
नई दिल्ली: मलयालम फिल्म इंडस्ट्री की जानी-मानी अभिनेत्रियों रेवती और पद्मप्रिया ने सोमवार को एसोसिएशन ऑफ मलयालम मूवी आर्टिस्ट्स (AMMA) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इन दोनों दिग्गज अभिनेत्रियों ने साफ किया है कि उनका यह फैसला किसी जल्दबाजी में लिया गया कदम नहीं है। ऑनलाइन जारी किए गए एक संयुक्त बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ किसी एक घटना का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक लंबा संघर्ष रहा है।
अपने बयान में अभिनेत्रियों ने पिछले लगभग एक दशक की जद्दोजहद को बयां किया। उन्होंने कहा कि उनकी मांगें हमेशा से बहुत साधारण और बुनियादी रही हैं। वे केवल सुरक्षित कार्यस्थल, सम्मान, जवाबदेही और समान व्यवहार चाहती थीं। यह न्यूनतम अधिकार है जिसका हर सदस्य हकदार है और उनका मानना था कि इन बुनियादी मूल्यों पर पूरी इंडस्ट्री एकजुट हो सकती है।
लेकिन इन साधारण मांगों की कीमत उन्हें भारी पड़ी। हक मांगने के बदले उन्हें चुप्पी और दूरियों का सामना करना पड़ा। सहकर्मियों, दोस्तों और उस जगह से उन्हें अलग-थलग कर दिया गया, जिसे वे कभी अपना घर मानती थीं। इसके बावजूद वे संगठन से जुड़ी रहीं क्योंकि उनका मानना है कि घोर निराशा के बीच भी उम्मीद के जिंदा रहने की एक अद्भुत क्षमता होती है।
विमेन इन सिनेमा कलेक्टिव (WCC) की संस्थापक सदस्य रहीं इन दोनों अभिनेत्रियों ने हेमा कमेटी की रिपोर्ट का भी प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट आने के बाद मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाओं की समस्याओं के उजागर होने पर जो इस्तीफे हुए, वे किसी सिद्धांत के आधार पर नहीं दिए गए थे। उनके अनुसार, वे इस्तीफे केवल अपनी जवाबदेही से बचने का एक सुरक्षित रास्ता थे।
उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जैसे ही लोगों का ध्यान इस मुद्दे से भटका, पुरानी व्यवस्था फिर से हावी हो गई। सत्ता खुद को बचाने के नए तरीके हमेशा ढूंढ लेती है। भले ही समय के साथ चेहरे और तरीके बदल जाएं, लेकिन असमानता और भेदभाव को बढ़ावा देने वाला बुनियादी ढांचा आज भी पूरी तरह से अछूता है।
AMMA का गठन सभी कलाकारों की एक सशक्त और सामूहिक आवाज बनने के लिए किया गया था। लेकिन अभिनेत्रियों का आरोप है कि अब यह संगठन तेजी से पितृसत्ता और सत्ता की राजनीति का शिकार हो चुका है, जिसने इसके मूल आदर्शों को खोखला कर दिया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि ऐसे हालात में संगठन से बाहर निकलना उनकी हार नहीं है, बल्कि यह उनके आत्मसम्मान का प्रतीक है।
उन्हें मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के एक बेहतर और सुरक्षित भविष्य पर आज भी अटूट विश्वास है। वे चाहती हैं कि यह इंडस्ट्री वैसी बने जैसी इसे होनी चाहिए, जहां आने वाली पीढ़ी की महिलाओं को वो लड़ाइयां दोबारा न लड़नी पड़ें, जो उनकी सीनियर्स ने लड़ी हैं। उनका यह दृढ़ विश्वास किसी भी संगठन की सदस्यता का मोहताज नहीं है।
गौरतलब है कि ये दोनों अभिनेत्रियां WCC के उन प्रमुख सदस्यों में शामिल रही हैं, जिन्होंने 2017 के बहुचर्चित अभिनेत्री दुष्कर्म मामले में पीड़िता के साथ न खड़े होने पर AMMA नेतृत्व की कड़ी आलोचना की थी।
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