कर्नाटक: कलबुर्गी में गुरुवार को भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। दलित समन्वय समिति (Dalit Sanghatanegala Samanvaya Samiti) और कई अन्य दलित संगठनों ने डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। यह नाराजगी राज्य के मंत्री प्रियांक खड़गे के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं द्वारा की गई हालिया टिप्पणियों को लेकर थी।
दरअसल, प्रियांक खड़गे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थिति और उसके कामकाज को लेकर कुछ सवाल उठाए थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बीजेपी नेताओं को खड़गे द्वारा उठाए गए मुद्दों का तर्कसंगत जवाब देना चाहिए था। लेकिन इसके बजाय, उन्होंने मंत्री पर निजी हमले शुरू कर दिए और उन्हें धमकियां दी जा रही हैं।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि बीजेपी सांसद रमेश जिगाजिनागी और पूर्व मंत्री के.एस. ईश्वरप्पा तथा सी.टी. रवि द्वारा खड़गे के खिलाफ दिए गए बयान बेहद आपत्तिजनक हैं। उनका मानना है कि इन नेताओं की बयानबाजी पूरी तरह से अपमानजनक और डराने वाली प्रकृति की है।
दलित संगठनों ने राज्य सरकार से इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेने की अपील की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हर हाल में रक्षा होनी चाहिए।
हाल ही में खड़गे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने संगठन के पंजीकरण और इसके घोषित उद्देश्यों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। प्रदर्शनकारियों ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि ये सवाल सार्वजनिक जवाबदेही और पारदर्शिता के हित में पूछे गए हैं, न कि किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के लिए।
इन संगठनों ने राज्य सरकार और कांग्रेस पार्टी से प्रियांक खड़गे को अपना पूरा समर्थन देने का आह्वान किया है। उन्होंने आरएसएस की कार्यप्रणाली की कड़ी जांच की अपनी मांग को दोहराते हुए कहा कि इस संगठन की संरचना में पारदर्शिता की भारी कमी है। इसके साथ ही उन्होंने संघ को एक उचित नियामक ढांचे के तहत पंजीकृत करने की मांग भी की।
कलबुर्गी में डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के बाहर प्रदर्शनकारियों ने एक मानव श्रृंखला बनाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने खड़गे के साथ एकजुटता दिखाते हुए और आरएसएस के पंजीकरण की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन में शामिल लोगों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर कई कड़े संदेश लिखे हुए थे। इनमें "आरएसएस पर प्रतिबंध लगाओ", "आरएसएस का पंजीकरण होना चाहिए", "आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की जेड प्लस सुरक्षा वापस लो" और "हम प्रियांक खड़गे के साथ खड़े हैं" जैसे नारे शामिल थे।
विरोध दर्ज कराने के बाद संगठनों ने डिप्टी कमिश्नर के माध्यम से मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में राज्य सरकार से आरएसएस की कानूनी स्थिति की जांच करने और संवैधानिक मूल्यों तथा सामाजिक सद्भाव को बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाने का आग्रह किया गया है।
इस पूरे विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र सिन्नूर, मल्लप्पा होसामनी, रेणुका सिंघे, दिनेश डोड्डामनी और विभिन्न संगठनों के कई अन्य सदस्यों ने मिलकर किया।
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