
त्रिवेंद्रम- गुरुवायुर के पूर्व विधायक, निर्माता और निर्देशक पी.टी. कुंजुमुहम्मद पर यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाने वाली प्रोफेशनल डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर आशा अची जोसेफ ने मलयालम अखबार मलयाला मनोरमा में प्रकाशित एक खुल पत्र में अपनी पहचान उजागर की। आशा ने कहा है कि उन्हें 'पीड़िता' (victim), 'सर्वाइवर' (survivor) या 'युवा महिला' जैसे शब्दों से चुप नहीं कराया जा सकता। उन्होंने लिखा है कि "मैं पीड़िता नहीं हूं, मैं आशा हूं" और चुप्पी ने कभी पितृसत्ता को नहीं तोड़ा है। आशा 'वुमन इन सिनेमा कलेक्टिव' (WCC) की एक संस्थापक सदस्य भी हैं।
पी.टी. कुंजुमुहम्मद एक प्रमुख मलयालम फिल्म निर्देशक, निर्माता और पूर्व विधायक हैं। वे 1994 और 1996 में गुरुवायूर सीट से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में (सीपीआई(एम) के समर्थन से) केरल विधानसभा के सदस्य चुने गए थे। उन्होंने 'मग़रिब' जैसी चर्चित फिल्मों का निर्देशन किया है और केरल फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहे हैं। आशा अची जोसेफ के आरोप के अनुसार कुंजुमुहम्मद ने उनके साथ यौनिक उत्पीडन तब किया जब वे केरल स्टेट चलचित्र अकादमी (एक सरकारी सांस्कृतिक संस्थान) में आधिकारिक ड्यूटी पर थीं और कुंजुमुहम्मद ने अपनी स्थिति और शक्ति का दुरुपयोग कर उनके साथ गलत व्यवहार किया।
आशा ने अपने पत्र में विस्तार से बताया कि उन्होंने इस घटना के बाद मुख्यमंत्री को 24 नवंबर को पत्र लिखा, जिसमें पूरी घटना का जिक्र किया। चार दिनों में दो महिला पुलिस अधिकारियों ने उनके घर आकर बयान दर्ज किया और एफआईआर दर्ज करने का वादा किया। अकादमी अधिकारियों ने भी फोन पर सहानुभूति जताई और आरोपी को आईएफएफके (इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरला) से दूर रखने, उनके नाम को जानकारी पुस्तिका से हटाने तथा फिल्म इंडस्ट्री में यौन उत्पीड़न के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का वादा किया। लेकिन 8 दिसंबर को जब यह खबर चैनलों पर आई, तब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी। आशा ने स्थानीय निकाय चुनावों और आईएफएफके के कारण इसमें देरी का संदेह जताया।
आशा साफ़ करती हैं कि हिंसा कोई ग़लतफ़हमी या कोई अकेला गलत काम नहीं है, बल्कि यह किसी ऐसे इंसान का जानबूझकर किया गया काम है जिसे अपनी हैसियत, ताकत और इसके फ़ायदे पता हों। जब 'विक्टिम' और 'सर्वाइवर' जैसे शब्दों का इस्तेमाल खुद को बताने के लिए किया जाता है, तो ऐसा लगता है कि समाज किसी इंसान के बेसिक अधिकारों को भी खत्म करने की कोशिश कर रहा है। आशा यह भी बताती हैं कि यह ओपन लेटर इसलिए है क्योंकि उनका मानना है कि महिलाओं को सुरक्षा के नाम पर चुप नहीं कराया जाना चाहिए। शांति से कभी भी पितृसत्ता नहीं टूटी। आशा कहती हैं कि उन्हें अपने पार्टनर, बेटी और भाई-बहनों को यह घटना बताने में समय लगा, और जब उनकी बेटी ने इसके बारे में सुना तो उसका पहला सवाल यही था कि क्या वह शिकायत दर्ज कराएगी।
उन्होंने बताया कि कई लोगों ने उन्हें 'अपनी सुरक्षा के लिए चुप रहने' की सलाह दी, लेकिन चुप्पी को उन्होंने अपनी गरिमा पर दूसरा हमला माना। आशा ने लिखा कि अगर उनके जैसे पढ़ी-लिखी और जागरूक व्यक्ति के साथ ऐसा होता है, तो हाशिए पर रहने वाली महिलाओं के साथ क्या-क्या अत्याचार हो रहे होंगे। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर पार्वती थिरुवोथ, रिमा कालिंगल, पद्मप्रिया जैसी महिलाओं और कम प्रसिद्ध पत्रकारों को निशाना बनाने का भी आरोप लगाया। आशा ने कहा कि वे इतिहास से मिटाए जाने के लिए तैयार नहीं हैं और सार्वजनिक रूप से बोलकर अन्य महिलाओं के डर को कम करना चाहती हैं।
घटना केरल के इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ केरला (IFFK) 2025 के दौरान हुई, जब आरोपी IFFK के लिए मलयालम फिल्मों के चयन के ज्यूरी चेयरमैन थे। 6 नवंबर 2025 को तिरुवनंतपुरम के एक होटल सूट में आरोपी ने आशा को फिल्म चयन पर चर्चा के बहाने बुलाया। उसके साथ शारीरिक छेड़छाड़ और गलत हरकत की जिसके कारण वह कमरे से भागकर निकली। आशा ने इसे एक सुनियोजित कृत्य बताया, जो अंधेरी गली में नहीं बल्कि प्रगतिशील मूल्यों का दावा करने वाली सरकारी संस्था में हुआ।
उसके बाद आशा ने केरल स्टेट चलचित्र अकादमी के इंटरनल कम्प्लेंट्स कमिटी से संपर्क किया। उसने मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन को शिकायत पत्र भेजा। मुख्यमंत्री ने इसे राज्य पुलिस प्रमुख को फॉरवर्ड किया जिसके बाद 8 दिसंबर 2025 को तिरुवनंतपुरम कैंटनमेंट पुलिस स्टेशन में महिला की गरिमा भंग, यौन उत्पीड़न, अवैध हिरासत, धमकी और ट्रेसपास की धाराओं में FIR दर्ज हुई। 20 दिसंबर को तिरुवनंतपुरम सेशन कोर्ट ने आरोपी को सख्त शर्तों के साथ anticipatory bail दी। 24 दिसंबर को आरोपी पुलिस स्टेशन में पेश हुए, औपचारिक रूप से गिरफ्तार किए गए और उसी दिन अग्रिम जमानत के आधार पर रिहा कर दिए गए। Women in Cinema Collective ने गिरफ्तारी में देरी की आलोचना की।
इस साल जनवरी के अंतिम सप्ताह में पुलिस ने Judicial First Class Magistrate Court III, तिरुवनंतपुरम में चार्जशीट दाखिल की। इसमें 15 गवाह, CCTV फुटेज (महिला के होटल कॉरिडोर से भागने का), महिला का बयान और अन्य सबूत शामिल हैं। पुलिस ने prima facie केस माना और आरोपी के झूठे होने के दावे को खारिज किया। केस कोर्ट में है। Chargesheet दाखिल होने के बाद ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद। कोई नई गिरफ्तारी या सजा नहीं हुई है। आरोपी जमानत पर हैं और जांच में सहयोग करने को कहा गया है।
गौरतलब है कि केरल में महिलाएं अब यौनिक उत्पीडन और रेप मामलों में पीडिता और सर्वाइवर कहलाने की बजाय खुलकर जनता के सामने अपनी बात कहने लगी हैं।
बिशप फ्रैंको मुलक्कल रेप केस की सर्वाइवर सिस्टर रनित ने जनवरी 2026 में नौ साल बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी पहचान उजागर की। 2018 में एक बिशप पर यौन हिंसा का आरोप लगाने वाली देश की पहली नन ने बताया कि फ्रैंको मुलक्कल के बरी होने का फैसला उन्हें गहराई से आहत कर गया, लेकिन न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प अटल है।
इसी तरह भारत की पहली 'कॉन्ट्रैक्ट रेप' सर्वाइवर (उत्तरजीवी) और मलयालम सिनेमा अभिनेत्री भावना भी आठ साल नौ महीने के लंबे कानूनी संघर्ष के बाद खुलकर सामने आईं। सोशल मीडिया के जरिए अभिनेत्री ने अपनी पीड़ा और न्याय की आस को बयां किया। केरल के एर्नाकुलम ट्रायल कोर्ट ने 8 दिसंबर 2025 को फैसला सुनाया था, जिसमें आरोपी नंबर 1 से 6 तक को सजा सुनाई गई, लेकिन कॉन्ट्रैक्ट देने वाले कथित आरोपी अभिनेता दिलीप को साजिश के आरोपों से बरी कर दिया गया। दिलीप की छवि एक जनप्रिय नायक की है और वह मलयालम सिनेमा यानी मौलीवुड में बहुत प्रभाव रखते हैं: वह अभिनेता, प्रोड्यूसर और वितरक संगठनों में सक्रिय सदस्य हैं। 12 दिसबर को ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई जिसके बाद अभिनेत्री ने अपने instagram हैंडल से उक्त स्टेटमेंट जारी किया। इस फैसले पर उन्होंने गहरी निराशा और न्याय प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.