लिव-इन पार्टनर की हत्या के आरोपी की सरेआम पिटाई: गुजरात पुलिस बोली- "अपराधी डरेंगे, मिसाल कायम होगी" लेकिन सवाल मानवाधिकार का

गिरफ्तारी के बाद नीलमबाग पुलिस शनिवार को आरोपी को उसी एसटी बस स्टैंड पर क्राइम सीन रिकंस्ट्रक्शन के लिए ले गई। वायरल वीडियो में दिखता है कि फैजल को रस्सियों से बांधा गया, पुलिस वाहन के पास घसीटा गया और डंडों से पीटा गया।
हत्या के आरोपी फैजल उर्फ खटकी लखानी को पुलिस ने उसी घटनास्थल पर ले जाकर रस्सी से बांधा और सार्वजनिक रूप से लाठियों से पीटा।
भावनगर की काजलबेन की हत्या के आरोपी को घटनास्थल पर पीटने का विडियो हो रहा वायरल सोशल मीडिया पर वायरल विडियो का स्क्रीन शॉट
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भावनगर- गुजरात के भावनगर एसटी बस स्टैंड पर लिव-इन पार्टनर काजलबेन बारैया की पीट-पीटकर हत्या के आरोपी फैजल उर्फ खटकी लखानी को पुलिस ने उसी घटनास्थल पर ले जाकर रस्सी से बांधा और सार्वजनिक रूप से लाठियों से पीटा। शनिवार को यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैला। एक तरफ हत्या की क्रूरता और दिनदहाड़े सार्वजनिक स्थान पर हुई मारपीट से गुस्सा है, दूसरी तरफ पुलिस की इस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश और गुजरात डीजीपी के सर्कुलर का उल्लंघन होने के आरोप लग रहे हैं।

काजलबेन बारैया करीब 40 वर्ष की थीं। वे भावनगर के कुम्हारवाड़ा की रहने वाली थीं। पुलिस के अनुसार वे पिछले कुछ सालों से फैजल उर्फ खटकी रफीकभाई लखानी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में थीं। दोनों एसटी बस स्टैंड के पास फुटपाथ और डिपो परिसर में रहते थे। फैजल के खिलाफ पहले से लूट और हिंसा से जुड़े मामले दर्ज बताए जाते हैं। हाल में वह जमानत पर बाहर आया था। बताया जाता है कि काजलबेन की मदद से उसे जमानत मिली थी।

3 सितंबर दोपहर करीब 3-4 बजे बस स्टैंड पर विवाद हुआ। पुलिस का कहना है कि फैजल को शक था कि काजलबेन का रवि गोहिल से संबंध है। रवि का बयान है कि विवाद शराब को लेकर भी था। बहस बढ़ी तो फैजल ने काजलबेन को नीचे गिराया, बार-बार लातें मारीं, बाल पकड़कर सिर, गर्दन और चेहरा टाइल्स पर पटकते रहे। हमला कई मिनट चला। आसपास मौजूद लोगों ने ज्यादा हस्तक्षेप नहीं किया। रवि भी घायल हुए। काजलबेन को अस्पताल ले जाया गया। 4 सितंबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। किडनी और सिर की गंभीर चोटें बताई गईं। मां भागूबेन बारैया की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज हुआ और शुक्रवार को फैजल गिरफ्तार हुआ। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।

गिरफ्तारी के बाद नीलमबाग पुलिस ने शनिवार को आरोपी को उसी एसटी बस स्टैंड पर क्राइम सीन रिकंस्ट्रक्शन के लिए ले गई। वायरल वीडियो में दिखता है कि फैजल को रस्सियों से बांधा गया, पुलिस वाहन के पास घसीटा गया और डंडों से पीटा गया। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि करीब 10 मिनट में सौ से ज्यादा वार हुए। नीलमबाग पुलिस इंस्पेक्टर डी.पी. उनादकट ने कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने फैजल को कुख्यात और हिंसक पृष्ठभूमि वाला बताया। उनका कहना था कि दिनदहाड़े महिला पर हुआ हमला पुलिस की छवि खराब कर गया, लोगों का भरोसा टूटा और महिलाओं के खिलाफ अपराध पर सख्त संदेश देना जरूरी था। उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराध को गंभीरता से लिया जाएगा, ताकि कोई और ऐसा न करे।

कानूनी सवाल क्यों उठ रहे?

घटना की वायरल ही रही विडियो के बाद लोगों की अलग अलग राय सामने आ रही है, कुछ लोग उस प्रकार के 'ट्रीटमेंट' को वाजिब और जरूरी बता रहे हैं, वहीं कानूनविदों का कहना है कि किसी भी आरोपी को इस तरह से टार्चर करना गैर कानूनी है। एक बड़ा हिस्सा पुलिस का समर्थन कर रहा है। लोग लिख रहे हैं कि दिनदहाड़े महिला की पिटाई देखकर पुलिस ने “सबक” सिखाया, महिलाओं की सुरक्षा का संदेश गया। कुछ पोस्ट में इसे “इंस्टेंट जस्टिस” कहा गया।

दूसरा हिस्सा कानून और प्रक्रिया की बात कर रहा है: हत्या क्रूर है, आरोपी को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन पुलिस खुद जज और जल्लाद नहीं बन सकती। कुछ यूजर्स ने पूछा कि काजलबेन पर हमला होते समय आसपास भीड़ क्यों चुप रही।

भारत में सजा अदालत तय करती है, पुलिस नहीं। सुप्रीम कोर्ट के डी.के. बसु दिशानिर्देश और बाद के आदेशों में हिरासत या सार्वजनिक स्थान पर आरोपी को पीटना, परेड कराना या अपमानित करना अवैध माना गया है। मई 2026 में गुजरात के तत्कालीन प्रभारी डीजीपी के.एल.एन. राव ने सर्कुलर जारी कर आरोपी को सरेआम घुमाने, रस्सी से बांधने, घुटनों पर चलाने या लाठियों से पीटने पर रोक लगाई थी। उल्लंघन पर संबंधित कर्मी और क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का प्रावधान है। सूरत में इसी तरह की सार्वजनिक पिटाई पर गुजरात हाईकोर्ट पहले ही स्वतः संज्ञान ले चुका है। यानी पुलिस का तर्क “संदेश” का है, लेकिन प्रक्रिया कानून के दायरे में नहीं दिखती। रिकंस्ट्रक्शन वैध जांच प्रक्रिया है; सार्वजनिक पिटाई नहीं।

इस घटना पर अभी तक बड़े राष्ट्रीय नेताओं के विस्तृत बयान सामने नहीं आए हैं। गुजरात में विपक्ष आमतौर पर कानून-व्यवस्था की नाकामी और महिलाओं की सुरक्षा पर सरकार को घेरता रहा है। इस मामले में दो अलग सवाल एक साथ आ गए हैं- दिनदहाड़े सार्वजनिक हत्या पर पुलिस की पहले की निगरानी, और बाद में आरोपी की सरेआम पिटाई। कुछ आवाजें दोनों पर सवाल उठा रही हैं: पहले रोक क्यों नहीं लगी, बाद में कानून तोड़कर सजा क्यों दी गई।

अभी तक राज्य सरकार या उच्च पुलिस अधिकारियों की ओर से इस पिटाई पर कोई स्पष्ट विभागीय जांच या कार्रवाई सार्वजनिक नहीं हुई है। आरोपी को अदालत में पेश किया जाना है। हत्या मामले की जांच जारी है।

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