
कोझीकोड- केरल विधानसभा चुनाव में इतिहास रचते हुए भारतीय संघ मुस्लिम लीग (IUML) की उम्मीदवार एडवोकेट फातिमा ताहिलिया ने पार्टी की पहली महिला विधायक बनने का गौरव हासिल किया है। 34 वर्षीय ताहिलिया ने कोझीकोड जिले के पेराम्ब्रा विधानसभा क्षेत्र में वामपंथी गढ़ में सेंध लगाते हुए वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के संयोजक और पूर्व मंत्री टी.पी. रामकृष्णन को पराजित कर दिया । यह जीत न केवल केरल के चुनावी इतिहास में बल्कि मुस्लिम महिला राजनीति के अधिकार और प्रतिनिधित्व के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो रही है।
पेराम्ब्रा सीट पर 1980 से लगातार सीपीआई (एम) का कब्जा था, वहां इस बार फातिमा ताहिलिया ने पलटवार कर दिया। उन्होंने LDF संयोजक टी.पी. रामकृष्णन को 5,087 मतों के अंतर से हराया। ताहिलिया ने कुल 81,429 वोट हासिल किए, जबकि रामकृष्णन 76,342 वोटों पर ही सिमट गए ।
पेराम्ब्रा में यह जीत और भी अहम हो जाती है क्योंकि पिछले चुनाव (2021) में रामकृष्णन ने यह सीट 22,592 वोटों के भारी अंतर से जीती थी । ताहिलिया ने न सिर्फ यह सीट बचाई बल्कि IUML को उसके इतिहास की पहली महिला विधायक भी दी।
फातिमा ताहिलिया पेशे से अधिवक्ता हैं और कोझीकोड नगर निगम में पार्षद हैं । उनका राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा है। वह IUML की छात्र इकाई मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) के महिला विंग 'हरिता' की संस्थापक अध्यक्ष थीं ।
हालांकि 2021 में हरिता के नेताओं द्वारा वरिष्ठ MSF पदाधिकारियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के बाद ताहिलिया ने पार्टी के भीतर ही इस मुद्दे को उठाया। इसके चलते पार्टी नेतृत्व के साथ उनकी टकराव हुई, जिसके बाद उन्हें MSF के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद से हटा दिया गया और हरिता को भंग कर दिया गया । इस घटना ने उन्हें IUML के भीतर लैंगिक न्याय की सबसे मुखर आवाज़ बना दिया। वर्तमान में वह मुस्लिम यूथ लीग की राज्य सचिव हैं ।
ताहिलिया के नामांकन के बाद से ही चुनावी माहौल गरमाया हुआ था। उनकी पहचान 'हिजाब पहनने वाली युवा मुस्लिम महिला' होने के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर व्यापक साइबर अटैक और आपत्तिजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा ।
मीडिया को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "एक औरत के तौर पर जीने के लिए मेहनत लगती है, और हिजाब में रहने के लिए ज़्यादा मेहनत लगती है। एक औरत होने के नाते, एक मुस्लिम औरत होने के नाते, एक हिजाब पहनने वाली मुस्लिम औरत होने के नाते, मैं यहां तक पहुंचने के लिए पहले ही रुकावटों को पार कर चुकी हूं।"
चुनाव प्रचार के दौरान LDF की ओर से 'कौमिन्टे कुट्टी' (समुदाय की बेटी) जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके उन्हें सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास किया गया। UDF ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से भी की थी । इन सबके बावजूद ताहिलिया ने अपनी जीत को 'केरल के धर्मनिरपेक्ष मानसिकता की जीत' बताया ।
उल्लेखनीय है कि IUML ने इस बार चुनाव मैदान में उतारे गए कुल 27 उम्मीदवारों में सिर्फ दो महिलाओं को टिकट दिया था । फातिमा ताहिलिया के अलावा जयंती राजन कुथुपरम्बा से चुनाव हार गईं । IUML के इतिहास में इससे पहले सिर्फ दो बार ही महिलाओं को टिकट दिया गया था, और वे दोनों चुनाव नहीं जीत पाई थीं ।
2021 के चुनाव में पार्टी ने सिर्फ़ एक महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा था, और उससे पहले 1996 में कोई महिला उम्मीदवार मैदान में उतरी थी। ऐसे में ताहिलिया की जीत और भी अहम हो जाती है क्योंकि IUML एक ऐसी पार्टी है जिसने पहले से चुनावी राजनीति में महिलाओं को कम मौके दिए हैं।
केरल के नतीजों में कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) बहुमत के आंकड़े (71) को पार करते हुए लगभग 99 सीटों के साथ सत्ता में वापसी कर रहा है । IUML ने खुद 27 में से 22 सीटों पर शानदार जीत दर्ज करते हुए UDF की इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है ।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) या सिर्फ़ मुस्लिम लीग, केरल और तमिलनाडु में मौजूद एक मुस्लिम पॉलिटिकल पार्टी है। भारत के बंटवारे के बाद, ऑल-इंडिया मुस्लिम लीग के इंडियन सेगमेंट की पहली काउंसिल 10 मार्च 1948 को मद्रास में हुई थी। पार्टी ने अपना नाम बदलकर 'इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग' रख लिया और 1 सितंबर 1951 को एक नया संविधान अपनाया।
IUML केरल में INC की अगुवाई वाले चुनाव-पूर्व राज्य स्तरीय गठबंधन, विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का एक बड़ा सदस्य है। जब भी केरल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का शासन होता है, तो पार्टी नेताओं को ज़रूरी कैबिनेट मंत्री के तौर पर चुना जाता है। पार्टी की भारतीय संसद में हमेशा एक स्थिर मौजूदगी रही है। लीग को पहली बार 2004 में भारत सरकार में एक मंत्रालय (विदेश राज्य मंत्री) प्राप्त हुआ।
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