
रांची- झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के 14वें दिन शुक्रवार को विधानसभा की ओर मार्च के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर एक अज्ञात युवक ने काली स्याही फेंक दी। आरोपी को प्रदर्शनकारियों ने पकड़ा और पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
घटना बिरसा चौक के पास हुई, जब जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से निकला छात्र जत्था विधानसभा की ओर बढ़ रहा था। नेहा बोरा दिल्ली से रांची पहुंचकर छात्रों के समर्थन में मार्च का नेतृत्व कर रही थीं। तभी भीड़ में से एक व्यक्ति अचानक निकला और नेहा के चेहरे, गर्दन व कपड़ों पर स्याही फेंक दी। जानकरी के मुताबिक, आसपास मौजूद करीब 20 अन्य महिला प्रदर्शनकारियों पर भी स्याही फेंकी गई।
आरोपी को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया और पिटाई की। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। मीडिया से बात करते हुए आरोपी ने कहा, “मुझे नेहा बोरा पसंद नहीं है। वह उमर खालिद की समर्थक है। ये सब एंटी-नेशनल हैं। मैंने उन पर स्याही फेंकी। मुझे किसी चीज की परवाह नहीं।” कुछ रिपोर्ट्स में आरोपी का नाम अमरनाथ पांडेय बताया गया है। घटना के बाद आरोपी ने ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाए।
नेहा बोरा ने घटना के तुरंत बाद मीडिया और छात्रों को संबोधित करते हुए साफ कहा, “20 जुलाई को दिल्ली में हमारे ऊपर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया। जब हम तब नहीं डरे, तो यह साधारण स्याही हमारा क्या बिगाड़ लेगी?” उन्होंने स्याही लगे कपड़ों में खुद की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “आरएसएस-बीजेपी के गुंडों ने मुझ पर और करीब 20 अन्य महिलाओं पर स्याही फेंकी। उनके लिए स्याही दूसरों को शर्मिंदा करने का औजार है, हम इस स्याही से भविष्य लिखेंगे। मैं इस स्याही को गर्व से पहनती हूं।”
नेहा ने आगे कहा कि जो लोग छात्रों के साथ खड़े होने का दावा करते हैं, वही छात्रों की मांगों को लेकर विधानसभा मार्च कर रहे युवकों पर स्याही फेंक रहे हैं। उन्होंने इसे छात्रों के आंदोलन को दबाने की कोशिश बताया और कहा कि आंदोलन जारी रहेगा।
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया है। आइसा और प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण मार्च पर हमले की निंदा की है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच के बैनर तले चल रहा यह आंदोलन परीक्षाओं में अनियमितताओं, पेपर लीक और बड़े पैमाने पर सुधारों की मांग को लेकर जारी है।
झारखण्ड मुक्ति मोर्चा ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा, " भाजपा का असल चाल, चरित्र और चेहरा। हम इस घटना की कठोरतम शब्दों में भर्त्सना करते हैं। भाजपा को लगातार यह पच नहीं रहा है की - झारखंड में सरकार क्यों छात्रों के साथ खड़ी है ? - क्यों छात्रों पर दिल्ली और पटना की तरह बर्बरता नहीं की जा रही है ? - क्यों छात्रों पर पैलेट गन समेत अन्य हथियार नहीं चल रहे हैं ? क्यों पटना की तरह छात्रों पर AK 47 नहीं चल रही है ?"
इधर स्टूडेंट्स के आंदोलन को लेकर झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा, " मैं और हमारी सरकार झारखंड सहित पूरे देश में छात्रों और युवाओं से जुड़ी समस्याओं के ठोस एवं व्यावहारिक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। रांची में मेरे युवा साथियों के साथ-साथ, राज्य के विभिन्न जिलों में रहने वाले युवाओं और छात्रों के सुझाव भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए सरकार सभी जिलों के छात्र-छात्राओं की राय और सुझाव प्राप्त करेगी, ताकि समाधान व्यापक और समावेशी हो। हम शीघ्र ही राज्य और देशभर के छात्रों, शिक्षाविदों तथा नीति-निर्माताओं के सुझाव एकत्रित कर, समयबद्ध तरीके से आवश्यक सुधारों और सकारात्मक बदलावों की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।
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