लखनऊ। समाजवादी पार्टी के 'पीडीए' (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) अभियान को कड़ी टक्कर देने के उद्देश्य से भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। रविवार को योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया, जिसमें छह नए चेहरों को शामिल किया गया है। अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का यह दूसरा और संभवतः अंतिम बहुप्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार है।
जातीय समीकरणों को साधने पर पूरा जोर
इस रणनीतिक विस्तार में जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा गया है। नए बनाए गए छह मंत्रियों में से तीन पिछड़े वर्ग से और दो दलित समुदाय से आते हैं। वहीं, सवर्ण चेहरे के रूप में समाजवादी पार्टी के बागी विधायक और ब्राह्मण नेता मनोज पांडे को जगह मिली है। इसके साथ ही, दो राज्य मंत्रियों को पदोन्नत भी किया गया है और ये दोनों ही पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखते हैं।
शपथ ग्रहण और मंत्रिमंडल का नया स्वरूप
राजभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सभी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी विशेष रूप से मौजूद रहे। पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडे ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। दूसरी ओर, कैलाश राजपूत, हंसराज विश्वकर्मा, कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर को राज्य मंत्री बनाया गया है। अब योगी मंत्रिमंडल में सदस्यों की कुल संख्या अपनी अधिकतम सीमा यानी 60 तक पहुंच गई है।
वर्तमान में राज्य सरकार की इस टीम में 23 कैबिनेट मंत्री, 16 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 21 राज्य मंत्री शामिल हो गए हैं। मौजूदा राज्य मंत्री अजित सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर को प्रमोशन देकर स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है। नवनियुक्त मंत्रियों में भूपेंद्र चौधरी और विश्वकर्मा विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य हैं, जबकि अन्य चार विधानसभा के सदस्य हैं।
वोट बैंक वापसी की कवायद
भाजपा का यह कदम मुख्य रूप से सपा के उस नैरेटिव को काटने की कोशिश माना जा रहा है, जिसके कारण 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी की सीटें 2019 की 62 के मुकाबले घटकर 33 रह गई थीं। प्रमोशन पाने वाले दोनों मंत्री तोमर और पाल भी पिछड़े वर्ग से हैं।
पश्चिमी यूपी में मजबूत वोटबैंक माने जाने वाले गुर्जर समुदाय से तोमर आते हैं, जबकि कानपुर और आगरा क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले पाल समुदाय का प्रतिनिधित्व अजित सिंह पाल करते हैं। कैबिनेट में एक जाट, एक लोध, एक विश्वकर्मा, एक पाल और एक गुर्जर को शामिल करके गैर-यादव पिछड़ों पर पूरा फोकस किया गया है।
गैर-जाटव दलित वोट बैंक को साधने के लिए कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष के संविधान और आरक्षण बदलने वाले नैरेटिव के कारण यह वोट बैंक काफी हद तक छिटक गया था।
इसके अलावा, ब्राह्मण विधायक मनोज पांडे की एंट्री को सवर्णों की नाराजगी दूर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में ओबीसी छात्रों के लिए यूजीसी गाइडलाइंस (जिस पर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी) के बाद विपक्ष भाजपा को सवर्ण विरोधी साबित करने में जुटा था।
जातीय समीकरणों को संतुलित करने के बाद अब 60 सदस्यीय योगी मंत्रिमंडल में 25 ओबीसी, 21 सवर्ण और 11 दलित चेहरे शामिल हैं। इसके साथ ही एक सिख, एक पंजाबी खत्री और एक मुस्लिम को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया गया है।
संगठनात्मक फेरबदल की ओर नजरें और नेताओं का धैर्य
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की नजरें लंबे समय से लंबित संगठनात्मक फेरबदल पर टिक गई हैं। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को यूपी भाजपा अध्यक्ष बने चार महीने से अधिक का समय बीत चुका है। इस बीच, भाजपा में नेताओं को नई जिम्मेदारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा है। कृष्णा पासवान अपनी तीसरी बार की विधायकी में मंत्री बनी हैं, जबकि राजपूत को मंत्री पद तक पहुंचने के लिए चार कार्यकाल तक धैर्य रखना पड़ा।
कैबिनेट मंत्री बने मुरादाबाद के जाट नेता भूपेंद्र चौधरी भी चार महीने से अधिक समय से अपने इस बदलाव की राह देख रहे थे। योगी सरकार के पहले कार्यकाल में भाजपा अध्यक्ष बनने से पूर्व वे पंचायती राज मंत्री थे।
वहीं, 2024 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग करने वाले सपा विधायक मनोज पांडे का भी अब जाकर पुनर्वास हुआ है। गौरीगंज के सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह और कालपी के विधायक विनोद चतुर्वेदी के साथ क्रॉस वोटिंग करने वाले पांडे को चार महीने पहले यूपी विधानसभा में असंबद्ध घोषित किया गया था, जिसने उनके मंत्री बनने का रास्ता साफ कर दिया।
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