गेट के बाहर करते थे पूजा, 5 दशक बाद अब दलितों को मिली तमिलनाडू के इस मंदिर में एंट्री, जानिये क्या है पूरा मामला

जिला पुलिस अधीक्षक शहनाज के नेतृत्व में पुलिस ने मंदिर का ताला तोड़कर दलित भक्तों को अंदर जाने दिया।
एसपी की मौजूदगी में पुलिस ने मंदिर का ताला तोड़ दिया और अनुसूचित जाति के भक्तों को अंदर ले जाकर पूजा करने की अनुमति दी। इस दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई।
एसपी की मौजूदगी में पुलिस ने मंदिर का ताला तोड़ दिया और अनुसूचित जाति के भक्तों को अंदर ले जाकर पूजा करने की अनुमति दी। इस दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई।साभार- ईटीवी भारत
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कल्लाकुरीची- जिले के चिन्नासेलम संघ के कुराल गांव में स्थित श्री कलियुग श्रीनिवास पेरुमाल मंदिर में अनुसूचित जाति (आदि द्रविड़) समुदाय के भक्तों को लगभग 50 साल बाद प्रवेश की अनुमति मिली है। जिला पुलिस अधीक्षक शहनाज के नेतृत्व में पुलिस ने मंदिर का ताला तोड़कर दलित भक्तों को अंदर जाने दिया। इस दौरान तनाव बढ़ने से बचाने के लिए 50 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए।

3 अक्टूबर को अनुसूचित जाति समुदाय के लोग पूजा सामग्री और तांबूल थाल लेकर मंदिर में दर्शन करने पहुंचे। स्थानीय प्रभावशाली/पिछड़े समुदाय के लोगों ने उन्हें रोक दिया और कहा कि उन्हें मंदिर में जाने की अनुमति नहीं है। दोनों पक्षों में बहस हुई, जिसके बाद विरोधी समुदाय के लोगों ने मंदिर का दरवाजा बंद कर ताला लगा दिया।

इसके बाद दलित समुदाय के लोग शाम तक मंदिर के प्रवेश द्वार पर धरना देकर बैठ गए और अंदर जाने की मांग करते रहे। सूचना मिलते ही कल्लाकुरीची के जिला पुलिस अधीक्षक शहनाज मौके पर पहुंचे। उन्होंने दोनों पक्षों से बातचीत की और स्पष्ट कहा कि मंदिर सभी के लिए है, किसी को प्रवेश से रोका नहीं जा सकता।

बातचीत विफल रहने पर एसपी की मौजूदगी में पुलिस ने मंदिर का ताला तोड़ दिया और अनुसूचित जाति के भक्तों को अंदर ले जाकर पूजा करने की अनुमति दी। इस दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई।

यह मंदिर लगभग 50 साल तक निजी रखरखाव में था। दो साल पहले इसे हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआरएंडसीई) विभाग के अधीन कर लिया गया। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर दलित समुदाय को अंदर जाने से रोका जाता रहा। वे केवल गेट के बाहर ही पूजा कर सकते थे।

कल्लाकुरीची जिले में यह पहली घटना नहीं है। 2023 में जिले के ही एदुथवायनाथम गांव के 200 साल पुराने वरदराज पेरुमाल मंदिर में भी जिला प्रशासन और पुलिस सुरक्षा के साथ अनुसूचित जाति के लोगों को पहली बार अंदर जाने की अनुमति दी गई थी।

घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए कुराल गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मंदिर सार्वजनिक स्थान है और किसी भी समुदाय को प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता।

यह घटना तमिलनाडु में मंदिर प्रवेश के अधिकार और जाति-आधारित भेदभाव के मुद्दे को फिर से चर्चा में लाई है।

एसपी की मौजूदगी में पुलिस ने मंदिर का ताला तोड़ दिया और अनुसूचित जाति के भक्तों को अंदर ले जाकर पूजा करने की अनुमति दी। इस दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई।
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एसपी की मौजूदगी में पुलिस ने मंदिर का ताला तोड़ दिया और अनुसूचित जाति के भक्तों को अंदर ले जाकर पूजा करने की अनुमति दी। इस दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई।
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एसपी की मौजूदगी में पुलिस ने मंदिर का ताला तोड़ दिया और अनुसूचित जाति के भक्तों को अंदर ले जाकर पूजा करने की अनुमति दी। इस दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई।
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एसपी की मौजूदगी में पुलिस ने मंदिर का ताला तोड़ दिया और अनुसूचित जाति के भक्तों को अंदर ले जाकर पूजा करने की अनुमति दी। इस दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच तीखी बहस भी हुई।
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