
उत्तर प्रदेश: आगरा के सिकंदरा थाने में तैनात तीन उप-निरीक्षकों (सब-इंस्पेक्टर) सहित कुल चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई जिला अदालत द्वारा पुलिस की उस पुनरीक्षण याचिका (रिवीजन पिटीशन) को खारिज करने के बाद की गई है, जिसमें आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के पिछले आदेश को चुनौती दी गई थी। यह पूरा मामला एक वारंट धारक महिला के साथ हिरासत में हुई कथित मारपीट से जुड़ा है।
इस मामले के तार साल 2018 में शाहगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज एक एफआईआर से जुड़े हैं। यह मुकदमा आईपीसी की धारा 147 (दंगा करना), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 427 (शरारत), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत दर्ज किया गया था।
इसी पुराने मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट ने सीमा सिकरवार नाम की महिला के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसके बाद महिला को हिरासत में लिया गया और 5 जून को अदालत में पेश किया गया।
सीमा सिकरवार ने अदालत में आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान रुनकता चौकी प्रभारी नीलेश शर्मा, उप-निरीक्षक सुरजीत सिंह व नेहा और हेड कांस्टेबल सीमा ने उसके साथ बुरी तरह मारपीट की। दूसरी ओर, पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपनी सफाई पेश की। पुलिस का कहना था कि गिरफ्तारी के दौरान महिला ने कानूनी कार्रवाई से बचने और पुलिस पर दबाव बनाने के लिए जानबूझकर सरकारी गाड़ी की सीट पर अपना सिर दे मारा था।
महिला के इन गंभीर आरोपों को देखते हुए अदालत ने उसका मेडिकल परीक्षण कराने का आदेश दिया। अदालती कार्यवाही के दौरान महिला के वकील ने जोरदार दलील दी कि पुलिस हिरासत में उनके मुवक्किल के साथ बेरहमी से मारपीट की गई है। वकील ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट में दर्ज चोटें मारपीट के इस दावे की स्पष्ट रूप से पुष्टि करती हैं।
मेडिकल रिपोर्ट के निष्कर्षों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सीजेएम कोर्ट ने पहले ही सिकंदरा के एसएचओ को आरोपी अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इस आदेश से बचने के लिए पुलिस अधिकारियों ने जिला न्यायाधीश संजय कुमार मलिक की अदालत में एक पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। लेकिन गुरुवार को अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया, जिससे पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।
अदालत के सख्त आदेश के बाद आखिरकार आरोपी नीलेश, सुरजीत, नेहा और सीमा के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 305A (आवासीय घर में चोरी), 324 (शरारत), और 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) के तहत दर्ज की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम पर पुलिस अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। गौरतलब है कि आगरा पुलिस के लिए हिरासत में प्रताड़ना का यह कोई पहला मामला नहीं है। हाल के महीनों में यह तीसरा मौका है जब आगरा पुलिस के जवानों पर ऐसी कार्रवाई हुई है।
इससे पहले पिछले साल दिसंबर में किरावली थाने में एक किसान को प्रताड़ित करने के आरोप में एक एसएचओ सहित तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था। वहीं, जनवरी में एक दूधवाले के साथ हिरासत में मारपीट करने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
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