजारा गांव के दलित मजदूर थे। उन्होंने पंजाब में ड्रग्स की उपलब्धता और अपने बेटे की नशे की लत का मुद्दा वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने उठाया था। उसके बाद उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या कर ली।
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चंडीगढ़: पंजाब के संगरूर जिले में दलित मजदूर गुलजार सिंह की मौत और उनके अंतिम संस्कार को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने मामले में पंजाब सरकार से निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। 10 सितंबर को परिवार की ओर से सामने आए बयान में प्रशासन पर बिना सहमति अंतिम संस्कार कराने और पुलिस दबाव बनाने का आरोप लगाया गया।

आजाद ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि गुलजार सिंह के परिवार का आरोप है कि उनके एक बेटे को कथित तौर पर गुमराह कर उनके पिता का अंतिम संस्कार भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कराया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान से सवाल किया कि जब गुलजार सिंह ने अपने अंतिम वीडियो में दबाव और अपमान की बात कही थी, तो उनके परिवार की सहमति के बिना अंतिम संस्कार की जल्दबाजी क्यों की गई।

आजाद ने पंजाब सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और गुलजार सिंह के अंतिम वीडियो में जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी भूमिका की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के चेयरमैन किशोर मकवाना ने संगरूर पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और पंजाब सरकार से 5 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले में रिपोर्ट तलब की है।

कौन थे गुलजार सिंह?

गुलजार सिंह पंजाब के संगरूर जिले के तूर बंजारा गांव के रहने वाले दलित मजदूर थे। उनका गांव पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के दिर्बा विधानसभा क्षेत्र में आता है।

गुलजार सिंह के परिवार में नशे की समस्या पहले से थी। उनके एक बेटे को नशे की लत थी और परिवार ने बताया कि वह नशे की वजह से आर्थिक और पारिवारिक संकट से गुजर रहा था।

रविवार को हरपाल सिंह चीमा एक सार्वजनिक कार्यक्रम में लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। इसी दौरान गुलजार सिंह ने अपने गांव में ड्रग्स की उपलब्धता और अपने बेटे की नशे की लत का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि सरकार की ओर से नशे के खिलाफ कार्रवाई के दावों के बावजूद गांव में ड्रग्स कैसे उपलब्ध हो रहे हैं।

गुलजार सिंह के परिवार का आरोप है कि मंत्री से सवाल करने के बाद उन पर माफी मांगने का दबाव बनाया गया। उनके परिवार और स्थानीय लोगों ने कहा कि पंचायत से जुड़े लोगों ने गुलजार सिंह को मंत्री से सवाल करने को लेकर माफी मांगने के लिए कहा था।

अगले दिन गुलजार सिंह ने जहरीला पदार्थ खाया। उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। उन्हें पहले संगरूर सिविल अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद पटियाला के राजिंदरा अस्पताल और फिर संगरूर के एक निजी अस्पताल के रास्ते उन्हें डीएमसी अस्पताल, लुधियाना ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।

उनकी मौत के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया।

गुलजार सिंह ने अपनी मौत से पहले एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया था। उस वीडियो में उन्होंने अपने साथ हुए कथित दबाव और अपमान का उल्लेख किया था तथा कुछ लोगों के खिलाफ आरोप लगाए थे। इन आरोपों की जांच अभी जारी है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले में रिपोर्ट तलब की है।
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हरपाल चीमा ने बाद में कहा कि गुलजार सिंह ने नशे से संबंधित शिकायत उनके सामने रखी थी और उन्होंने पुलिस को ड्रग्स की आपूर्ति करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। चीमा ने गुलजार सिंह की मौत में अपनी किसी भूमिका से इनकार किया है।

गुलजार सिंह की मौत के मामले में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इनमें गांव की सरपंच और पंचायत से जुड़े अन्य लोग शामिल हैं। आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने, उत्पीड़न और एससी/एसटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

हरपाल सिंह चीमा का नाम इस FIR में आरोपी के तौर पर दर्ज नहीं किया गया है, हालांकि विपक्षी दल उनकी भूमिका की जांच और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

10 सितंबर को सामने आए परिवार के बयान के अनुसार, परिवार का आरोप है कि प्रशासन ने अंतिम संस्कार में जल्दबाजी की और उन्हें अपने पिता के अंतिम दर्शन तक नहीं करने दिए।

परिवार ने यह भी कहा कि पुलिस का दबाव था और उन्हें नौकरी तथा अन्य सहायता के आश्वासन दिए गए थे, लेकिन उन्हें वह सहायता नहीं मिली। बढ़ते विवाद के बीच गुलजार सिंह की मौत की जांच के लिए चार सदस्यीय SIT गठित की गई है। इसकी निगरानी ADGP नौनिहाल सिंह के नेतृत्व में हो रही है।

जांच में गुलजार सिंह की मौत से पहले के घटनाक्रम, उनके वीडियो में लगाए गए आरोप और पांच आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

गुलजार सिंह जी ने आत्महत्या से पहले वीडियो जारी कर बताया था कि उन्होंने राज्य में ड्रग्स के मुद्दे पर वित्त मंत्री हरपाल चीमा के सामने चिंता जाहिर की थी। इसके बाद पंचायत में उन्हें अपमानित किया गया और माफी मांगने के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने अपने वीडियो में इसी दबाव के बीच आत्महत्या करने की बात कही थी। अब उनके बेटे स्पष्ट कह रहे हैं कि जब तक उनके पिता को न्याय नहीं मिलता, तब तक वे न भोग करेंगे और न ही अस्थियां विसर्जित करेंगे।
-चंद्रशेखर आजाद, भीम आर्मी चीफ

गुलजार सिंह की मौत के बाद पंजाब में विपक्षी दलों ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

राहुल गाँधी ने मुद्दे पर आप सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, "पंजाब के लोगों, और खासकर दलितों को, AAP सरकार द्वारा सत्ता के दुरुपयोग को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए। गुलज़ार सिंह जी जो वाल्मीकि समुदाय से थे, उनपर उनके आखिरी दिनों में जो बीती है वो खुद उनके परिवार की, उनकी मां की, उनकी पत्नी की और उनके भाई की ज़ुबानी सुनिए। जिंदगी में तो प्रताड़ना दी ही, मृत्यु में भी गुलज़ार सिंह जी का अपमान कर रहे हैं। शोकाकुल परिजन ही कह रहे हैं कि उनसे उनके पारंपरिक अंतिम संस्कार का हक तक छीन लिया गया। मैं फिर कह रहा हूं - मुख्यमंत्री तत्काल वित्त मंत्री का इस्तीफा लें, FIR में उनका नाम दर्ज हो और पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो। इससे कम कुछ भी न्याय नहीं, खानापूर्ति है।"

सांसद पवन खेडा ने प्रकरण की तुलना हाथरस मामले से की। एक सोशल मीडिया पोस्ट में खेड़ा ने लिखा, "पंजाब में AAP सरकार के दौरान, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में और परिवार की सहमति के बिना गुलज़ार सिंह जी के शव का ज़बरदस्ती अंतिम संस्कार किया जाना बेहद परेशान करने वाला है। यह सितंबर 2020 की उस घटना की डरावनी याद दिलाता है, जब उत्तर प्रदेश पुलिस ने हाथरस की 19 साल की दलित रेप पीड़िता के शव का अंतिम संस्कार आधी रात को, उसके परिवार की मौजूदगी या सहमति के बिना जल्दबाज़ी में कर दिया था। दुखी परिवार को यह बुनियादी सम्मान भी न देना कि वे तय कर सकें कि उनके प्रियजन का अंतिम संस्कार कैसे और कब हो - या उन्हें अपने प्रियजन को आखिरी बार देखने का मौका भी न देना - सरकारी ताकत का अमानवीय दुरुपयोग है। इससे AAP ने एक बात बिल्कुल साफ़ कर दी है:यह बस 'इंग्लिश मीडियम BJP' है।"

भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा जहर खाने के बाद गुलजार सिंह ने जो वीडियो बनाई, उसे मृत्युपूर्व बयान माना जाना चाहिए। गुलजार सिंह ने वीडियो में कहा, “मैं आपको एक बात बताता हूं। कल चीमा हमारे यहां आया था। मैंने चीमा से सवाल किया था। ये चीमा मेरी मौत का जिम्मेदार है और पंचायत का सरपंच भी मेरी मौत का जिम्मेदार है।” गुलजार सिंह (जो दलित समाज से आते हैं) ने पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान की नाक के नीचे चल रहे ड्रग्स के कारोबार और उस पर कोई कार्यवाही न होने को लेकर सवाल उठाए थे।"

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