
उत्तर प्रदेश: राजधानी लखनऊ में पुलिस ने एक ऐसे बड़े अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो मासूम बच्चियों को राजस्थान में शादी के नाम पर बेचता था। इन लड़कियों का सौदा डेढ़ लाख रुपये तक में किया जाता था। इस मामले में पुलिस ने एक महिला सहित तीन वयस्कों और एक नाबालिग को गिरफ्तार किया है। फिलहाल राजस्थान में बैठे गिरोह के मुख्य सरगनाओं की तलाश तेज कर दी गई है।
इस खौफनाक सिंडिकेट का खुलासा तब हुआ जब बीते 12 मई को मोहनलालगंज के गनियार गांव की रहने वाली कमलेशा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनकी 16 और 12 साल की दो पोतियां अचानक लापता हो गई हैं। जांच में सामने आया कि बच्चियों को उनकी बिछड़ी हुई मां से मिलाने और बेहतर जिंदगी देने का झांसा देकर अगवा किया गया था।
मामला नाबालिग बच्चियों से जुड़ा होने के कारण पुलिस ने तत्काल एक्शन लिया और सादे कपड़ों में चार विशेष टीमों को तैनात किया। जांच के दौरान लगभग 150 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। हालांकि लड़कियों के मोबाइल फोन बंद थे, लेकिन तकनीकी निगरानी और जमीनी खुफिया जानकारी की मदद से उनकी लोकेशन रायबरेली में ट्रेस की गई। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए 18 मई को दोनों बहनों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत दर्ज किए गए पीड़ितों के बयानों से एक बेहद विचलित करने वाला सच सामने आया। बच्चियों को जबरन शादी के लिए राजस्थान ले जाकर बेचने की तैयारी थी। पुख्ता सबूतों के आधार पर पुलिस ने 3 जून को अतरौली चौराहे से मुख्य संदिग्धों को दबोच लिया। गिरफ्तार किए गए लोगों में 25 वर्षीय अनुराग यादव, 32 वर्षीय मोहम्मद अख्तर, 23 वर्षीय प्रिया पटेल उर्फ शीला और एक 17 वर्षीय किशोर शामिल है।
अतिरिक्त डीसीपी (दक्षिण) वसंत कुमार रल्लापल्ली ने बताया कि पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यह पूरा नेटवर्क साल 2020 से उत्तर प्रदेश और राजस्थान के बीच सक्रिय था। पूछताछ में पता चला कि आरोपी प्रिया पटेल ने राजस्थान के कोटा में रहने वाली सोनम नाम की महिला से संपर्क बनाया था। इसके बाद प्रिया ने अपने लिव-इन पार्टनर अनुराग और सहयोगी अख्तर के साथ मिलकर अनाथ या गरीब परिवारों की बच्चियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया, जिनके परिवार वाले आसानी से पुलिस तक नहीं पहुंच सकते थे।
यह शातिर गैंग बच्चियों को नौकरी, घूमने और अच्छे जीवन का लालच देकर फंसाता था। इस ताजे मामले में भी आरोपियों ने बच्चियों का विश्वास जीता और उन्हें रायबरेली ले गए। वहां उन्हें नए कपड़े पहनाकर उनकी तस्वीरें खींची गईं। फिर इन तस्वीरों को व्हाट्सएप के जरिए राजस्थान में सोनम और उसके पति भूपेंद्र चौधरी को भेजा गया। लड़कियों के चेहरे "मंजूर" होने के बाद उनका सौदा तय होता था। पुलिस के अनुसार, बच्चियों को कोटा जिले के बंबोरी ले जाने की योजना थी, जहां प्रिया को प्रति लड़की डेढ़ लाख रुपये मिलने वाले थे।
जांचकर्ताओं को ऐसे अहम सुराग भी मिले हैं जिनसे पता चलता है कि इससे पहले भी रायबरेली की दो बहनों को इसी नेटवर्क के जरिए बेचा जा चुका है। पुलिस ने लड़कियों को एक जिले से दूसरे जिले तक ले जाने में इस्तेमाल किए गए दो चार पहिया वाहन भी जब्त किए हैं। अतिरिक्त डीसीपी रल्लापल्ली के मुताबिक, यह एक बेहद संगठित गिरोह है जिसमें सभी की भूमिकाएं पहले से तय थीं। फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान राजस्थान में बैठे मास्टरमाइंड सोनम और भूपेंद्र चौधरी को गिरफ्तार करने और अन्य पीड़ितों की पहचान करने पर है, जिसके लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
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