
नई दिल्ली: मणिपुर में एक बार फिर हिंसा और तनाव का माहौल गरमा गया है। करीब एक महीने पहले अगवा किए गए छह नगा पुरुषों के शव बरामद होने के अगले ही दिन, भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित एक कुकी-ज़ो गांव में ताजा झड़पें हुईं। इस नए हिंसक घटनाक्रम में दो लोगों की जान चली गई है, जिससे पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
संयुक्त सुरक्षा बलों ने बुधवार शाम को जानकारी दी थी कि उन्होंने तलाशी अभियान के दौरान छह शव बरामद किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, ये शव उन नगा नागरिकों के माने जा रहे हैं जिन्हें बीते 13 मई को अगवा कर लिया गया था। सुरक्षा एजेंसियां पिछले चार हफ्तों से लगातार इन लापता पुरुषों की तलाश में जुटी हुई थीं।
इस बरामदगी से ठीक एक दिन पहले नगा संगठनों ने सेनापति जिले में बंधक बनाए गए 14 कुकी पुरुषों को रिहा किया था। नगा समूहों ने इन लोगों की रिहाई के बदले प्रशासन के सामने अपने अगवा किए गए छह साथियों को जल्द से जल्द ढूंढने और उन्हें वापस सौंपने की मांग रखी थी।
बुधवार देर रात जैसे ही शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए राज्य की राजधानी इंफाल ले जाने की खबर फैली, वहां लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। गुरुवार तड़के करीब 2 बजे जब शवों को इंफाल ईस्ट स्थित जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (JNIMS) लाया गया, तो अस्पताल परिसर में भारी भीड़ जमा हो चुकी थी।
मृतकों के परिजनों और नगा नागरिक समाज के संगठनों की मौजूदगी के कारण अस्पताल के बाहर माहौल बेहद संवेदनशील हो गया। वहां मौजूद लोगों के बढ़ते आक्रोश को काबू में करने और स्थिति को संभालने के लिए तैनात सुरक्षा बलों को आधी रात के वक्त आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा।
इसके कुछ ही घंटों बाद, गुरुवार सुबह करीब 4 बजे कामजोंग जिले में स्थित कुलतुह गांव पर हमले की खबर आई। भारत-म्यांमार सीमा के निकट बसे इस छोटे से कुकी-ज़ो बहुल गांव में हमलावरों ने जमकर उत्पात मचाया। इस हमले में दो ग्रामीणों की मौत हो गई, जबकि कम से कम छह घरों को आग के हवाले कर दिया गया।
स्थानीय कुकी-ज़ो संगठनों ने इस हिंसक वारदात में मारे गए दोनों व्यक्तियों की पहचान सार्वजनिक की है। मृतकों में कुलतुह चर्च के मुख्य डीकन लेटमिनलुन हाओकिप और उसी चर्च के यूथ चेयरमैन लुनमिनथांग हाओकिप शामिल हैं। इस ताजा घटना के बाद से प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है।
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