राजस्थान: उदयपुर में एक दलित दुल्हन ने समाज में व्याप्त जातिवादी मानसिकता को कड़ी चुनौती दी है। अपनी शादी की बिंदोली (बारात) पर हुए हमले के ठीक आठ दिन बाद, पूजा मेघवाल ने शान से एक प्रतीकात्मक जुलूस निकाला। फिरोजा नीले रंग की पोशाक पहने और लाल-सुनहरी छतरी के नीचे सफेद घोड़ी पर सवार पूजा के हाथों में महात्मा ज्योतिराव फुले और सावित्रीबाई फुले की तस्वीर थी।
यह पूरी घटना 29 अप्रैल को शुरू हुई थी, जब उदयपुर के डबोक थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हरियाव के धीरा तलाई इलाके में पूजा की बिंदोली निकाली जा रही थी। आरोप है कि कुछ महिलाओं और पुरुषों ने दलित होने के बावजूद घोड़ी चढ़ने और उनके घर के बाहर से जुलूस निकालने पर कड़ी आपत्ति जताई। विरोध इतना बढ़ गया कि दुल्हन को घोड़ी से नीचे खींच लिया गया।
दुल्हन के पिता भैंरूलाल मेघवाल द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, हमलावरों ने जातिसूचक गालियां दीं और जुलूस न हटाने पर खून-खराबे की धमकी दी। इस दौरान डीजे बंद करवा दिया गया, मेहमानों पर पथराव हुआ और लाठी, डंडों व तलवारों से हमला किया गया। भगदड़ में कई लोग घायल हुए और महिलाओं के मंगलसूत्र सहित अन्य कीमती गहने और घड़ियां भी लूट ली गईं।
इस घटना के बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। यह एफआईआर लक्ष्मण सिंह, मधु सिंह, किशन सिंह, उदय सिंह, अर्जुन सिंह, तखत सिंह, फतेह सिंह, विक्रम सिंह और मंजू कंवर के खिलाफ दर्ज की गई है।
हमले से डरने के बजाय, 7 मई को पूजा और उनके समर्थकों ने उदयपुर के टाउन हॉल से कलेक्ट्रेट तक एक विशाल और शांतिपूर्ण मार्च निकाला। इस प्रतीकात्मक बिंदोली का नेतृत्व भीम आर्मी और अन्य जातीय संगठनों ने किया। जुलूस में शामिल ज्यादातर लोगों ने सफेद कपड़े और नीले रंग का स्कार्फ पहना हुआ था। उनके हाथों में डॉ. बी.आर. अंबेडकर की तस्वीर वाले नीले झंडे और 'जय भीम' व हाशिए के समुदायों के अधिकारों की मांग वाले पोस्टर थे।
पूजा के पिता भैंरूलाल ने इस दौरान अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि वे बस यह जताना चाहते हैं कि वे भी इंसान हैं और इसी देश के निवासी हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी समाज में छुआछूत की मानसिकता कायम है। उनका कहना था कि मेवाड़ क्षेत्र में दलितों के साथ ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं, जिसके खिलाफ उन्होंने प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा है।
उदयपुर भीम आर्मी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रोशन मेघवाल ने भी इस कुप्रथा पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले जैसे महापुरुषों के संघर्षों के कारण ही आज हर क्षेत्र में महिलाओं को समान अधिकार मिले हैं, तो फिर उन्हें घोड़ी चढ़ने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब देश 'अमृत काल' मना रहा है, तब दलितों को घोड़ी से उतारा जा रहा है, जो इस लोकतांत्रिक देश में सभी के समानता से जीने के अधिकार का हनन है।
ज्ञापन के माध्यम से यह बात भी सामने रखी गई कि इस क्षेत्र में ऐसी घटनाएं आम हैं। कुछ दिन पहले चित्तौड़गढ़ में ऐसा ही मामला सामने आया था, जबकि पिछले साल राजसमंद के तड़ावरा में पुलिस सुरक्षा के बीच तीन बिंदोली निकालनी पड़ी थीं। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से इस जातिवादी मानसिकता को जड़ से खत्म करने की अपील की है।
प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में भीम आर्मी ने बताया कि इस मामले में अब तक केवल चार लोगों की ही गिरफ्तारी हुई है। उन्होंने एफआईआर में आर्म्स एक्ट जोड़ने की मांग की है, क्योंकि आरोप है कि तखत सिंह ने तलवार से हमला किया था। साथ ही उन कई अन्य लोगों को नामजद करने की भी मांग की गई है जो हमले में शामिल थे।
इस मार्च के अंत में दलित समुदाय के खिलाफ राजस्थान के सभी जिलों में होने वाले दैनिक भेदभाव को तत्काल रोकने की मांग की गई। इसमें पीने का पानी भरने से रोकने, नाई द्वारा बाल न काटने, मंदिरों व सार्वजनिक स्थानों पर प्रवेश वर्जित करने और यहां तक कि मृत्यु के बाद श्मशान में होने वाले भेदभाव का जिक्र करते हुए प्रशासन से कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की गुहार लगाई गई है।
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