
उदयपुर- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की पूर्व पोलित ब्यूरो सदस्य एवं पूर्व सांसद बृंदा करात ने उदयपुर में प्रेस वार्ता के दौरान कई मुद्दों पर तीखे हमले बोले। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने और जिम्मेदार पदाधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई। बृंदा करात ने कहा कि राम जी के मंदिर में 200 करोड़ रुपए, सोना-चांदी आदि का महाघोटाला हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक वाहन चालक और क्लर्क जैसे लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कर लीपापोती की जा रही है, जबकि ट्रस्ट के अध्यक्ष, सचिव और अन्य पदाधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
उन्होंने पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह इस पूरे मामले पर चुप क्यों हैं? करात ने आरोप लगाया कि भाजपा राम मंदिर के नाम पर सत्ता में आई, लेकिन इतना बड़ा घोटाला होने पर प्रधानमंत्री जिम्मेदारी क्यों नहीं लेते?
करात ने राजस्थान में वन अधिकार कानून की हत्या किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को उनकी जमीन के पट्टे नहीं दिए जा रहे हैं। उदयपुर में आदिवासियों द्वारा प्रस्तुत 22,000 से अधिक दावों में से मात्र 43 प्रतिशत दावों पर ही कार्रवाई हुई है। उन्होंने आदिवासियों को न्याय दिलाने के लिए जल्द ही बड़ा आंदोलन चलाने की घोषणा की।
करात ने मनरेगा योजना को पुनः प्रभावी ढंग से लागू करने, ग्रामीणों को 125 दिन रोजगार देने और पूरा खर्च केंद्र सरकार द्वारा उठाने की मांग की। उन्होंने बताया कि रविवार को ग्रामीण क्षेत्र में मनरेगा कार्यस्थल का दौरा किया, जहां मजदूर सुबह से 4 घंटे बैठे रहे लेकिन इंटरनेट न चलने के कारण उनकी हाजिरी नहीं लग पाई और बिना मजदूरी के उन्हें वापस जाना पड़ा।
बारापाल गांव के मनरेगा कार्यस्थल पर महिला श्रमिकों ने करात को बताया कि पिछले छह महीनों में उन्हें केवल 18 दिन का ही काम मिला है। महिलाएं सुबह 6:30 बजे से कार्यस्थल पर मौजूद थीं, लेकिन सुबह 10 बजे तक काम शुरू नहीं हो पाया। मेट (कार्य प्रभारी) ने बताया कि सरकारी सर्वर बंद था और हाजिरी ऑनलाइन दर्ज न होने तक काम शुरू नहीं किया जा सकता। करात ने सवाल उठाया - "क्या आदिवासी महिलाओं के समय की कोई कीमत नहीं है?"
करात ने भारत सरकार की विदेश नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि यह अमेरिका और इजरायल की पिछलग्गू बनकर रह गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इजरायल को 'फादरलैंड' कहने को बेहद शर्मनाक बताया। ग्रेट निकोबार द्वीप पर करोड़ों पेड़ काटकर अदानी को जमीन देने के फैसले पर उन्होंने कहा कि इससे वहां की जैव विविधता नष्ट हो जाएगी।
करात ने कहा कि "ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा" कहकर सत्ता में आई भाजपा पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूबी है। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा रिश्तेदारों को 168 एकड़ जमीन बांटने और एक केंद्रीय मंत्री को करोड़ों की सब्सिडी मिलने का आरोप लगाया। NEET के पीड़ित छात्रों के साथ पार्टी के समर्थन और जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का भी उन्होंने समर्थन किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में माकपा जिला सचिव एडवोकेट राजेश सिंह ने पत्रकारों का स्वागत किया। इस अवसर पर निर्माण मजदूर एकता यूनियन के अध्यक्ष शमशेर खान, आदिवासी जनाधिकार एका मंच के सचिव श्रवण तथा वरिष्ठ पत्रकार प्रोफेसर हेमेंद्र चंडालिया उपस्थित रहे।
द मूकनायक की प्रीमियम और चुनिंदा खबरें अब द मूकनायक के न्यूज़ एप्प पर पढ़ें। Google Play Store से न्यूज़ एप्प इंस्टाल करने के लिए यहां क्लिक करें.
‘द मूकनायक’ जनवादी पत्रकारिता करता है. यह संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर चलने वाला मीडिया समूह है. अगर आप भी चाहते हैं कि ‘द मूकनायक’ हमेशा हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बुलंद करता रहे, बेजुबानों की पीड़ा दिखाते रहे तो सपोर्ट करें.
यहां सपोर्ट करें