क्या सिएटल में जाति-आधारित भेदभाव पर ऐतिहासिक कानून लागू कराने वाली क्षमा सावंत अमेरिकी कांग्रेस पहुंच पाएंगी? पढ़िए द मूकनायक को दिया एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

जाति-विरोधी कानून, वीज़ा विवाद और अपनी चुनावी लड़ाई पर खुलकर बोलीं क्षमा सावंत
द मूकनायक को दिए विशेष साक्षात्कार में सावंत ने अमेरिकी राजनीति में अपनी उम्मीदवारी, जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ अपने अभियान, आर्थिक न्याय, आव्रजन नीति और भारत सरकार द्वारा वीज़ा अस्वीकार किए जाने को लेकर अपनी बात रखी।
सावंत ने कहा कि यदि वह अमेरिकी कांग्रेस के लिए निर्वाचित होती हैं तो उनकी प्राथमिकताओं में पूरे अमेरिका में जाति-आधारित भेदभाव पर प्रतिबंध लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर का अभियान शुरू करना शामिल होगा।द मूकनायक
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वॉशिंगटन: अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य के 9वें कांग्रेस डिस्ट्रिक्ट से निर्दलीय समाजवादी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहीं भारतीय मूल की नेता क्षमा सावंत का कहना है कि भारत सरकार ने उनका वीज़ा तीन बार अस्वीकार किया है और उन्हें भारतीय वाणिज्य दूतावास, सिएटल द्वारा बताया गया कि उनका नाम मोदी सरकार की "रिजेक्ट लिस्ट" में है।

द मूकनायक को दिए विशेष साक्षात्कार में सावंत ने अमेरिकी राजनीति में अपनी उम्मीदवारी, जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ अपने अभियान, आर्थिक न्याय, आव्रजन नीति और भारत सरकार द्वारा वीज़ा अस्वीकार किए जाने को लेकर अपनी बात रखी।

'अरबपतियों के हितों का प्रतिनिधित्व करती हैं दोनों प्रमुख पार्टियां'

निर्दलीय समाजवादी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के फैसले पर सावंत ने कहा कि उनके अनुसार अमेरिका की डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियां आम मेहनतकश लोगों के बजाय अरबपतियों और बहु-करोड़पतियों के हितों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

उन्होंने कहा कि युद्ध, महंगाई, जलवायु संकट और आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक बोझ के लिए दोनों दल समान रूप से जिम्मेदार हैं।

सावंत ने अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रेट सांसद एडम स्मिथ की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने गाजा युद्ध के दौरान इज़राइल को सैन्य सहायता देने, संयुक्त राष्ट्र की खाद्य सहायता रोकने, इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (ICE) को वित्तीय सहायता देने और युद्ध उद्योग से जुड़े प्रभावशाली दानदाताओं का समर्थन प्राप्त किया है।

उन्होंने कहा कि उनकी नजर में इज़राइल को सैन्य सहायता, आप्रवासियों के खिलाफ नीतियां और सामाजिक कल्याण में कटौती जैसे मुद्दों पर दोनों प्रमुख दलों की समान जिम्मेदारी रही है।

सावंत ने यह भी कहा कि हालिया जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार बड़ी संख्या में अमेरिकी मतदाता, विशेषकर युवा, दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों से निराश हैं।

सावंत का दावा है कि कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क में      जाति विरोधी कानून लाने के प्रयास इसलिए सफल नहीं हो सके क्योंकि वहां स्वतंत्र जन आंदोलन खड़ा नहीं किया गया।
सावंत का दावा है कि कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क में जाति विरोधी कानून लाने के प्रयास इसलिए सफल नहीं हो सके क्योंकि वहां स्वतंत्र जन आंदोलन खड़ा नहीं किया गया।क्षमा सावंत

सिएटल में अपनी उपलब्धियों को बनाया चुनावी आधार

सावंत ने कहा कि उनका चुनाव अभियान सिएटल सिटी काउंसिल में लगभग एक दशक के दौरान हासिल की गई उपलब्धियों पर आधारित है।

उन्होंने दावा किया कि उनके नेतृत्व में जन आंदोलनों के माध्यम से कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल हुईं, जिनमें शामिल हैं:

1. देश का सबसे अधिक न्यूनतम वेतन, जो महंगाई के अनुसार बढ़ते हुए वर्तमान में 21.30 डॉलर प्रति घंटा है।

2. अमेज़न टैक्स लागू कराना, जिससे उनके अनुसार हर वर्ष सैकड़ों मिलियन डॉलर किफायती आवास के लिए जुटाए जाते हैं।

3. किरायेदारों के अधिकारों को मजबूत करना।

4. गाजा में युद्धविराम के समर्थन में मजबूत नगर परिषद प्रस्ताव पारित कराना।

5. सिएटल में जाति-आधारित भेदभाव पर प्रतिबंध लगाने वाला ऐतिहासिक कानून पारित कराना।

सावंत ने कहा कि ये उपलब्धियां राजनीतिक समझौतों से नहीं बल्कि संगठित जन आंदोलनों के जरिए हासिल की गईं।

सिएटल में जाति-आधारित भेदभाव पर प्रतिबंध कैसे संभव हुआ

सावंत ने कहा कि फरवरी 2023 में सिएटल, दक्षिण एशिया के बाहर जाति-आधारित भेदभाव पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला शहर बना।

उनके अनुसार अमेरिका में भी जाति-आधारित भेदभाव एक गंभीर समस्या है, हालांकि दक्षिण एशियाई समुदाय से बाहर इसके बारे में बहुत कम जानकारी है।

उन्होंने बताया कि इस अभियान की पृष्ठभूमि 2020 में उस समय बनी, जब उनके कार्यालय ने भारत के नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में एक प्रस्ताव पेश किया था।

सावंत के अनुसार प्रारंभ में सिएटल सिटी काउंसिल के कुछ डेमोक्रेट सदस्य इस प्रस्ताव का समर्थन करने के इच्छुक नहीं थे। उन्होंने कहा कि उनके कार्यालय ने दलित, मुस्लिम, हिंदू तथा अन्य समुदायों के लोगों को एकजुट कर बड़े पैमाने पर जनसमर्थन खड़ा किया, जिसके बाद परिषद ने प्रस्ताव पारित किया।

उन्होंने कहा कि यही रणनीति बाद में जाति-आधारित भेदभाव पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून को पारित कराने में भी अपनाई गई।

सावंत का दावा है कि कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क में ऐसे प्रयास इसलिए सफल नहीं हो सके क्योंकि वहां स्वतंत्र जन आंदोलन खड़ा नहीं किया गया।

सावंत ने कहा कि यदि वह कांग्रेस पहुंचती हैं तो सिख अमेरिकियों और कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न को रोकने के लिए विधेयक लाने का प्रयास करेंगी तथा इस्लामोफोबिया के खिलाफ अभियान जारी रखेंगी। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी एडम स्मिथ की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने सिख समुदाय की सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर पर्याप्त पहल नहीं की।
सावंत ने कहा कि उनका अभियान अमेरिका की राजनीति में हिंदुत्व की बढ़ती भूमिका का विरोध जारी रखेगा।
सावंत ने कहा कि उनका अभियान अमेरिका की राजनीति में हिंदुत्व की बढ़ती भूमिका का विरोध जारी रखेगा। क्षमा सावंत

'कांग्रेस पहुंचीं तो राष्ट्रीय स्तर पर जाति-विरोधी कानून लाने की कोशिश करुँगी'

सावंत ने कहा कि यदि वह अमेरिकी कांग्रेस के लिए निर्वाचित होती हैं तो उनकी प्राथमिकताओं में पूरे अमेरिका में जाति-आधारित भेदभाव पर प्रतिबंध लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर का अभियान शुरू करना शामिल होगा।

उन्होंने कहा कि उनका कार्यालय आंबेडकरवादी और जाति-विरोधी आवाज़ों को तकनीकी कंपनियों, विश्वविद्यालयों और कार्यस्थलों में होने वाले भेदभाव के खिलाफ संगठित करने का प्रयास करेगा।

उनके अनुसार केवल विधेयक पेश करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उसके समर्थन में व्यापक जन आंदोलन भी खड़ा करना होगा।

सावंत ने कहा कि उनका अभियान सैन्य खर्च में कटौती कर आवास, शिक्षा और बुनियादी ढांचे पर अधिक सार्वजनिक निवेश की मांग करता है।

उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकताओं में इज़राइल को अमेरिकी सैन्य सहायता समाप्त करना, इज़राइल पर स्थायी हथियार प्रतिबंध लगाना, सार्वभौमिक सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा लागू करना, अमीरों पर अधिक कर लगाना और बड़े पैमाने पर तकनीकी क्षेत्र में हो रही छंटनी का विरोध शामिल है। आप्रवासन के मुद्दे पर उन्होंने ICE को समाप्त करने, डिटेंशन सेंटर बंद करने, निर्वासन रोकने और सभी अवैध प्रवासियों को पूर्ण नागरिकता देने की मांग की।

सावंत ने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बड़े जन आंदोलनों की आवश्यकता होगी।

'मुझे मोदी सरकार की रिजेक्ट लिस्ट में रखा गया है'

साक्षात्कार के दौरान सावंत ने अपने परिवार का भी जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि उनकी बुजुर्ग मां और परिवार के अन्य सदस्य बेंगलुरु में रहते हैं, लेकिन वह उनसे मिलने भारत नहीं जा पा रही हैं।

सावंत ने द मूकनायक से कहा कि भारत सरकार ने उनका वीज़ा तीन बार अस्वीकार किया है।

उनके अनुसार, सिएटल स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने उन्हें बताया कि उनका नाम मोदी सरकार की "रिजेक्ट लिस्ट" में है। सावंत ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की नीतियों की आलोचना करने के कारण राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत सरकार की आलोचना करने वाले अन्य लोगों को भी इसी तरह भारत आने की अनुमति नहीं दी गई है।

सावंत ने कहा कि उनका अभियान अमेरिका की राजनीति में हिंदुत्व की बढ़ती भूमिका का विरोध जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि यदि वह कांग्रेस पहुंचती हैं तो सिख अमेरिकियों और कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न को रोकने के लिए विधेयक लाने का प्रयास करेंगी तथा इस्लामोफोबिया के खिलाफ अभियान जारी रखेंगी। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी एडम स्मिथ की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने सिख समुदाय की सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर पर्याप्त पहल नहीं की।

द मूकनायक को दिए विशेष साक्षात्कार में सावंत ने अमेरिकी राजनीति में अपनी उम्मीदवारी, जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ अपने अभियान, आर्थिक न्याय, आव्रजन नीति और भारत सरकार द्वारा वीज़ा अस्वीकार किए जाने को लेकर अपनी बात रखी।
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द मूकनायक को दिए विशेष साक्षात्कार में सावंत ने अमेरिकी राजनीति में अपनी उम्मीदवारी, जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ अपने अभियान, आर्थिक न्याय, आव्रजन नीति और भारत सरकार द्वारा वीज़ा अस्वीकार किए जाने को लेकर अपनी बात रखी।
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द मूकनायक को दिए विशेष साक्षात्कार में सावंत ने अमेरिकी राजनीति में अपनी उम्मीदवारी, जाति-आधारित भेदभाव के खिलाफ अपने अभियान, आर्थिक न्याय, आव्रजन नीति और भारत सरकार द्वारा वीज़ा अस्वीकार किए जाने को लेकर अपनी बात रखी।
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