
नई दिल्ली: मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए लोगों के लिए राज्य सरकार ने मदद का हाथ बढ़ाया है। राज्य के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने सोमवार, 6 जुलाई 2026 को 26 ऐसे आंतरिक विस्थापितों (आईडीपी) को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की, जो गंभीर और पुरानी बीमारियों से पीड़ित हैं।
ये सभी लाभार्थी मई 2023 में कुकी-ज़ो और मैतेई समुदायों के बीच भड़की हिंसा के बाद से विस्थापित हैं। फिलहाल वे राज्य की राजधानी इम्फाल स्थित लाम्बोइखोंगनांगखोंग राहत शिविर में अपना जीवन गुजार रहे हैं। बीमारी की मार झेल रहे ये लोग मुख्य रूप से कैंसर, किडनी की बीमारियों और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
वित्तीय सहायता के चेक सौंपते हुए मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने विस्थापितों के हालात पर गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विशेष आर्थिक मदद का मुख्य उद्देश्य उन बीमार लोगों को तत्काल राहत पहुंचाना है, जो विपरीत परिस्थितियों के कारण अपने घर वापस नहीं लौट पा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने पीड़ितों को भरोसा दिलाया कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे इन विस्थापितों को भविष्य में भी सरकार की ओर से ऐसी सहायता मिलती रहेगी। उन्होंने मौजूदा हालात पर दुख जताते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि लोगों को आज भी अपने घरों से दूर राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इस मौके पर मणिपुर की एकमात्र राज्यसभा सांसद अधिकारीमयुम शारदा देवी ने भी महिलाओं के लिए एक अहम घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार राहत शिविरों में रहने वाली महिला विस्थापितों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बुनाई मशीनें और आजीविका से जुड़े अन्य आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराएगी।
इस महत्वपूर्ण राहत कार्यक्रम में प्रशासन और सरकार के अन्य प्रतिनिधि भी शामिल हुए। कुम्बी विधानसभा क्षेत्र के विधायक सानासम प्रेमचंद्र सिंह और इम्फाल पश्चिम के उपायुक्त (डीसी) मयंगलांबम राजकुमार सिंह ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
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