
केरल के कोझिकोड में एक वायरल वीडियो के कारण सेल्स मैनेजर की आत्महत्या के मामले में मुख्य आरोपी शिम्जिथा मुस्तफा को कोर्ट ने 14 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। कुनामंगलम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने के बाद यह फैसला सुनाया गया। पुलिस ने आरोपी पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है, जो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो से जुड़ा है। इस घटना के बाद डिजिटल ट्रोलिंग के घातक प्रभाव पर फिर एक बार बहस छिड़ गई है। केरल राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी घटना पर संज्ञान लेते हुए पुलिस से एक सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है।
घटना 19 जनवरी (सोमवार) को सुबह हुई, जब 41 वर्षीय दीपक यू की लाश उनके गोविंदपुरम स्थित घर में छत के पंखे से लटकी मिली। दीपक एक प्रमुख टेक्सटाइल कंपनी में सेल्स मैनेजर थे। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर भारी ट्रोलिंग और अपमानजनक टिप्पणियों से वे गहरे मानसिक तनाव में थे, जिसने उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया।
घटना की जड़ 16 जनवरी (शुक्रवार) को है। दीपक कार्यालय जाने के लिए कोझिकोड की एक भीड़भाड़ वाली बस में सवार हुए थे। यात्रा के दौरान, उनके हाथ ने पीछे खड़ी एक महिला के शरीर को अनजाने में छुआ। वह महिला शिम्जिथा मुस्तफा (35 वर्षीय), वडकारा, कोझिकोड की रहने वाली एक सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर, उसी समय एक रील रिकॉर्ड कर रही थीं।
उस पल तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन बाद में उन्होंने 18 सेकंड का वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। वीडियो में शिम्जिथा ने दावा किया कि दीपक ने कई बार जानबूझकर उनके साथ अनुचित स्पर्श किया। यह वीडियो घंटों के अंदर वायरल हो गया और 20 लाख से ज्यादा व्यूज बटोर लिया। पोस्ट के बाद दीपक पर ऑनलाइन ट्रोलिंग का तूफान आ गया, लोगों ने अपमानजनक कमेंट्स किए, उन्हें अपराधी ठहराया और गिरफ्तारी की मांग की।
परिवार के अनुसार, दीपक ने आरोपों से इनकार किया था, लेकिन मानसिक दबाव इतना बढ़ गया कि वे खाना-पीना छोड़ बैठे। रिश्तेदारों ने बताया, "वह एक शांत और मेहनती इंसान था। वीडियो ने उसकी जिंदगी तबाह कर दी।"
कोझिकोड मेडिकल कॉलेज पुलिस ने शिम्जिथा मुस्तफा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 (IPC की धारा 306 के समकक्ष) के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया।
शिम्जिथा को गिरफ्तार करने के बाद 22 जनवरी को कुनामंगलम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। कोर्ट ने पुलिस हिरासत का आदेश दिया, ताकि जांच के दौरान पूछताछ हो सके और सबूत सुरक्षित रहें। पुलिस अब वीडियो की प्रामाणिकता, उसके प्रभाव और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उकसावे का सबूत मजबूत साबित हुआ, तो आरोपी को 10 साल तक की सजा हो सकती है।
दीपक के माता-पिता शॉक में है। पिता ने कहा, "हमारा बेटा निर्दोष था। बस में भीड़ के कारण ऐसा हुआ, लेकिन वीडियो ने उसे बदनाम कर दिया। हम मुख्यमंत्री से न्याय मांगेंगे।" परिवार ने अपील की है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ऐसी सामग्री पर तुरंत कार्रवाई करें।
दोस्तों और सहकर्मियों ने दीपक को "ईमानदार और समर्पित पेशेवर" बताया। एक सहकर्मी ने कहा, "वह हमेशा सकारात्मक रहता था, लेकिन ऑनलाइन आक्रोश ने उसे अकेला कर दिया।"
शिम्जिथा मुस्तफा की गिरफ्तारी ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। जहां ज्यादातर यूजर्स उन्हें 'व्यूज की भूखी' बता रहे हैं, वहीं कुछ समर्थक उनकी हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं। वे दावा कर रहे हैं कि शिम्जिथा असली पीड़िता हैं और सार्वजनिक उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाना अपराध नहीं होना चाहिए। समर्थकों का कहना है कि यह मामला महिलाओं की सुरक्षा को कमजोर कर रहा है।
शिम्जिथा मुस्तफा के समर्थकों का एक बड़ा वर्ग उन्हें 'बोल्ड सर्वाइवर' बता रहा है। वे आरोप लगा रहे हैं कि नया भारत बलात्कारियों को बचाता है और निर्दोष मुस्लिम महिलाओं को जेल भेजता है। एक वेरिफाइड यूजर @Peoplepower08 ने पोस्ट किया: "शिम्जिथा मुस्तफा, जिसे मोलेस्ट किया गया, अब गिरफ्तार। शिम्जिथा मुस्तफा – सर्वाइवर अब क्रिमिनल बन गई प्रूफ पोस्ट करने के लिए। नया भारत बलात्कारियों को पावर देता है, और निर्दोष मुस्लिम पीड़िताओं को जेल। और वे दावा करते हैं कि वे महिलाओं की सुरक्षा के लिए हैं। बकवास!।"
फिल्ममेकर लीना मनिमेकलाई ने कहा, " सच बोलना कोई अपराध नहीं है। उत्पीड़न का दस्तावेजीकरण करना "उकसाने" का काम नहीं है। किसी पुरुष द्वारा आत्महत्या करने का निर्णय उस महिला की ज़िम्मेदारी नहीं है जिसका उसने शोषण किया है। यह गिरफ्तारी बेतुकी है। यह खतरनाक है। यह न्याय नहीं है - यह एक चेतावनी है। एक ऐसी चेतावनी जिसका मकसद महिलाओं को चुप करा देना है। मैं बोलने वाली महिलाओं के साथ खड़ी हूँ। मैं इस शर्मनाक गिरफ्तारी की निंदा करती हूँ। और मैं ऐसी दुनिया को स्वीकार नहीं कर सकती जहाँ शोषण को उजागर करना, शोषण करने से भी बड़ा अपराध माना जाता है।"
कई फेमिनिस्ट यूजर्स का मानना है कि सोशल मीडिया ही महिलाओं के पास न्याय का आखिरी हथियार है। वे कह रही हैं कि कानून महिलाओं को तुरंत सुरक्षा नहीं देता, इसलिए वीडियो शेयर करना जरूरी है।
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