गांधी जयंती पर जंतर-मंतर पर कोलाहल: दिल्ली पुलिस ने 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, कई नेता डिटेन

हिरासत में लिए गए लोगों को बसों में बैठाकर विभिन्न थानों जैसे बदरपुर और आउटर नॉर्थ दिल्ली ले जाया गया।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
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नई दिल्ली- महात्मा गांधी की जयंती के दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इनमें आम आदमी पार्टी (AAP) के कई नेता, वरिष्ठ माकपा नेता, यूथ कांग्रेस और NSUI, DYFI व SFI जैसे छात्र संगठनों के कार्यकर्ता और अन्य सक्रियतावादी शामिल हैं।

प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कथित बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटने संबंधी आरोपों को लेकर आयोजित किया गया था। आयोजकों में AISA, SFI, NSUI, DYFI समेत छात्र संगठन तथा राजनीतिक दल शामिल थे। दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और न्यू दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधात्मक आदेश लागू किए थे। जंतर-मंतर से प्रदर्शनकारियों को उठाने में पुलिस को खूब मशक्क्त करनी पड़ी, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए देश के कोने-कोने से लोगों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा।

प्रदर्शनकारियों ने खुलकर नारे लगाये, " "गली गली में शोर है. मोदी ज्ञानेश वोट चोर है"। उधर मुंबई के शिवाजी पार्क में भी कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आहूत प्रदर्शन में भारी भीड़ उमड़ी। इधर, यूपी में लखनऊ, मध्यप्रदेश के विदिशा व अन्य कई शहरों में इस प्रकार के प्रदर्शन हुए. NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ की अगुवाई में युवाओं ने पैदल शांति मार्च किया । युवाओं पर पुलिस ने जबरदस्ती की और NSUI अध्यक्ष के साथ कई साथियों को हिरासत में ले लिया गया।

पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ की गई जबरदस्ती पर योगेन्द्र यादव बोले, "गांधी जयंती के दिन मोदी सरकार ने ब्रिटिश हुकूमत की याद दिला दी।"

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हिरासत में लिए गए या रोके गए लोगों में AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, AAP विधायक संजीव झा, राज्यसभा सांसद संजय सिंह (नॉर्थ एवेन्यू पर रोके गए), RJD राज्यसभा सांसद मनोज झा, AISA राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, बृंदा करात सहित कई मार्क्सवादी नेता भी शामिल हैं। आतिशी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में बताया कि, "फतेहपुर बेरी पुलिस थाने में भी क्रांतिकारियों का जोश क़ायम है। हम लोकतंत्र के लिए लड़ते रहेंगे। हम मोदी जी की पुलिस से डरने वाले नहीं हैं, ज्ञानेश कुमार को जाना होगा।"

मनोज झा को पुलिस वैन में बैठे हुए वीडियो में कहा गया – “गांधी जयंती है आज, शर्म आनी चाहिए।” सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद उन्हें और संजीव झा को हिरासत में लिया गया।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक लगभग 500 प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से हिरासत में लिया गया। कुछ रिपोर्ट्स में SFI के करीब 700 कार्यकर्ताओं को अशोका रोड गोलचक्कर पर रोकने का जिक्र है। हिरासत में लिए गए लोगों को बसों में बैठाकर विभिन्न थानों (जैसे बदरपुर और आउटर नॉर्थ दिल्ली) ले जाया गया।

सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं: प्रदर्शन के एलान के साथ ही एक दिन पहले ही दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास भारी पुलिस बल, रैपिड एक्शन फोर्स तैनात किये थे और बैरिकेडिंग लगाई गई। दिल्ली मेट्रो के 11 स्टेशनों (राजीव चौक, सेंट्रल सचिवालय, जंतर-मंतर समेत) पर एंट्री-एग्जिट बंद रखे गए। जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट सेवाएं निलंबित की गईं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं और बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए गए। वे CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। पुलिस का रुख यह रहा कि अनुमति न होने और धारा 163 लागू होने के कारण बिना अनुमति के जमावड़े को रोका गया।

CPI(M) ने युवाओं, छात्रों और बड़ी संख्या में आए लोगों को बधाई देते हुए कहा कि सभी पाबंदियों का सामना करते हुए आज आम जनता ने विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी के पोलित ब्यूरो ने सैकड़ों युवाओं और छात्रों की हिरासत में लिए जाने की निंदा की। एक बयान में पार्टी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने ही ECI (चुनाव आयोग) को BJP के चुनावी कामकाज का एक 'बैक ऑफिस' बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण में काम कर रही दिल्ली पुलिस ने पूरे शहर को किले में बदल दिया और जंतर-मंतर की ओर आने वाले किसी भी व्यक्ति को हिरासत में ले लिया। उन्होंने जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के जमावड़े की इजाज़त न देकर संविधान द्वारा दिए गए विरोध करने के लोकतांत्रिक अधिकार को सीमित करने की कोशिश की। तमाम कोशिशों के बावजूद, डेमोक्रेटिक यूथ फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (DYFI), स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) और कई अन्य छात्र व युवा संगठनों के नेतृत्व में सैकड़ों युवा और छात्र पुलिस की ज़्यादतियों और बैरिकेड्स का सामना करते हुए वहाँ जमा हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ बेरहमी से मारपीट की और... "हम लड़ेंगे। हम जीतेंगे। ज्ञानेश कुमार ज़रूर इस्तीफ़ा देंगे।"

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