#MeToo आरोपी वैरामुथु को ज्ञानपीठ: CM Stalin, कमल हासन- रजनीकांत ने दी बधाई तो फूटा महिलाओं का आक्रोश- "राजनीति में आकर महिलाओं की सुरक्षा पर भाषण देते हैं, जबकि खुद..."

केरल की ONV एकेडमी ने 2021 में वैरामुथु को प्रतिष्ठित अवार्ड के लिए चुना था लेकिन तब भी महिलाओं का भारी विरोध सामने आया, अभिनेता पार्वती थिरुवोथु जैसी कई जानी-मानी हस्तियों और पार्श्व गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने भी ट्विटर पर केरल सरकार के इस फैसले की निंदा की और अवॉर्ड को वापस लेने की मांग की थी जिसके बाद वैरामुथु ने अवॉर्ड स्वीकार करने से मना कर दिया था।
गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने साल 2018 में मीटू मूवमेंट के दौरान गीतकार वैरामुथु पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने साल 2018 में मीटू मूवमेंट के दौरान गीतकार वैरामुथु पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।ग्राफिक- आसिफ निसार/ द मूकनायक
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नई दिल्ली- तमिल कवि और गीतकार वैरामुथु को वर्ष 2025 के लिए 60वां ज्ञानपीठ पुरस्कार देने की घोषणा 14 मार्च को भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा की गई। यह पुरस्कार उन्हें तमिल साहित्य में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जा रहा है, जिसमें उनकी काव्य रचनाओं की गहराई, सांस्कृतिक समृद्धि और विशिष्ट शैली शामिल है। वैरामुथु पिछले 20 वर्षों में तीसरे तमिल लेखक हैं जिन्हें यह सम्मान मिला है: पहले अकिलन (1975) और जयकांतन (2002) को मिल चुका है। वे तमिल कविता को यह पुरस्कार पाने वाले पहले व्यक्ति हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, सुपरस्टार रजनीकांत और कमल हासन जैसे प्रमुख व्यक्तियों ने उन्हें बधाई दी।

वैरामुथु ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से सभी को आभार व्यक्त करते हुए लिखा, "तमिल कम्युनिटी ज्ञानपीठ अवॉर्ड को अपने कंधों पर आई माला की तरह सेलिब्रेट कर रही है। हर समय फूल गिर रहे हैं। मैं उन सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं जिन्होंने मुझे बधाई दी और उन सभी को भी जिन्होंने मुझे बधाई देने की कोशिश की लेकिन मुझ तक नहीं पहुंच सके।" उन्होंने गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, चीफ मिनिस्टर एम.के. स्टालिन, अनेक सांसदों, सुपर स्टार्स कमल हसन और रजनीकान्त सहित कई लोगों का आभार जताया.

पुरस्कार की घोषणा के तुरंत बाद तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर विवाद और विरोध शुरू हो गया। कई लेखक, कलाकार, फेमिनिस्ट एक्टिविस्ट और आम महिलाएं खुलकर विरोध जता रही हैं। सोशल मीडिया पर #MeToo से जुड़े पुराने आरोपों को दोहराते हुए लोग पुरस्कार वापस लेने की मांग कर रहे हैं। विरोध मुख्य रूप से चेन्नई और अन्य शहरों में सोशल मीडिया पोस्ट, रीट्वीट और बयानों के माध्यम से फैल रहा है। विपक्षी आवाजें कह रही हैं कि साहित्यिक सम्मान के लिए नैतिकता और महिलाओं की गरिमा को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। कई महिलाएं व्यक्तिगत रूप से इस फैसले से आहत महसूस कर रही हैं और इसे पीड़िताओं के साथ अन्याय बताती हैं।

#MeToo आंदोलन में लगे गंभीर यौन उत्पीड़न के आरोप

2018 में भारत के #MeToo आंदोलन के दौरान वैरामुथु पर कई महिलाओं ने यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए थे। प्लेबैक सिंगर चिन्मयी श्रीपादा ने सबसे पहले खुलकर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 2000 से 2006 के बीच वैरामुथु ने उनसे अनुचित तरीके से संपर्क किया, होटल रूम में बुलाया और करियर प्रभावित करने की धमकी दी। चिन्मयी ने उन्हें "मोलेस्टर" कहा और बताया कि विभिन्न आयु वर्ग की कई महिलाओं (करीब 17-20 के आसपास) ने भी उनके खिलाफ आरोप लगाए थे। इनमें सिंगर भुवना शेषन जैसी अन्य महिलाएं शामिल थीं, जबकि कुछ ने गुमनाम रहकर बात कही। आरोपों में महिलाओं के साथ अनुचित छेड़छाड़, जबरदस्ती और पावर का दुरुपयोग शामिल था। वैरामुथु ने इन आरोपों से इनकार किया था। इन घटनाओं के बाद चिन्मयी ने कहा कि उन्होंने बोलने की भारी कीमत चुकाई, जबकि अन्य महिलाओं के सपने टूट गए।

चिन्मयी श्रीपादा ने रजनीकांत और कमल हासन की बधाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि "शक्तिशाली पुरुष हमेशा अपने साथियों का साथ देते हैं, महिलाओं की पीड़ा से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।" एक लम्बे सोशल मीडिया पोस्ट में चिन्मयी ने लिखा, " श्री रजनीकांत और श्री कमल हासन - इंडस्ट्री के दो बहुत ताकतवर लोग हैं, ऐसे दिग्गज जो 17 महिलाओं के यौन उत्पीड़न के बारे में खुलकर बोलने पर भी कुछ नहीं करते।

ये ऐसे लोग हैं जो राजनीति में आ गए हैं और महिलाओं की सुरक्षा पर भाषण देते हैं, जबकि खुद एक छेड़छाड़ करने वाले के साथ मिले हुए हैं - और अपनी ही इंडस्ट्री में सबसे पहले ICC (आंतरिक शिकायत समिति) के सुरक्षा उपाय भी लागू नहीं करते! इसमें से कौन सी बात आपको समझ नहीं आ रही है? 2019 से, ए.आर. रहमान सर का KM कंज़र्वेटरी और स्टूडियो ही एकमात्र ऐसी जगह है जहाँ एक काम करने वाली ICC मौजूद है। एक महिला ने डबिंग यूनियन में हुए यौन उत्पीड़न के बारे में आवाज़ उठाई - उसे काम करने से बैन कर दिया गया। 5 साल बाद उसे इंसाफ़ मिला। इंडस्ट्री के ये दिग्गज लोग यह बात क्यों नहीं समझते?!

एक्ट्रेस विचित्र ने यौन शोषण और बैन के बारे में बात की, और बताया कि पुलिस के पास जाने के बाद भी उन्हें कोई इंसाफ़ नहीं मिला - और यह बात उन्होंने उसी शो में कही जिसे 'उन्होंने' (कमल हासन ने) होस्ट किया था - तो फिर सभी यूनियनों में मौजूद ताकतवर लोगों ने इस मामले में इंसाफ़ दिलाने के लिए क्या किया है? TV पर आने वाले सिंगिंग शो में हिस्सा लेने वाले ये सभी बच्चे! POCSO यूनिट्स कहाँ हैं?! छी!"

गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने साल 2018 में मीटू मूवमेंट के दौरान गीतकार वैरामुथु पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
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पत्रकारों ने भी इस चयन पर खुलकर अपना विरोध जाहिर किया है. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एस. ललिता ने कहा, " आज #Jnanpith पुरस्कार की सारी गरिमा खत्म हो गई है। कोई #metoo के आरोपी व्यक्ति को इस पुरस्कार के लिए कैसे सोच भी सकता है? चयन समिति पर लानत है। तमिल के बड़े अभिनेताओं पर भी लानत है, जिन्होंने उसकी तारीफ़ में शब्द कहे। एक बार फिर, तुम पर लानत है @Vairamuthu, कई महिलाओं के साथ तुम्हारे पिछले बर्ताव के लिए। अब तुम्हारे कर्मों का फल तुम्हें ज़रूर मिलेगा।"

फ्रंटलाइन की एडिटर वैशना रॉय ने कहा, " वैरामुथु को कब तक बचाया जाता रहेगा? कई महिलाओं ने उनके यौन शोषण, उनकी धमकियों और उनके द्वारा उनके करियर को बर्बाद किए जाने के बारे में खुलकर बात की है। DMK को उनके साथ अपना जुड़ाव खत्म करना चाहिए और उन्हें जवाबदेह ठहराना चाहिए।"

लेखक अनंत नारायण ने भी विरोध में लिखा, " वैरामुथु को मिला ज्ञानपीठ पुरस्कार दो में से एक बात साबित करता है: या तो जूरी उनके 'MeToo' विवाद से पूरी तरह अनजान है, या फिर उन्हें उनकी गलतियों से कोई दिक्कत नहीं है। दोनों ही मामलों में, जूरी ऐसे संवेदनहीन लोगों का समूह लगती है जो बेजान शब्दों का समर्थन करते हैं। अगर इस देश में महिलाओं की गरिमा का कोई भी महत्व है, तो यह पुरस्कार वापस ले लिया जाना चाहिए।"

नोवेस्लिस्ट सुरेश कहते हैं वैरामुथु को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलना दोहरी मार जैसा है। पहला, क्योंकि वह एक यौन-शोषणकर्ता हैं। दूसरा, उनकी रचनाओं में कोई साहित्यिक गुण नहीं है।

पत्रकार TN रघु ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम को टैग करते हुए कहा, " आप तमिलनाडु के नैतिक दिवालियेपन का भी एक उदाहरण हैं। आप लगातार वैरामुथु को एक मंच प्रदान करते हैं। क्या आपने कभी उन लोगों के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया, जो उनके खिलाफ सामने आए थे?"

भारी विरोध के कारण 2021 में वैरामुथु ने लौटाया था ONV अवार्ड

आपको बता दें 2021 में वैरामुथु ने प्रतिष्ठित ONV अवॉर्ड स्वीकार करने से मना कर दिया था। केरल की ONV एकेडमी ने उन्हें अवार्ड के लिए चुना था लेकिन तब भी महिलाओं का भारी विरोध सामने आया, अभिनेता पार्वती थिरुवोथु जैसी कई जानी-मानी हस्तियों और पार्श्व गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने भी ट्विटर पर केरल सरकार के इस फैसले की निंदा की और मांग की कि इस अवॉर्ड को वापस ले लिया जाए। जिसके बाद एकेडमी ने अपने फैसले पर फिर से सोचने की बात कही। एकेडमी के पुन: विचार की घोषणा के अगले दिन वैरामुथु ने यह सम्मान स्वीकार नहीं करने का एलान किया। तब वैरामुथु ने कहा कि " कुछ ऐसे लोगों के दखल की वजह से, जो मुझसे मन में बैर रखते हैं, मुझे पता चला है कि यह घोषणा की गई है कि इस अवॉर्ड पर फिर से विचार किया जा रहा है। मुझे लगता है कि ऐसा कोई भी कदम मुझे और एकेडमी को छोटा दिखाएगा। और, मैं विद्वान जूरी को किसी मुश्किल स्थिति में नहीं डालना चाहता। इसलिए मैं इस सम्मान को स्वीकार करने से बचना चाहता हूँ।"

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