उत्तर प्रदेश: पीलीभीत में गुरुवार को भारी बवाल देखने को मिला। यहाँ बूंदीभूड गांव में दो नई शराब की दुकानों के खुलने का विरोध कर रही करीब 150 महिलाओं ने उग्र रूप धारण कर लिया। हाथों में लाठी-डंडे लिए इन महिलाओं ने शराब की दुकान पर धावा बोल दिया और शराब व बीयर की बोतलों को सड़क पर फेंककर चकनाचूर कर दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। उनका मकसद प्रदर्शनकारियों को शांत करना और दुकानों को सुचारू रूप से खुलवाना था। लेकिन प्रशासन का यह प्रयास नाकाम हो गया।
पुलिस के मुताबिक, उग्र भीड़ ने सरकारी अधिकारियों पर डंडों से हमला कर दिया और जमकर पथराव किया। इस अचानक हुए हमले में तहसीलदार वीरेंद्र कुमार सिंह सहित कई अन्य अधिकारी घायल हो गए। इसके अलावा, उपद्रवियों ने एक बस समेत तीन सरकारी वाहनों में भी तोड़फोड़ की।
वहीं दूसरी ओर, स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने महिलाओं पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया, जिसमें कई महिलाएं घायल हो गईं और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। गांव वालों का कहना है कि महिलाओं पर हुए इस कथित अत्याचार को देखने के बाद ही गांव के पुरुष इस विरोध प्रदर्शन में कूद पड़े।
इस हिंसक घटना के बाद पुलिस ने कड़ा एक्शन लिया है। माधौटांडा पुलिस स्टेशन में 45 निवासियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें 30 महिलाएं और 15 अज्ञात लोग शामिल हैं। आबकारी निरीक्षक दीपक कुमार की शिकायत पर इन सभी के खिलाफ दंगा करने, हत्या के प्रयास, सरकारी काम में बाधा डालने और लोक सेवक को जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने जैसी सख्त धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
पीलीभीत के क्षेत्राधिकारी (सीओ) प्रतीक दहिया ने स्पष्ट किया कि फिलहाल इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि शुरुआत में 100 से 150 महिलाएं प्रदर्शन कर रही थीं, जिसके बाद अन्य ग्रामीण भी उनके साथ जुड़ गए। सीओ ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग या लाठीचार्ज के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि कुछ ग्रामीणों के घायल होने की सूचना मिली है, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
भारत-नेपाल सीमा से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित इस गांव की आबादी करीब 3,000 है। यहां रहने वाले ज्यादातर लोग पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और उनकी आजीविका मुख्य रूप से खेती-बाड़ी पर निर्भर है।
पुलिस के अनुसार, पिछले महीने ही बूंदीभूड गांव में दो लोगों को देसी शराब और कम्पोजिट शराब की दो अलग-अलग दुकानें आवंटित की गई थीं। आवंटन के बाद से ही प्रशासन लगातार ग्रामीणों को समझाने-बुझाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन गांव वाले लगातार इन दुकानों को खोलने का विरोध कर रहे थे।
गांव के पूर्व प्रधान चंद्रदीप राजभर ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अगर ये दुकानें खुल गईं, तो गांव में शराब की लत एक गंभीर समस्या बन जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीणों के भारी विरोध के बावजूद अधिकारी बुधवार को जबरन शराब की दुकान खुलवाने का प्रयास कर रहे थे।
पूर्व प्रधान ने यह भी बताया कि ये दुकानें एक ऐसे चौराहे पर स्थापित की गई हैं, जहां से महिलाओं और बच्चों का बाजार के लिए नियमित आना-जाना लगा रहता है। इसके आसपास मंदिर और स्कूल भी मौजूद हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में गांव में बहुत कम लोग ही शराब का सेवन करते हैं।
गांव के एक अन्य निवासी सुनील कुमार राजभर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि लोगों को डर है कि शराब की दुकानें खुलने से वे लोग भी नशे की गिरफ्त में आ सकते हैं जिन्हें अभी इसकी लत नहीं है। ग्रामीणों को इस बात की गहरी चिंता सता रही है कि इन दुकानों से उनके गांव की शांति और सामाजिक सौहार्द पूरी तरह से बिगड़ जाएगा।
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