
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 3 अक्टूबर को नई दिल्ली इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। इस दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। दिल्ली पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इन शिकायतों को आगे की कार्रवाई के लिए कमला मार्केट स्थित क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है।
यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर किया गया था। इस दौरान सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे और विपक्षी नेताओं ने भी पुलिस के बल प्रयोग की कड़ी निंदा की।
नई दिल्ली जिला पुलिस के अनुसार, इस प्रदर्शन के दौरान एक 'आकस्मिक कानून-व्यवस्था की स्थिति' उत्पन्न हो गई थी, जिसके बीच उन्हें ये शिकायतें मिलीं। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक पोस्ट में स्पष्ट किया कि 03-10-26 को नई दिल्ली क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों द्वारा यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए। पुलिस ने शिकायतें प्राप्त कर ली हैं और इन्हें जांच के लिए कमला मार्केट की क्राइम ब्रांच को भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्राइम ब्रांच इन आरोपों की बारीकी से जांच करेगी और उसी के आधार पर उचित कदम उठाएगी।
राजधानी में यह पूरा प्रदर्शन मतदाता सूचियों के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) से जुड़े आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग के साथ हो रहा था। शनिवार को जब सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पर इकट्ठा होने से रोका, तो आसपास के क्षेत्रों से लगभग 150 लोगों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए प्रमुख चेहरों में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और कपिल सिब्बल, स्वराज इंडिया के संस्थापक योगेंद्र यादव और 'आइसा' (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा शामिल थीं।
आइसा ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिला प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और वकीलों के साथ हाथापाई की। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक पुरुष पुलिस अधिकारी को नेहा बोरा को हिरासत में लेते समय पीछे से पकड़ते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, पुलिस की ओर से अभी तक इन विशिष्ट आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
इन सब के बीच सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने पुलिस पर एक स्वतंत्र पत्रकार के कथित यौन उत्पीड़न को लेकर एसीपी विवेक भगत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से इनकार करने का आरोप लगाया है। दास ने बताया कि उन्होंने और सीजेपी नेता रत्ना सिंह ने पुलिस से संपर्क कर मामला दर्ज करने की मांग की थी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई, तो पत्रकार और प्रदर्शनकारी फिर से पुलिस स्टेशन का घेराव करेंगे।
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने ऐलान किया है कि अगर ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया, तो 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक और बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इससे पहले 2 अक्टूबर को पुलिस की अनुमति न मिलने के बावजूद सीजेपी ने मुंबई के शिवाजी पार्क में एक बड़ा प्रदर्शन किया था, जिसमें हजारों लोग जुटे थे।
दीपके ने दिल्ली के आगामी प्रदर्शन को "जंतर-मंतर 2.0" का नाम देते हुए इसके पूरी तरह शांतिपूर्ण होने का दावा किया है। सीजेपी लगातार एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है, हालांकि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
इन ताजा शिकायतों ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस के रवैये और कार्यप्रणाली को एक बार फिर सीधे तौर पर सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। इससे पहले 2 अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों को लेकर पुलिस ने तीन एफआईआर दर्ज की थीं और जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्राइम ब्रांच इन तीन महिला पत्रकारों की शिकायतों की जांच में आगे क्या ठोस कदम उठाती है।
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