
गया/नई दिल्ली- डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के पावन अवसर पर ऑल इंडिया बौद्ध फोरम और अन्य बौद्ध संगठनों ने महाबोधि महाविहार की 'मुक्ति' के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने की घोषणा की है। संगठनों ने बोधगया मंदिर अधिनियम (BT Act 1949) को निरस्त करने की मांग करते हुए इसे 'प्रताड़ना और पाखंड' से मुक्त कराने का आह्वान किया है।
महाबोधि मुक्ति आंदोलन 12 फरवरी 2025 से तेज हुई थी, जब बौद्ध भिक्षुओं और अनुयायियों ने बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार मंदिर को गैर-बौद्धों के नियंत्रण से मुक्त करने की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू किया। उनकी मांग है कि मंदिर का प्रबंधन पूरी तरह से बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए और 1949 के बोधगया टेंपल एक्ट को रद्द किया जाए।
ऑल इंडिया बौद्ध फोरम के डॉ. आकाश लामा ने एक बयान में कहा कि 14 अप्रैल हमारे लिए एक महान पर्व है। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने अपना पूरा जीवन और परिवार समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने हमें भगवान बुद्ध का वह धम्म दिया, जो विज्ञान और प्रकृति के अनुकूल है और जीवन जीने का सही रास्ता दिखाता है।
बयान में कहा गया, "बाबा साहब ने हमें सिखाया कि ज्ञान, करुणा और न्याय के बिना जीवन अधूरा है। आज जब पूरी दुनिया नफरत, द्वेष और आपसी लड़ाई की ओर बढ़ रही है, हमें बाबा साहब के आदर्शों को याद करने की आवश्यकता है। उन्होंने हमें सिखाया कि केवल करुणा और प्रेम के माध्यम से ही हम दुनिया बदल सकते हैं।"
बौद्ध संगठनों का आरोप है कि जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था, वह पवित्र स्थल (महाबोधि महाविहार) आज 'ठाट-बाट और पाखंड' की गिरफ्त में है। डॉ. लामा ने कहा कि इसे मुक्त कराना हमारा पहला कर्तव्य है, ताकि भारत पुनः ज्ञान, विवेक, सद्गुण और करुणा का केंद्र बन सके।
उन्होंने कहा, "महाबोधि महाविहार की मुक्ति केवल एक स्थान की मुक्ति नहीं है, बल्कि बौद्ध समाज की मुक्ति है, हमारे विचारों की मुक्ति है। यह आंदोलन हमें सिखाता है कि हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए और अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष करना चाहिए।"
आन्दोलन के ये लक्ष्य:
महाबोधि महाविहार को प्रताड़ना और पाखंड से मुक्त कराना।
भगवान बुद्ध के धम्म की पुनः स्थापना करना।
समाज में करुणा, प्रेम और न्याय को बढ़ावा देना।
बाबा साहब के आदर्शों को साकार करना।
बौद्ध फोरम ने लोगों से अपील की है कि बाबा साहब की जयंती के अवसर पर हर गाँव में अपने बैनर तले आवाज उठाई जाए और बीटी एक्ट 1949 को निरस्त करने की मांग की जाए। साथ ही, इस आंदोलन को आगे बढ़ाने, अपने विचार साझा करने और समाज में जागरूकता फैलाने का आह्वान किया गया है।
डॉ. आकाश लामा ने कहा, "आइए, हम सब 14 अप्रैल के इस पावन अवसर पर एकजुट हों, महाबोधि महाविहार की मुक्ति के लिए एक साथ लड़ें और बाबा साहब के सपनों को वास्तविकता में बदलें।"
इधर, सुप्रीम कोर्ट ने बोध गया मंदिर प्रबंधन अधिनियम (बीटी एक्ट 1949) की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली लंबित याचिका पर विचार हो रहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जोयमल्या बगची की बेंच ने फरवरी 17 को मुख्य याचिका (डब्ल्यूपी (सिविल) 380/2012) पर सुनवाई के बाद मामले को अंतिम सुनवाई के लिए 28 अप्रैल तय कर दिया है। यह याचिका भंते आर्य नागार्जुन शूरै सासाई और अन्य द्वारा केंद्र सरकार एवं अन्य पक्षों के खिलाफ दायर की गई है।
मामले का मुख्य मुद्दा 1949 के बोध गया मंदिर प्रबंधन अधिनियम (संशोधनों सहित) की संवैधानिक वैधता से जुड़ा है। यह अधिनियम यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल महाबोधि महाविहार के प्रबंधन को नियंत्रित करता है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्ति हुई। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि एक्ट में प्रबंधन समिति में बराबर गैर-बौद्ध सदस्यों (जिसमें गया जिले का जिला मजिस्ट्रेट भी शामिल है) की व्यवस्था बौद्धों के साथ भेदभाव करती है। वे मांग कर रहे हैं कि महाविहार का पूर्ण नियंत्रण बौद्ध समुदाय को सौंपा जाए।
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