
नई दिल्ली- राष्ट्रीय खेलों की स्वर्ण पदक विजेता ताइक्वांडो खिलाड़ी वैष्णवी (अंडर-46 किग्रा) आहत हैं। उनका आरोप है कि ताइक्वांडो संघ के अधिकारी जानबूझकर एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के उनके सपने को तोड़ रहे हैं। वैष्णवीअकेली भारतीय महिला ताइक्वांडो एथलीट हैं, जो पिछले साल सीनियर विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में पहुंची थीं। इस शानदार उपलब्धि के बावजूद, उन्हें लगातार मौका देने से इनकार किया जा रहा है।
दरअसल, इंडिया ताइक्वांडो ने वैष्णवी को 49 किग्रा वर्ग चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में कम से कम दो बार वाइल्ड कार्ड देने से साफ मना कर दिया। गौरतलब है कि यह एशियन चैंपियनशिप एशियाई खेलों के लिए सीधी क्वालीफिकेशन प्रतियोगिता है। यदि वैष्णवी को एंट्री नहीं दी जाती है तो उसका एशियन गेम्स में शामिल होने का सपना चूर हो जायेगा।
नतीजा यह कि जो खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहरा चुकी है, वह अपने ही देश में एक ट्रायल में हिस्सा लेने के लिए दर-दर भटक रही है और अब उसे न्याय के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने संघ से जवाब मांगा है। आइए जानते हैं पूरा मामला...
वैष्णवी भारत की उन चुनिंदा ताइक्वांडो खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्होंने देश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई है। वर्ष 2025 उनके लिए बेहद शानदार रहा। उन्होंने जनवरी 2025 में राष्ट्रीय खेलों के ओपन ट्रायल में स्वर्ण पदक जीता, फिर फरवरी में 38वें राष्ट्रीय खेलों में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया। सितंबर में राष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप और विश्व चैंपियनशिप चयन ट्रायल में भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किए। अक्टूबर में चीन में हुई विश्व चैंपियनशिप में वे भारत की एकमात्र महिला खिलाड़ी बनीं जिन्होंने तीन मैच खेले , यह देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। नवंबर में कतर ओपन में रजत पदक और दिसंबर में केन्या में अंडर-21 विश्व चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचना, ये सब मिलाकर उन्हें 49 किग्रा वर्ग की सबसे प्रबल दावेदार बनाते हैं।
परेशानी तब शुरू हुई जब वैष्णवी दिसंबर 2025 में केन्या में अंडर-21 विश्व चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, उसी दौरान उत्तर प्रदेश राज्य ताइक्वांडो चैंपियनशिप आयोजित की गई। राष्ट्रीय ड्यूटी पर होने के कारण वे इसमें भाग नहीं ले सकीं, जिसके चलते यूपी स्टेट के फेडरेशन कप में उनकी एंट्री रोक दी गई। यह फेडरेशन कप बाद में एशियाई खेलों के चयन ट्रायल का आधार बन गया। वैष्णवी ने स्टेट एसोसिएशन से वाइल्ड कार्ड की मांग की, लेकिन उन्हें कोई मौका नहीं दिया गया। इस प्रकार देश के लिए खेलने की सजा उन्हें अपने ही घरेलू करियर में भुगतनी पड़ी।
जनवरी 2026 में वे एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में उतरीं और इसके बाद दुबई में राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के लिए चुनी गईं। 26 जनवरी को इसी शिविर के दौरान उनकी नाक में गंभीर चोट आ गई। वे तुरंत भारत लौटीं और 31 जनवरी को नाक की सर्जरी करवानी पड़ी। उन्होंने अपनी चोट की जानकारी 29 जनवरी को ही इंडिया ताइक्वांडो के अध्यक्ष नामदेव शिरगांवकर को वॉट्सऐप पर दे दी थी।
27वीं एशियाई ताइक्वांडो चैंपियनशिप के चयन ट्रायल दो चरणों में रखे गए थे। फेज-1 के ट्रायल 6 से 8 फरवरी 2026 को पुणे में थे। सर्जरी के बाद रिकवरी में होने के कारण वैष्णवी इनमें हिस्सा नहीं ले सकीं। 6 फरवरी को ही उन्होंने इंडिया ताइक्वांडो को अपने सभी मेडिकल दस्तावेजों के साथ एक विस्तृत ईमेल भेजा और फेज-2 के फाइनल ट्रायल में सीधे वाइल्ड कार्ड के तौर पर भाग लेने की अनुमति मांगी। इस ईमेल का कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद उन्होंने अध्यक्ष शिरगांवकर को करीब 36 बार फोन किया पर उनकी कॉल नहीं उठाई गई।
26 मार्च को यानी बेंगलुरु ट्रायल के ठीक एक दिन पहले अध्यक्ष ने खुद फोन किया और कहा, "देखता हूं क्या हो सकता है।" इसी एक वाक्य को भरोसे में लेकर वैष्णवी और उनके परिवार ने बेंगलुरु का टिकट करवाया और ट्रायल वेन्यू पर पहुंच गईं।
वैष्णवी के लिए वर्ष 2025 अनुकरणीय रहा है। इस वर्ष उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कई स्वर्ण पदक जीते, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। वह अंडर-21 विश्व चैंपियनशिप में तीन मैच खेलने वाली और क्वार्टर फाइनल में पहुँचने वाली एकमात्र भारतीय महिला एथलीट बनीं।
6 से 28 मार्च को बेंगलुरु में फेज-2 के फाइनल ट्रायल हुए। वैष्णवी वेन्यू पर पहुंचीं, अधिकारियों से मिलीं, यहां तक कि किसी भी वजन वर्ग में खेलने की पेशकश की लेकिन उन्हें खेलने नहीं दिया गया। सात घंटे से ज्यादा इंतजार करने के बावजूद उन्हें बिना कोई कारण बताए लौटा दिया गया। अगले दिन उनकी मुलाकात अध्यक्ष से हुई तो उन्हें बस इतना कहा गया कि "और मेहनत करो।"
इस घटना के बाद राष्ट्रीय कोच हरजिंदर सिंह ने वैष्णवी के कोच आशीष प्रताप सिंह को फोन पर बताया कि उन्हें 49 किग्रा वर्ग के अंतिम ट्रायल में मौका दिया जाएगा और वे वजन को उस हिसाब से मैनेज कर लें। 5 अप्रैल को जब वैष्णवी ने खुद अध्यक्ष को मैसेज किया, तो उन्होंने "थंब्स अप" इमोजी से जवाब दिया जिसे वैष्णवी ने स्वाभाविक रूप से सहमति मान लिया। लेकिन जब 15 अप्रैल 2026 को पंचकूला (हरियाणा) में हुए अंतिम ट्रायल की सूची जारी हुई, तो उसमें उनका नाम कहीं नहीं था- न कोई सूचना, न कोई कारण, न कोई जवाब दिया गया।
22 अप्रैलको वैष्णवी ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका WP (C) 5867/2026 दायर की। याचिका में केंद्र सरकार (प्रतिवादी-1), भारतीय खेल प्राधिकरण SAI (प्रतिवादी-2), इंडिया ताइक्वांडो (प्रतिवादी-3) और उसके अध्यक्ष नामदेव शिरगांवकर (प्रतिवादी-4) को पक्षकार बनाया गया। याचिका में कोर्ट से मांग की गई कि या तो उन्हें तुरंत ट्रायल में शामिल किया जाए, या फिर उनके वजन वर्ग में किसी स्वतंत्र पर्यवेक्षक की निगरानी में नए सिरे से निष्पक्ष ट्रायल आयोजित किए जाएं। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि राष्ट्रीय ड्यूटी पर चोट लगने के कारण ट्रायल में न आ पाना और उसके लिए सजा देना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और आजीविका) का सीधा उल्लंघन है।
वैष्णवी की याचिका में एक गंभीर सवाल यह भी उठाया गया है कि एक अन्य खिलाड़ी रोदाली बरुआ को +73 किलो वर्ग में बेंगलुरु ट्रायल में हारने के बावजूद वाइल्ड कार्ड दिया गया, जबकि उनसे कहीं बेहतर रिकॉर्ड रखने वाली वैष्णवी को बार-बार मना किया जाता रहा। इसी तरह एक अन्य खिलाड़ी आयुष शुक्ला को भी वाइल्ड कार्ड मिला, जबकि उनके पास सीनियर स्तर पर कोई उल्लेखनीय उपलब्धि नहीं है।
एक और खिलाड़ी नितिश सिंह, जो फेडरेशन कप में हिस्सा ही नहीं ले पाए थे और जनवरी 2026 के जयपुर एशियाई खेलों के ट्रायल में भी हार गए थे और और पुणे में एशियाई चैम्पियनशिप के प्रथम चरण के मुकाबले में भी पराजित हुए थे। उन्हें भी चयन प्रक्रिया में बनाए रखा गया। वैष्णवी का कहना है कि यह सब साबित करता है कि चयन प्रक्रिया में कोई पारदर्शी मानक नहीं है और उनके साथ जानबूझकर अन्याय किया गया।
भारतीय ताइक्वांडो के अध्यक्ष नामदेव शिरगांवकर ने एक समाचार पत्र को बताया कि उन्हें एथलीट के प्रति सहानुभूति है, लेकिन नियमों का पालन करना जरूरी है। उन्होंने कहा, "वह एक शानदार एथलीट हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि वह भारत को गौरवान्वित करेंगी और हमें पदक दिलाएंगी। समस्या यह है कि उनका अच्छा रिकॉर्ड 46 किलोग्राम वर्ग में है और वह 49 किलोग्राम वर्ग में वाइल्डकार्ड चाहती थीं। कुछ लड़कियां ऐसी हैं जो प्रदर्शन और परिणामों दोनों में उनसे बेहतर हैं।" उन्होंने आगे कहा, "मैं उनकी मदद करना चाहता था क्योंकि मैं उनकी क्षमता को जानता हूं, लेकिन अगर हम वाइल्डकार्ड बांटना शुरू कर देंगे तो हमारे पास ऐसे सैकड़ों अनुरोध आ जाएंगे। हमने केवल एक वाइल्डकार्ड जारी किया क्योंकि एथलीट के रैंकिंग अंक उस वर्ग में दूसरे नंबर की एथलीट से बेहतर थे। मुझे उम्मीद है कि वह कड़ी मेहनत करेंगी और जल्द ही वापसी करेंगी। उन्हें और भी कई मौके मिलेंगे।"
वैष्णवी के अधिवक्ता मुकेश ने द मूकनायक को बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। केंद्र सरकार और SAI के वकीलों ने नोटिस स्वीकार कर हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा। फेडरेशन के वकील ने अदालत को बताया कि 16 अप्रैल को ही चयनित खिलाड़ियों के नाम संबंधित प्राधिकरण को भेजे जा चुके हैं और उनके पास अन्य आपत्तियां भी हैं जो वे हलफनामे में रखेंगे। कोर्ट ने अगली सुनवाई 11 मई के लिए तय की है।
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