
न्यूयॉर्क- शहर के मैडिसन स्क्वायर गार्डन के बाहर सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत के कार्यक्रम का विरोध हुआ। अंदर इन्फोसिस थिएटर में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ चल रहा था, जिसमें भारतीय मूल के करीब 5,000 लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग ने किया था। यह भागवत के आरएसएस शताब्दी वर्ष के वैश्विक दौरे अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन का हिस्सा था।
प्रदर्शनकारियों में भारतीय अमेरिकी मुस्लिम काउंसिल (आईएएमसी), हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स, दलित सॉलिडेरिटी फोरम, सिख समूह, ईसाई, यहूदी और अन्य नागरिक अधिकार संगठनों के लोग शामिल थे। उन्होंने प्लेकार्ड और बैनर लेकर नारे लगाए जैसे “आरएसएस आउट ऑफ एनवाईसी”, “आरएसएस किल्ड गांधी” और “आरएसएस हमारा प्रतिनिधित्व नहीं करता”। कुछ प्रदर्शनकारियों ने भागवत के कटआउट पर पैर भी रखा। पूर्व न्यूयॉर्क सिटी कंपट्रोलर और कांग्रेस प्रत्याशी ब्रैड लैंडर भी विरोध स्थल पर पहुंचे।
विरोध का मुख्य आधार आरएसएस की विचारधारा और भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा व भेदभाव के आरोप थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आरएसएस और उससे जुड़ी राजनीति मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों और दलितों के खिलाफ नफरत और हिंसा का माहौल बनाती है। वे कार्यक्रम को हिंदुत्व विचारधारा को अमेरिका में वैधता देने का प्रयास बता रहे थे। आईएएमसी की साफा अहमद ने कहा कि यह आंदोलन मुसलमानों के खिलाफ भीड़ हिंसा, अंतरधार्मिक संबंधों पर हमलों और घरों को बुलडोजर से गिराने को सामान्य बना चुका है। हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स की श्राव्या ताडेपल्ली ने कहा कि भागवत सभी हिंदुओं का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि एक चरमपंथी हिंदू राष्ट्रवादी आंदोलन का नेतृत्व करते हैं।
कार्यक्रम से पहले 61 से 65 नागरिक अधिकार और अंतरधार्मिक संगठनों ने खुला पत्र जारी कर मैडिसन स्क्वायर गार्डन से कार्यक्रम रद्द करने की मांग की थी। न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी ने भी कार्यक्रम का समर्थन नहीं किया। उन्होंने आरएसएस की दृष्टि को “बहिष्करणवादी” बताया और कहा कि यह उस बहुलतावादी भारत से मेल नहीं खाती, जिसे उन्होंने जाना है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि निजी कार्यक्रम रद्द करने का अधिकार शहर प्रशासन के पास शायद नहीं है।
26 अगस्त को अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ) ने ट्रंप प्रशासन से भागवत का वीजा रद्द करने और आरएसएस सदस्यों पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी। आयोग का आरोप था कि आरएसएस से जुड़े समूहों ने ईसाइयों, दलितों, मुसलमानों और सिखों पर हिंसक हमले किए हैं। ये सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं। भारत सरकार ने यूएससीआईआरएफ के दावों को पक्षपातपूर्ण बताकर खारिज किया है।
अंदर भागवत ने करीब 45 मिनट तक भाषण दिया। उन्होंने “विविधता में एकता” की बात की और कहा कि जो हिंदू भारत में मुसलमानों का रहना नहीं चाहता, वह हिंदू नहीं रह सकता। उन्होंने धर्म को संतुलन बताया, न कि केवल पूजा-पद्धति। आयोजकों और आरएसएस का कहना है कि कार्यक्रम अंतरधार्मिक संवाद और “वसुधैव कुटुंबकम्” के संदेश पर आधारित था। आरएसएस प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा था कि यह खुला संवाद है और संगठन हिंदू-केंद्रित सांस्कृतिक आंदोलन है, असहिष्णुता के आरोप गलत हैं।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और अंदर के कार्यक्रम को बाधित नहीं कर सका। कुछ क्लिप्स में भारतीय तिरंगे के अपमान के भी दृश्य हैं, जिस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने प्रतिक्रिया दी। रिजिजू ने कहा, " हमने हमेशा कहा, आपको आरएसएस, भाजपा या सरकार की आलोचना करने की आजादी है। लेकिन हमारे राष्ट्र को गाली मत दो। हमारे झंडे और मेरे देश का अपमान मत करो। यह तुम्हें बहुत ज़्यादा महंगा पड़ेगा।" विरोध प्रदर्शन और कार्यक्रम दोनों ने भारतीय प्रवासी समुदाय के भीतर वैचारिक विभाजन को उजागर किया।
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