जन्मतिथि विवाद में MP High Court से महाकुंभ गर्ल मोनालिसा और पति को बड़ी राहत, गिरफ्तारी नहीं होगी! जानिए क्या है पूरा मामला

मोनालिसा ने आरोप लगाया कि शादी के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने बिना सुनवाई के उनका मूल जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर दिया और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर उनकी जन्मतिथि बदल दी ताकि उन्हें नाबालिग दिखाया जा सके। याचिकाकर्ताओं ने इसे "सरकारी रिकॉर्ड में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सांप्रदायिक भड़काने" की संज्ञा दी है।
याचिका में कहा गया कि अंतर्धार्मिक विवाह को 'लव जिहाद' का लेबल देकर सांप्रदायिक रंग दिया गया। मोनालिसा ने आरोप लगाया कि उन्हें और फरमान को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
याचिका में कहा गया कि अंतर्धार्मिक विवाह को 'लव जिहाद' का लेबल देकर सांप्रदायिक रंग दिया गया। मोनालिसा ने आरोप लगाया कि उन्हें और फरमान को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
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इंदौर- मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने महाकुंभ 2025 में चर्चित हुई मोनालिसा भोसले और उनके पति फरमान खान को बड़ी राहत देते हुए FIR में कोई दंडात्मक कार्रवाई न करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति गजेंद्र सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि "अगली सुनवाई तक FIR संख्या 0112/2026 के तहत याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई शुरू नहीं की जाएगी"। अदालत ने मामले को 27 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक कृष्ण टांखा और अधिवक्ता जेरी लोपेस ने पेश किया। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता राहुल सेठी और सरकारी अधिवक्ता सुनीत कपूर ने पक्ष रखा।

प्रयागराज महाकुंभ 2025 में रुद्राक्ष बेचने वाली मोनालिसा भोसले सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थीं। इसके बाद वह फिल्म इंडस्ट्री में आईं और केरल में एक मलयालम फिल्म 'नागम्मा' की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात अभिनेता मोहम्मद फरमान खान से हुई। दोनों ने 11 मार्च को तिरुवनंतपुरम स्थित अरुमनूर नैनार देवा मंदिर में विवाह कर लिया। इसके बाद केरल रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिज (कॉमन) नियमों के तहत पूवर ग्राम पंचायत में विवाह पंजीकृत कराया गया।

विवाद किस बात को लेकर है?

यह पूरा विवाद मोनालिसा भोसले की उम्र को लेकर है। दरअसल, मोनालिसा ने 11 मार्च को केरल में अभिनेता मोहम्मद फरमान खान से विवाह किया, लेकिन मोनालिसा के पिता जयसिंह भोसले ने खरगोन जिले के महेश्वर थाने में FIR दर्ज कराई कि फरमान ने उनकी नाबालिग बेटी (16 वर्ष) का अपहरण कर लिया और उससे शादी कर ली।

वहीं, मोनालिसा और फरमान का दावा है कि उनके दस्तावेजों (आधार, पैन, वोटर आईडी, बैंक पासबुक) में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज है, जिससे वे विवाह के समय वयस्क (18 वर्ष) थीं। मोनालिसा ने आरोप लगाया कि शादी के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने बिना सुनवाई के उनका मूल जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर दिया और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर उनकी जन्मतिथि बदल दी ताकि उन्हें नाबालिग दिखाया जा सके। इसी जन्म प्रमाण पत्र विवाद के तहत मामला अदालत में है, जहाँ याचिकाकर्ताओं मोनालिसा और फरमान ने जन्म प्रमाण पत्र रद्द करने और FIR में कोई कार्रवाई न करने की मांग की है।

मोनालिसा के पिता जयसिंह भोसले ने मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के महेश्वर थाने में शिकायत दर्ज कराई। इस पर FIR दर्ज की गई, जिसमें फरमान खान पर कथित रूप से नाबालिग का अपहरण करने का आरोप लगाया गया।

FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं लगाई गईं: धारा 137(2) (अपहरण), धारा 81 (विवाह का भ्रम देकर संबंध बनाना), धारा 83 (नाबालिग को बहलाना), धारा 87 (विवाह के लिए अपहरण)। इसके अलावा POCSO अधिनियम, बाल विवाह निषेध अधिनियम और SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी लगाई गईं। राज्य सरकार और पिता का दावा है कि विवाह के समय मोनालिसा 16 वर्ष की नाबालिग थीं। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की जांच में दावा किया गया कि विवाह के दिन मोनालिसा की उम्र 16 साल, 2 महीने और 12 दिन थी।

जन्म प्रमाण पत्र रद्द क्यों किया

मोनालिसा ने आरोप लगाया कि शादी के बाद उनका मूल जन्म प्रमाण पत्र बिना किसी सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के सरकारी पोर्टल से हटा दिया गया। उनके वकील सुभाष चंद्रन ने कहा कि " बिना सुनवाई का अवसर दिए, मध्य प्रदेश सरकार ने मनमाने ढंग से मोनालिसा का जन्म प्रमाण पत्र रद्द कर दिया।"

याचिका में आरोप लगाया गया कि पिता की शिकायत के बाद जन्म रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर मोनालिसा की जन्मतिथि बदल दी गई, ताकि उन्हें नाबालिग दिखाया जा सके। याचिकाकर्ताओं ने इसे "सरकारी रिकॉर्ड में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और सांप्रदायिक भड़काने" की संज्ञा दी है।

याचिका में कहा गया कि अंतर्धार्मिक विवाह को 'लव जिहाद' का लेबल देकर सांप्रदायिक रंग दिया गया। मोनालिसा ने आरोप लगाया कि उन्हें और फरमान को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। केरल उच्च न्यायालय ने उन्हें पुलिस सुरक्षा प्रदान की थी।

इससे पहले केरल उच्च न्यायालय ने फरमान खान को एक माह की ट्रांजिट एंटीसिपेटरी बेल दी थी, ताकि वे मध्य प्रदेश की अदालत में नियमित अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकें। न्यायालय ने कहा कि "प्रथम दृष्टया मोनालिसा वयस्क प्रतीत होती हैं" क्योंकि उनके दस्तावेजों में जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज है।

हालांकि, मध्य प्रदेश के मंदलेश्वर की POCSO अदालत ने फरमान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद मोनालिसा और फरमान ने MP हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की, जिस पर 13 जुलाई को यह अंतरिम आदेश पारित हुआ।

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को पक्षकारों में संशोधन करने की अनुमति दी: प्रतिवादी क्रमांक 1 को "अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मध्य प्रदेश" किया गया और नए प्रतिवादी क्रमांक 5 के रूप में "नगर परिषद, महेश्वर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, जिला खरगोन" को शामिल किया गया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।

याचिका में कहा गया कि अंतर्धार्मिक विवाह को 'लव जिहाद' का लेबल देकर सांप्रदायिक रंग दिया गया। मोनालिसा ने आरोप लगाया कि उन्हें और फरमान को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
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याचिका में कहा गया कि अंतर्धार्मिक विवाह को 'लव जिहाद' का लेबल देकर सांप्रदायिक रंग दिया गया। मोनालिसा ने आरोप लगाया कि उन्हें और फरमान को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
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याचिका में कहा गया कि अंतर्धार्मिक विवाह को 'लव जिहाद' का लेबल देकर सांप्रदायिक रंग दिया गया। मोनालिसा ने आरोप लगाया कि उन्हें और फरमान को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
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