
नई दिल्ली/लखनऊ- दलित इतिहास माह के दौरान यूपी कैडर के 2022 बैच के दलित आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही के इस्तीफे का मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर गर्माता जा रहा है। 31 मार्च को राजस्व परिषद में अटैच रहते हुए कोई फील्ड पोस्टिंग या अर्थपूर्ण काम न मिलने का हवाला देकर इस्तीफा देने वाले रिंकू सिंह राही पर अब कांग्रेस, बहुजन और विपक्षी नेताओं का एक बड़ा समर्थन जुट रहा है। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रिंकू सिंह का समर्थन करते हुए आगामी चुनाव में भाजपा का सफाया होने का दावा किया है।
दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय चेयरमैन एडवोकेट राजेंद्र पाल गौतम ने रिंकू सिंह राही का पूरा समर्थन किया। उन्होंने कहा, “आज भी जब कोई दलित युवा मेहनत कर IAS-PCS अधिकारी बनता है, तो उसके साथ प्रताड़ना की जाती है। हालात ऐसे बनते हैं कि वो अधिकारी अपनी नौकरी से ही इस्तीफा देने को मजबूर हो जाता है। ऐसे ही एक अधिकारी हैं- रिंकू सिंह राही जी। रिंकू सिंह राही जी जब PCS अधिकारी थे, तब उन्होंने एक ऐसे घोटाले को उजागर किया, जिसमें करोड़ों रुपए की चोरी की गई थी। उस समय उनके ऊपर जानलेवा हमला किया गया, उन्हें गोली मारी गई। इस हमले में उनका एक जबड़ा और आंख चली गई। देश सेवा का जज्बा देखिए कि रिंकू सिंह जी ठीक होकर वापस लौटे और IAS अफसर बने, लेकिन उन्हें उनकी ईमानदारी की सजा मिलती रही और लगातार ट्रांसफर होता रहा। अब हालात ये हैं कि पिछले 8 महीने से उन्हें कोई काम ही नहीं दिया जा रहा है, उन्हें कोई भी महत्वपूर्ण और प्रमुख पद नहीं सौंपा जा रहा है। ऐसे में रिंकू जी ने तनख्वाह लेने से इंकार कर दिया और टेक्निकल रिजाइन दे दिया।”
राजेंद्र पाल गौतम ने आगे मांग की, “मैं महामहिम राष्ट्रपति से मांग करता हूं कि IAS रिंकू सिंह राही का टेक्निकल इस्तीफा स्वीकार न किया जाए। इसके साथ ही यूपी सरकार को ये निर्देश दिया जाए कि IAS रिंकू जी को काम दिया जाए। वहीं, मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मांग करता हूं कि जिन बच्चों ने The Scheduled Castes and the Scheduled Tribes (Prevention of Atrocities) Act, 1989 को कमजोर करने के खिलाफ आंदोलन किया था, उनके विरुद्ध केस वापस कर लिए जाएं। वे बच्चे कोई अपराधी नहीं हैं, उन लोगों ने संवैधानिक तरीके से आंदोलन किया था, लेकिन वे आज भी कोर्ट कचहरी के चक्कर काट रहे हैं।”
उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही लंबे समय से साइडलाइन कर दिए गए थे. रिंकू सिंह राही का शाहजहांपुर में एसडीएम रहते हुए एक वीडियो वायरल हो गया था, जिसमें वह वकीलों के सामने उठक-बैठक कर रहे थे. वीडियो वायरल होने के बाद उन्हें जुलाई 2025 में लखनऊ राजस्व परिषद में अटैच कर दिया गया था. उसके बाद आठ महीने तक कोई पोस्टिंग नहीं मिली। उनके पिता श्योदान सिंह ने भी बेटे के फैसले पर दर्द जताया था।
रिंकू सिंह राही ने अपने इस्तीफे में आरोप लगाया है कि उन्हें लंबे समय से न तो पोस्टिंग दी जा रही थी और न ही कोई गरिमापूर्ण कार्य सौंपा जा रहा था. उन्हें जनसेवा का मौका नहीं दिया गया. रिंकू सिंह ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें काम करने का अवसर नहीं दिया गया. इतना ही नहीं 'संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग सिस्टम चल रहा है.
अब यह मामला सिर्फ यूपी का नहीं, बल्कि पूरे देश में दलित अधिकारी, ईमानदारी और प्रशासनिक साइडलाइनिंग का प्रतीक बन गया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रिंकू सिंह राही का समर्थन करते हुए बीजेपी पर हमला बोला। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी सरकार में कुशल और ईमानदार अफसरों की कदर नहीं है. बेहतर काम और तय समयसीमा में कार्य पूरा करने के लिए हमेशा अच्छे अफसरों की जरूरत होती है।
यादव ने अपील करते हुए कहा, " हर अच्छे अधिकारी से हमारी माँग है कि भावावेश में आकर कोई फ़ैसला न करें, बुरे दिन जानेवाले हैं। पीडीए सरकार आएगी और सबको उचित मान-सम्मान-स्थान देगी क्योंकि पीडीए की सरकार जनता की सरकार होगी, जो समस्याओं के समाधान व असमानताओं को दूर करने के लिए सच में विकास के काम करेगी। क्वॉलिटी वर्क और तय समय सीमा के अंदर काम को पूरा करने के लिए हमेशा ही बेहतरीन ऑफ़िसर्स की ज़रूरत पड़ती है। अपने काम में पारंगत अधिकारियों की हमने हमेशा क़द्र की है और आगे भी करेंगे।"
अब यह मामला सिर्फ यूपी का नहीं, बल्कि पूरे देश में दलित अधिकारी, ईमानदारी और प्रशासनिक साइडलाइनिंग का प्रतीक बन गया है।
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