Dalit History Month | IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही का इस्तीफा: क्या जाति बनी साइडलाइनिंग की वजह?

आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इसे दलित अधिकारी के साथ सिस्टम की उपेक्षा बताया।
2009 में रिंकू सिंह ने पेंशन स्कीमों में 100 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया जिसके बाद उनपर पर हमला हुआ और सात गोलियां चलीं। चेहरे पर लगी गोलियों से जबड़ा क्षतिग्रस्त हुआ, एक आंख प्रभावित हुई। उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी की और साल 2022 में IAS बने।
2009 में रिंकू सिंह ने पेंशन स्कीमों में 100 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया जिसके बाद उनपर पर हमला हुआ और सात गोलियां चलीं। चेहरे पर लगी गोलियों से जबड़ा क्षतिग्रस्त हुआ, एक आंख प्रभावित हुई। उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी की और साल 2022 में IAS बने।
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लखनऊ- देश भर में बहुजन समुदाय द्वारा अप्रेल माह को 'दलित इतिहास माह' के रूप में मनाया जा रहा है, जिसमें डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों, दलित समुदाय के संघर्ष और उनके योगदान को याद किया जा रहा है। ठीक इसी मौके पर उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने 31 मार्च को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इस्तीफा महज एक अफसर का व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में ईमानदार दलित अधिकारी के साथ हो रही उपेक्षा का प्रतीक बन गया है।

रिंकू सिंह राही ने इस्तीफा पत्र में लिखा कि लंबे समय से उन्हें कोई जिम्मेदारीपूर्ण पोस्टिंग या अर्थपूर्ण काम नहीं सौंपा जा रहा है। वे राजस्व परिषद से अटैच थे, जहां केवल तनख्वाह मिल रही थी, लेकिन जनसेवा का कोई अवसर नहीं था। उन्होंने अपने फैसले को "नैतिक निर्णय" बताया और कहा कि बिना काम के सिर्फ वेतन लेना उनके सिद्धांतों के विरुद्ध है।

रिंकू सिंह राही ने आरोप लगाया कि "संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक पैरलल सिस्टम" चल रहा है, जो ईमानदार अधिकारियों को साइडलाइन कर देता है।

कौन हैं रिंकू सिंह राही?

रिंकू सिंह राही दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। उनका जन्म 20 मई 1982 को उत्तर प्रदेश के हाथरस-अलीगढ़ क्षेत्र में एक साधारण परिवार में हुआ। पिता श्योदान सिंह एक छोटी सी आटा चक्की चलाते हैं। घर की दीवारें नम और पुरानी हैं, दस साल से ज्यादा समय से पेंट नहीं हुआ। रिंकू ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की। 2004 में UPPCS पास कर PCS अधिकारी बने और 2008 में जिला समाज कल्याण अधिकारी (District Social Welfare Officer) बने।

2009 में मुजफ्फरनगर में तैनात रहते हुए उन्होंने छात्रवृत्ति और पेंशन स्कीमों में 100 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया। फर्जी बैंक खातों से पैसे निकाले जा रहे थे। घोटाला उजागर करने पर उन्हें धमकियां मिलीं। मार्च 2009 में बैडमिंटन खेलते समय उन पर हमला हुआ और सात गोलियां चलीं। चेहरे पर लगी गोलियों से जबड़ा क्षतिग्रस्त हुआ, एक आंख प्रभावित हुई। इस हमले के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। ठीक होने के बाद उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी की और साल 2022 में IAS बने।

इस्तीफे से पहले क्या हुआ?

जुलाई 2025 में उन्हें शाहजहांपुर जिले की पुवायां तहसील में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) बनाकर भेजा गया। चार्ज लेने के बाद एक क्लर्क को खुले में पेशाब करते देखकर उन्होंने उसे उठक-बैठक लगवाई। जब वकीलों ने विरोध किया, तो रिंकू सिंह खुद कान पकड़कर उठक-बैठक करने लगे। उन्होंने कहा, “सफाई की जिम्मेदारी हमारी है, इसलिए हम भी जिम्मेदारी लेंगे।” वीडियो वायरल हो गया। मात्र 36 घंटे बाद उन्हें हटा दिया गया और लखनऊ के राजस्व परिषद में अटैच कर दिया गया। आठ महीने तक कोई फील्ड पोस्टिंग नहीं मिली। इसी असंतोष के चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

रिंकू सिंह राही के पिता ने बेटे के फैसले पर दर्द जताया। उन्होंने कहा कि बेटा हमेशा से ईमानदारी और जनसेवा के लिए समर्पित रहा है। सात गोलियां खाने के बाद भी उसने UPSC की तैयारी छोड़ी नहीं। पिता ने पूछा, “ईमानदार अधिकारी को काम क्यों नहीं दिया जाता?”

पूरी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह

रिंकू सिंह राही का इस्तीफा बहुजन राजनीति में तूफान ला गया है। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने इसे दलित अधिकारी के साथ सिस्टम की उपेक्षा बताया। आजाद ने कहा कि " उत्तर प्रदेश में जहां एक ओर आईएएस अधिकारी दलित समाज के मंत्रियों के साथ प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे और उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, वहीं दूसरी ओर एक दलित आईएएस अधिकारी उपेक्षा के चलते इस्तीफा देने को मजबूर हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक और सवालों से भरी है।"

आज़ाद ने कहा, "रिंकू सिंह राही, जो दलित समाज से आते हैं, उनका इस्तीफा किसी एक अधिकारी का व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है; एक ऐसा अधिकारी जिसने 2009 में भ्रष्टाचार उजागर किया, जानलेवा हमले में 7 गोलियां खाईं, फिर भी सिस्टम के भीतर रहकर जनसेवा करना चाहता रहा। आज वही यह कहने को मजबूर है कि उसे काम ही नहीं दिया जा रहा और इसी उपेक्षा के कारण उसे इस्तीफा देना पड़ा। अभी तीन दिन पहले ही कन्नौज में राज्य मंत्री असीम अरुण जी को मुख्य अतिथि बनाकर बुलाया गया, लेकिन 45 मिनट तक इंतजार कराया गया और अंत में बिना कार्यक्रम के लौटना पड़ा। वहीं, पिछले साल भूतपूर्व राज्यपाल और वर्तमान कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य जी द्वारा अपने गृह जनपद आगरा में बुलाई गई किसानों की बैठक में अधिकारी पहुंचे ही नहीं, जिससे उन्हें बैठक स्थगित करनी पड़ी। यह विरोधाभास केवल संयोग नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के भीतर मौजूद गंभीर असंतुलन और सवालों की ओर इशारा करता है।"

कई बहुजन नेता सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि रिंकू सिंह राही ने 7 गोलियां खाकर भी भ्रष्टाचार से लड़ाई लड़ी, लेकिन सिस्टम उन्हें काम नहीं दे रहा। कांगेस के OBC विंग के युवा नेता यदुवेंद्र निर्वाण ने सवाल उठाया, " जब एक दलित समाज से आने वाले IAS ऑफिसर को परेशान किया जा सकता है तो एक आम SC, OBC वर्ग की हालात क्या होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है?"

रिंकू सिंह राही का इस्तीफा प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा रहा है। अभी तक योगी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। दलित इतिहास माह में यह घटना इसलिए चर्चित है क्योंकि यह दिखाती है कि आज भी दलित पृष्ठभूमि के ईमानदार अधिकारी को सिस्टम में सम्मान और काम का मौका मिलना कितना चुनौतीपूर्ण है। रिंकू सिंह राही ने हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया। उनका इस्तीफा पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या ईमानदार अफसरों को काम करने का अवसर नहीं मिलना चाहिए?

याद आये हरियाणा के IPS पूरण कुमार

अक्टूबर 2025 में हरियाणा के 2001 बैच के दलित IPS अधिकारी वाई. पूरण कुमार ने चंडीगढ़ स्थित अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने आठ-पृष्ठ के सुसाइड नोट में कई वरिष्ठ IPS और IAS अधिकारियों, तत्कालीन DGP शत्रुजीत कपूर, पर जातीय भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान और अत्याचार का आरोप लगाया था। पूरण कुमार ने दावा किया कि उन्हें जानबूझकर साइडलाइन किया जा रहा था और उनके साथ जातिगत भेदभाव हो रहा था। उनका मामला भी दलित अधिकारी के साथ सिस्टम की उपेक्षा और उत्पीड़न के सवाल उठाने वाला था, जिससे बहुजन संगठनों और राजनीतिक दलों में व्यापक चर्चा हुई थी।

2009 में रिंकू सिंह ने पेंशन स्कीमों में 100 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया जिसके बाद उनपर पर हमला हुआ और सात गोलियां चलीं। चेहरे पर लगी गोलियों से जबड़ा क्षतिग्रस्त हुआ, एक आंख प्रभावित हुई। उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी की और साल 2022 में IAS बने।
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