महिला आरक्षण: 2011 की जनगणना से लागू होगा 33% कोटा, लोकसभा और विधानसभा की सीटें 50% तक बढ़ेंगी

कैबिनेट की बड़ी मंजूरी: नई जनगणना का इंतजार खत्म, 2011 के आंकड़ों से ही लागू होगा 33% कोटा। 2029 आम चुनाव तक लोकसभा में 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी सीटें।
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नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नारी शक्ति वंदन अधिनियम और परिसीमन विधेयक में प्रस्तावित अहम संवैधानिक संशोधनों को अपनी मंजूरी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार का मुख्य उद्देश्य 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग करके लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को तेजी से लागू करना है।

लंबे समय से लंबित इस महिला आरक्षण को जमीनी हकीकत में बदलने के लिए सरकार कई विधेयक पेश करने जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया को अभी तक पूरी न हो सकी नई जनगणना से अलग रखा जाएगा और इसके बजाय 2011 के आंकड़ों को ही आधार बनाया जाएगा।

मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किए गए परिसीमन विधेयक में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की भारी वृद्धि का प्रस्ताव है। वहीं, केंद्र शासित प्रदेशों में इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार एक अलग विधेयक लेकर आएगी।

लोकसभा में सीटों की यह 50 फीसदी बढ़ोतरी 2029 में होने वाले अगले आम चुनावों तक ही पूरी तरह से प्रभावी हो पाएगी।

इन सभी जरूरी विधेयकों को इसी महीने बुलाए गए संसद के विशेष सत्र के दौरान पेश किया जाएगा। फिलहाल संसद का बजट सत्र स्थगित कर दिया गया है, जो अब 16 अप्रैल को फिर से शुरू होगा। उम्मीद जताई जा रही है कि 18 अप्रैल तक सदन की कार्यवाही चलेगी ताकि इन महत्वपूर्ण विधेयकों पर विस्तार से विचार कर इन्हें पारित किया जा सके।

सूत्रों ने बताया कि सरकार ने कैबिनेट के इस अहम फैसले की कोई सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। संसदीय परंपराओं के अनुसार, जब संसद का सत्र चालू होता है तो ऐसे महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों का ऐलान सदन के बाहर नहीं किया जाता है।

इस प्रस्ताव का सीधा लक्ष्य लोकसभा सीटों की कुल संख्या को 543 से बढ़ाकर 816 करना है। सीटों का यह विस्तार होने पर महिलाओं के लिए आसानी से 273 सीटें आरक्षित की जा सकेंगी।

यदि इस प्रस्ताव को कानूनी रूप देना है, तो उन संवैधानिक प्रावधानों में भी संशोधन करना होगा जो फिलहाल लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या 550 और विधानसभाओं की 500 तक सीमित करते हैं। इस बदलाव के लिए लोकसभा के मामले में संविधान के अनुच्छेद 81 और राज्य विधानसभाओं के लिए अनुच्छेद 170 में संशोधन करना अनिवार्य होगा।

इस नए प्रस्ताव के लागू होने पर राज्यों के राजनीतिक समीकरण भी बदलेंगे। उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य संख्या मौजूदा 403 से बढ़कर 600 के पार पहुंच जाएगी। निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से सीमांकन के लिए जून तक एक परिसीमन आयोग का गठन किए जाने की भी पूरी संभावना है, जो 2011 की जनगणना के आधार पर अपना काम करेगा।

जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बजट सत्र के दौरान इस पूरे प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए कुछ प्रमुख विपक्षी नेताओं से मुलाकात की थी। इस बैठक में शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार नई जनगणना पूरी होने का इंतजार किए बिना ही संशोधन विधेयक लाना चाहती है, क्योंकि जनगणना की प्रक्रिया में अभी काफी लंबा समय लगेगा।

गृह मंत्री ने नेताओं को यह भी बताया कि संविधान संशोधन से महिला आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करने का रास्ता साफ होगा। गौरतलब है कि सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित होने के दौरान कई विपक्षी दलों ने यही मांग उठाई थी। सूत्रों ने बताया कि इस अहम बैठक में बीजेडी (BJD), वाईएसआरसीपी (YSRCP), एनसीपी (एसपी) (NCP SP), शिवसेना (यूबीटी) (Shiv Sena UBT) और एआईएमआईएम (AIMIM) के नेता शामिल हुए थे।

सरकार ने चर्चा के लिए सभी विपक्षी दलों के नेताओं को आमंत्रित किया था, लेकिन कांग्रेस, डीएमके (DMK), टीएमसी (TMC) और वामपंथी दल इस बैठक से दूर रहे। इन दलों ने मांग की है कि 29 अप्रैल को मौजूदा विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद ही सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने टीएमसी को छोड़कर अन्य विपक्षी दलों की बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को एक पत्र भी लिखा था। अपने पत्र में खड़गे ने मांग की थी कि सरकार इन नए प्रस्तावों का विस्तृत ब्योरा देते हुए सभी दलों को एक नोट जारी करे।

दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक चिंताओं को दूर करने के लिए भी सरकार ने एक अहम प्रस्ताव रखा है। सूत्रों के अनुसार, राज्यों की सीटों का आपसी अनुपात पहले की तरह ही समान रहेगा। दक्षिणी राज्यों को लंबे समय से यह आशंका रही है कि आगामी जनगणना और परिसीमन के बाद उनकी तुलना में उत्तर भारतीय राज्यों में जनसंख्या के अनुपात में सीटों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।

कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी समेत कई बड़े विपक्षी दलों ने भी सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित होने के दौरान सीटों के इस अनुपात से जुड़े मुद्दे को सदन में जोर-शोर से उठाया था।

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