गरीबी को मात देकर भारतीय हॉकी का चमकता सितारा बनीं 15 वर्षीय नौशीन नाज, पिता हैं दिहाड़ी मजदूर

टूटी हॉकी स्टिक और बिना छत के घर से शुरू हुआ सफर, दिहाड़ी मजदूर की 15 वर्षीय बेटी अब अंडर-18 एशिया कप में देश का प्रतिनिधित्व करने को तैयार।
Nausheen Naz hockey player
टूटी स्टिक से खेलने वाली सिवनी की 15 वर्षीय नौशीन नाज अंडर-18 एशिया कप के लिए तैयार हैं।
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भोपाल: शहर में चल रहे एक राष्ट्रीय शिविर में 15 वर्षीय नौशीन नाज उन खिलाड़ियों के साथ ट्रेनिंग कर रही हैं, जिनके पास खेल के ढेरों साजो-सामान हैं। दूसरी ओर, नौशीन को हॉकी खेलने के लिए दूसरों से गियर उधार लेना पड़ता है। उनके पिता अहफाज खान एक दिहाड़ी मजदूर हैं, जो दिन के बमुश्किल 250 रुपये कमाते हैं। इतने कम पैसों में वह अपनी बेटी के लिए एक अच्छी हॉकी स्टिक या किट नहीं खरीद सकते।

इन तमाम अभावों के बावजूद, मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की यह होनहार बेटी आज भारतीय महिला हॉकी की सबसे रोमांचक फॉरवर्ड प्लेयर मानी जा रही है। वह आगामी 29 मई से जापान में शुरू होने वाले अंडर-18 एशिया कप की टीम में अपनी जगह पक्की करने के बेहद करीब है।

नौशीन के इस सफर की शुरुआत चार साल पहले भोपाल से लगभग 380 किलोमीटर दूर सिवनी की एक बिना छत वाली तंग और किराए की झोपड़ी से हुई थी। उनके पिता 48 वर्षीय अहफाज खान बताते हैं कि नौशीन ने एक टूटी हुई और फेंकी गई हॉकी स्टिक को अपना हथियार बनाया था। बिना किसी शिकायत के वह उस स्टिक को कपड़े से बांधती और उसके टूटने पर उसे फिर से बांधकर खेलती रहती थी।

साल 2023 नौशीन की जिंदगी में एक बड़ा मोड़ लेकर आया, जब मध्य प्रदेश हॉकी अकादमी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। यहां से उनके लिए बेहतर ट्रेनिंग, सही डाइट और जरूरी खेल उपकरणों के रास्ते खुल गए। उनके पिता का कहना है कि यह अकादमी उनकी बेटी के लिए एक जीवनरेखा साबित हुई है, जिसने खेल का वह सारा सामान और प्रशिक्षण दिया जो वह खुद कभी नहीं दे सकते थे।

जल्द ही नौशीन की यह कड़ी मेहनत शानदार आंकड़ों में बदलने लगी। इसी महीने बिहार के राजगीर में आयोजित 16वीं सब-जूनियर महिला राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उन्होंने विपक्षी टीमों के छक्के छुड़ा दिए। इस टूर्नामेंट में नौ गोल दागकर वह टॉप स्कोरर और 'प्लेयर ऑफ द फाइनल' बनीं। बेटी की इस सफलता को देखकर पिता की आंखें खुशी से भर आईं।

कभी भयंकर गरीबी के कारण बेटी के इस खेल को लेकर आशंकित रहने वाले पिता अब उसके सबसे मजबूत ढाल बन चुके हैं। नौशीन के कपड़ों को लेकर होने वाली सामाजिक आलोचनाओं का वह डटकर सामना करते हैं। उनका साफ कहना है कि अगर कोई उनकी बेटी को रोकने की कोशिश करेगा, तो उसे पहले उनसे निपटना होगा।

सात भाई-बहनों में से एक नौशीन के परिवार के लिए भुखमरी, जगह की कमी और पैसों का अभाव आज भी रोजमर्रा की चुनौती है। हालांकि, उनकी लगन और प्रतिभा लगातार उनके लिए सफलता के नए दरवाजे खोल रही है। अब टैलेंट हंट के जरिए उनकी छोटी बहन सबरिका ने भी अकादमी में प्रवेश पा लिया है।

भारतीय हॉकी का इतिहास हमेशा से छोटे शहरों और धूल भरे मैदानों से निकले संघर्षों से भरा रहा है। नौशीन नाज भी उसी परंपरा का हिस्सा हैं, जिनका सफर किसी विशेषाधिकार से नहीं बल्कि सच्ची लगन से तय हुआ है। एशिया कप पर अपनी नजरें गड़ाए हुए नौशीन पूरे आत्मविश्वास के साथ कहती हैं कि उनका सिर्फ एक ही लक्ष्य है, और वह है अपने देश के लिए खेलना।

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