IIM बैंगलोर कैंपस में आदिवासी उत्पीड़न: प्रोफेसर और पत्नी का 'कुकी' आया पर अमानवीय सितम! FIR में पुलिस ने नहीं जोड़ी SC/ST एक्ट की धाराएं

मामला दर्ज हुए पाँच दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने आरोपी दंपती को अब तक गिरफ्तार नहीं किया है और न ही IIM बैंगलोर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान ने इतने संगीन आरोपों के बावजूद अपने प्रोफेसर के विरुद्ध कोई कठोर कार्रवाई की है।
मई 4 को जुल्म की इन्तहा हो गयी जब उसे किडनी स्टोन का दर्द उठा लेकिन उसका दवा देने की बजाय दोनों ने उसे कमरे में भूखे प्यासे बंद कर दिया।
मई 4 को जुल्म की इन्तहा हो गयी जब उसे किडनी स्टोन का दर्द उठा लेकिन उसका दवा देने की बजाय दोनों ने उसे कमरे में भूखे प्यासे बंद कर दिया। ग्राफिक- आसिफ निसार/द मूकनायक
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बेंगलुरु- भारतीय प्रबंधन संस्थान बैंगलोर यानी IIM-B एक बार फिर गहरे विवाद में घिर गया है। 2024 में एक दलित प्रोफेसर के साथ जातिगत भेदभाव के मामले में IIM बैंगलोर के तत्कालीन निदेशक और सात अन्य प्रोफेसरों के विरुद्ध माइको लेआउट पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था जो वर्तमान में उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अब उसी संस्थान के एकअन्य प्रोफेसर और उनकी पत्नी पर उनके घर में बतौर आया काम करने वाली मणिपुर की चुराचांदपुर निवासी एक 23 वर्षीय आदिवासी युवती ने उत्पीड़न के अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं।

युवती ने माइको लेआउट पुलिस थाने में दर्ज कराई अपनी रिपोर्ट में बताया कि IIM-B के प्रोफेसर अमर सप्रा और उनकी पत्नी अंशु सप्रा उसे भूखा-प्यासा रखते थे, भरपेट भोजन नहीं देते थे और बीमारी में काम करने में असमर्थ होने पर उसके साथ अमानवीय प्रताड़ना करते थे। मामला दर्ज हुए पाँच दिन से अधिक बीत जाने के बावजूद पुलिस ने आरोपी दंपती को अब तक गिरफ्तार नहीं किया है और न ही IIM बैंगलोर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान ने इतने संगीन आरोपों के बावजूद अपने प्रोफेसर के विरुद्ध कोई कठोर कार्रवाई की है।

अमर सपरा IIMB के प्रोडक्शन और ऑपरेशन मैनेजमेंट डिपार्टमेंट में फैकल्टी मेंबर हैं, और उनकी पत्नी अंशु कैंपस में एक नर्सरी स्कूल की फ्रेंचाइजी चलाती हैं। FIR में घटना की जगह IIMB कैंपस, बिलेकाहल्ली दर्ज है।

मामला मणिपुर के चुराचांदपुर जिले की रहने वाली नैना (बदला हुआ नाम) से जुड़ा है, जो वर्ष 2019 में एक प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से प्रोफेसर अमर सप्रा के परिवार में बेबीसिटर के रूप में काम करने बेंगलुरु आई थी। शुरुआत में सब सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे घर का माहौल बदलता गया और नैना के लिए यह परिसर किसी यातनागृह से कम नहीं रह गया। 2021 के बाद से प्रोफेसर और उनकी पत्नी का व्यवहार बहुत खराब हो गया, उसे सुबह 6:30 बजे से लेकर आधी रात के बाद तक काम करना पड़ता था। बीमार पड़ने पर न दवा मिलती थी, न आराम, बस काम करते रहने का दबाव बना रहता था। उसका मोबाइल फोन छीन लिया गया था, परिवार से बात करने पर पाबंदी थी और कैंपस से बाहर निकलने की भी अनुमति नहीं थी।

द मूकनायक से बात करते हुए नैना ने बताया कि प्रोफेसर अमर सप्रा की तुलना में उनकी पत्नी अंशु का व्यवहार कहीं अधिक क्रूर था। अंशु उसके बाल खींचती थीं, बार-बार मारती थीं और दूसरों से बात करते वक्त भी उसे थप्पड़ मार देती थीं। एफआईआर के अनुसार, 15 अप्रैल को रात करीब 2:30 बजे अंशु ने नैना के बाल खींचकर उसे कई बार मारा। नैना ने कहा, "मैंने डर के कारण किसी को कुछ नहीं बताया। वे मेरे फोन के मेसेज जाँचते थे और बाहर न जाने दें इसलिए बंद कर देते थे।" पिछले साल अपने पिता के निधन पर वह आखिरीबार घर गई थी, उसके बाद से वह अपने परिवार से मिल भी नहीं सकी।

मई 4 को जुल्म की इन्तहा हो गयी जब उसे किडनी स्टोन का दर्द उठा लेकिन उसका दवा देने की बजाय दोनों ने उसे कमरे में भूखे प्यासे बंद कर दिया। नैना ने बताया कि किडनी स्टोन की वजह से उसे बहुत तेज़ दर्द हुआ। जब उसने अंशु को बताया तो उसने उस पर “एक्टिंग” और “ड्रामा करने” का आरोप लगाया गया। उस समय, वह अपनी माँ से फ़ोन पर बात कर रही थी। नैना ने कहा, “अंशु ने मेरा फ़ोन ले लिया, मेरी कज़िन ने फ़ोन किया, और मैंने उससे मैडम से बात करने को कहा। मुझे नहीं पता कि उन्होंने क्या बात की। उसके बाद अंशु मुझ पर झूठ बोलने का आरोप लगाती रही।”

किसी तरह अपनी जान बचाकर वह पड़ोस में रहने वाले एक प्रोफेसर के घर पहुंची और मदद मांगी, उन्होंने नैना की हालत देखकर उसे खाना खिलाया, आश्रय दिया और अपना फोन इस्तेमाल करने दिया। नैना ने अपने परिजनों को सूचना दी और परिजनों ने कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन बैंगलोर यानी KSOB को खबर दी। अगले दिन सुबह KSOB की मदद से माइको लेआउट थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने IIM-B प्रशासन के साथ समन्वय किया, संस्थान के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के साथ बैठक हुई और नैना को सुरक्षित निकाला गया। उसकी बकाया मजदूरी का पूरा भुगतान भी कराया गया।

6 मई को एफआईआर दर्ज होने के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं और समुदाय के नेताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। पुलिस ने मामला केवल BNS की धारा 115(2) यानी स्वेच्छा से चोट पहुँचाना और धारा 127(2) यानी गलत तरीके से कैद करने के तहत दर्ज किया।

नैना ने बताया कि मजदूरी के मामले में भी उसके साथ धोखा हुआ। उसका अनुबंध 18,000 रुपये प्रति माह का था, लेकिन अप्रैल में उसे यह कहकर कि उसने पर्याप्त दिन काम नहीं किया, केवल 10,000 रुपये दिए गए। इसके अलावा 5,000 रुपये प्लेसमेंट एजेंसी को दिए जाने का हवाला दिया गया। जब नैना ने एजेंसी से संपर्क किया तो उन्होंने पल्ला झाड़ लिया। KSOB अध्यक्ष सेइलालमुओन हाओकिप ने खुलासा किया कि एजेंसी नैना की जानकारी के बिना नियोक्ताओं से चुपचाप फीस वसूलती रही।

6 मई को एफआईआर दर्ज होने के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं और समुदाय के नेताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। पुलिस ने मामला केवल BNS की धारा 115(2) यानी स्वेच्छा से चोट पहुँचाना और धारा 127(2) यानी गलत तरीके से कैद करने के तहत दर्ज किया। अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी SC/ST एट्रोसिटी एक्ट और महिला उत्पीड़न से संबंधित धाराएँ जानबूझकर छोड़ दी गईं, सामाजिक संगठनों का आरोप है कि यह चूक नहीं बल्कि आरोपियों को कड़ी कानूनी कार्रवाई से बचाने की सोची-समझी कोशिश है।

मई 4 को जुल्म की इन्तहा हो गयी जब उसे किडनी स्टोन का दर्द उठा लेकिन उसका दवा देने की बजाय दोनों ने उसे कमरे में भूखे प्यासे बंद कर दिया।
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पुलिस ने पीडिता को स्पॉट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया

रविवार को KSOB अध्यक्ष हाओकिप और नैना एक बार फिर थाने पहुँचे। पुलिस वालों ने बताया कि आरोपियों को नोटिस जारी किया गया है और यदि वे 10 से 15 दिनों के भीतर दो नोटिस के बाद भी सहयोग नहीं करते तो गिरफ्तारी होगी। साथ ही 11 मई को दोपहर 2 बजे कैंपस में स्पॉट वेरिफिकेशन की बात भी कही गई।

तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी नैना अपने परिवार की अकेली कमाने वाली सदस्य है और अपनी माँ और छोटे भाई-बहनों को सपोर्ट करने की ज़िम्मेदारी उसके कधों पर है।

रोते हुए नैना कहती है, "मैंने दसवी तक पढ़ाई की लेकिन फ़ाइनल एग्ज़ाम नहीं दे पाई, इसलिए मेरे पास सेकेंडरी सर्टिफ़िकेट नहीं है। मुझे नहीं पता कि अगर मैं घर लौटी तो क्या करूँगी। मुझे अपने परिवार का ध्यान रखना है, इसलिए मैं बैंगलोर में ही रहना चाहती हूँ और एक अच्छा घर ढूँढना चाहती हूँ जहाँ मैं बिना किसी डर और टॉर्चर के काम कर सकूँ।"

हाओकिप ने कहा कि नैना को दूसरा रोज़गार दिलाने में मदद के लिए कोई NGO या वेलफ़ेयर ऑर्गनाइज़ेशन आगे नहीं आया है। KSOB, जिसने उसकी तरफ़ से FIR दर्ज की थी और मदद दे रहा है, उसके पास कोई डेडिकेटेड फ़ंडिंग नहीं है। उन्होंने कहा, "वह अभी तय नहीं कर पा रही थी कि क्या करे। हमने उससे कहा कि अगर उसे और मदद की ज़रूरत पड़ी तो हम उसकी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे, हालाँकि KSOB के पास कोई फ़ंडिंग या इनकम का सोर्स नहीं है।" इधर नैना वर्तमान में अपने किसी रिश्तेदार के घर में आश्रय लिए हुए है और उसकी 13 मई को चुराचांदपुर वापसी की टिकट है। कुकी स्टूडेंट्स संगठन का कहना है कि यदि नैना वापस चली जाती है तो इस मामले में आरोपियों को बचने का मौक़ा मिल जाएगा।

द मूकनायक द्वारा इस मामले में IIM-B के कार्यवाहक निदेशक प्रो. यू. दिनेश कुमार से आरोपी प्रोफेसर अमर सप्रा के विरुद्ध आंतरिक कार्रवाई को लेकर ईमेल किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं प्राप्त हुआ। द मूकनायक ने प्रो. अमर सप्रा और अंशु सप्रा को भी ईमेल भेजा लेकिन दोनों की तरफ से कोई सफाई या स्पष्टीकरण नही दिया गया। उधर एक अंग्रेजी अखबार को दिए स्टेटमेंट में IIM-B प्रशासन ने कहा कि संस्थान ने पीड़िता को आवश्यक सहायता दी, "हालाँकि वह संस्थान के ठेकेदारों के माध्यम से नियोजित नहीं थी। हम कानून, उचित प्रक्रिया और सही काम करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं।" लेकिन यह बयान तब खोखला लगता है जब संस्थान के परिसर में छह साल तक एक आदिवासी युवती पर अत्याचार होता रहा और संस्थान को खबर तक न हुई या फिर खबर थी लेकिन आँखें मूँद ली।

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