
नई दिल्ली: कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (रंगबाड़ी) में सीजेरियन डिलीवरी के बाद संक्रमण फैलने से 48 घंटे के भीतर दो प्रसूताओं की मौत का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना में चार अन्य महिलाओं की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। मामले को लेकर मानवाधिकार अधिवक्ता अंसार इंदौरी ने 8 मई 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) नई दिल्ली में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है। आयोग ने इस शिकायत को डायरी नंबर 10248/IN/2026 के तहत दर्ज कर लिया है।
आयोग को भेजी गई शिकायत के अनुसार, सभी पीड़ित महिलाओं को 4 मई को अस्पताल के प्रसूति वार्ड में भर्ती कराया गया था। सोमवार शाम को उनकी सर्जरी हुई, लेकिन 5 मई (मंगलवार) को उनकी स्थिति अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक (SSB) में शिफ्ट किया गया।
प्राथमिक जांच में सामने आया कि सर्जरी के बाद उनकी किडनी में संक्रमण हो गया था। इस कारण उनका ब्लड प्रेशर गिर गया और कई महिलाओं को सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इस पूरी प्रक्रिया में ज्योति नामक एक पीड़िता सहित अब तक कुल दो प्रसूताओं की जान जा चुकी है, जबकि अन्य जीवन के लिए संघर्ष कर रही हैं।
लगातार हुई इन मौतों से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगाया है। गुस्साए परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गए। परिवार वालों की मांग है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार डॉक्टरों और संबंधित मेडिकल स्टाफ के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ता एडवोकेट अंसार इंदौरी ने इस घटना को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त 'जीवन के अधिकार' का गंभीर उल्लंघन बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षित मातृत्व हर महिला का बुनियादी अधिकार है। सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान इस तरह लापरवाही से हुई मृत्यु राज्य द्वारा नागरिकों को सुरक्षित स्वास्थ्य की गारंटी देने के दायित्व की स्पष्ट विफलता है। 48 घंटे के भीतर दो मौतें अस्पताल की गंभीर व्यवस्थागत खामियों को उजागर करती हैं।
अधिवक्ता इंदौरी ने मानवाधिकार आयोग से मांग की है कि वह इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए तत्काल जांच शुरू करे और जिला प्रशासन तथा अस्पताल प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट तलब करे।
उन्होंने मृतक महिलाओं के पोस्टमॉर्टम और मेडिकल रिकॉर्ड की स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा कराने की भी अपील की है। इसके साथ ही मांग रखी गई है कि चिकित्सीय लापरवाही प्रमाणित होने पर दोषी डॉक्टरों व कर्मचारियों पर आपराधिक व विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, पीड़ित परिवारों को समुचित मुआवजा दिया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अस्पताल के प्रसूति विभाग का ऑडिट कर सुधारात्मक निर्देश जारी किए जाएं।
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