मणिपुर: अपहृत 6 नागा लोगों की हत्या से भारी तनाव, डिप्टी सीएम की बर्खास्तगी की मांग पर अड़ा यूएनसी, 24 घंटे का बंद

मणिपुर के कांगपोकपी में 6 अपहृत नागाओं के क्षत-विक्षत शव मिलने से तनाव चरम पर, आक्रोशित यूएनसी ने की डिप्टी सीएम नेमचा किपगेन की तत्काल बर्खास्तगी की मांग।
Naga men killed in Manipur
मणिपुर में 6 अपहृत नागाओं के शव बरामद होने से भारी आक्रोश। यूएनसी ने 24 घंटे का बंद बुलाकर डिप्टी सीएम को हटाने की मांग की।
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नई दिल्ली: मणिपुर के कांगपोकपी जिले में 13 मई से लापता छह नागा लोगों के शव बुधवार, 10 जून को बरामद कर लिए गए हैं। आरोप है कि कुकी सशस्त्र समूहों ने इनका अपहरण किया था। इस दर्दनाक घटना के बाद से राज्य में तनाव का माहौल गहरा गया है।

The Hindi के हवाले से, मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मुकेश सिंह ने जानकारी दी कि मणिपुर पुलिस, असम राइफल्स और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की लगभग 15 टीमों ने 24 घंटे तक गहन तलाशी अभियान चलाया। इस अथक प्रयास के बाद ही सुरक्षाबलों को लापता लोगों के शव खोजने में कामयाबी मिली। डीजीपी ने बताया कि फिलहाल आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

पुलिस के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, माना जा रहा है कि ये मृतक वही लोग हैं जिन्हें लीलोन वैफेई गांव से बंधक बनाकर ले जाया गया था।

इस दुखद घटना के बाद मणिपुर में नागाओं के शीर्ष संगठन यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने नागा बहुल इलाकों में 24 घंटे के पूर्ण बंद का ऐलान किया है। इसके साथ ही संगठन ने मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को उनके पद से तत्काल हटाने की सख्त मांग की है।

यूएनसी का आरोप है कि नेमचा किपगेन कुकी नेशनल फ्रंट-पी (केएनएफ-पी) के अध्यक्ष सेमटिनथांग किपगेन की पत्नी हैं। केएनएफ-पी एक कुकी विद्रोही गुट है जिसका सरकार के साथ 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस' (एसओओ) समझौता लागू है। नागा संगठन को शक है कि इन निर्दोष नागरिकों की हत्या में इस विद्रोही गुट की भी मिलीभगत है। इसके अलावा, संगठन ने लीलोन वैफेई गांव के निवासियों पर भी अपहरण में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया है।

गौरतलब है कि 13 मई को कांगपोकपी में ही एक घात लगाकर किए गए हमले में थाडौ जनजाति के तीन चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई थी। इसी घटना के बाद दो पादरियों समेत इन छह नागा लोगों और उनके परिवार वालों का अपहरण कर लिया गया था। हालांकि, बाद में महिलाओं और बच्चों सहित बारह लोगों को रिहा कर दिया गया था।

रिपोर्टों के अनुसार, कांगपोकपी और सेनापति जिलों में कुकी और नागा समूहों द्वारा कम से कम 44 नागरिकों को बंधक बनाया गया था। इनमें से कई लोगों को पहले ही छोड़ दिया गया था। मंगलवार को बंदी बनाए गए कुकी समुदाय के 14 सदस्यों को भी रिहा कर दिया गया, लेकिन बुधवार को सुरक्षा बलों को लापता छह नागा लोगों के शव ही मिल सके।

यूएनसी ने दावा किया है कि बरामद किए गए शव बेहद क्षत-विक्षत अवस्था में हैं। संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे शवों को स्वीकार नहीं करेंगे। संगठन का कहना है कि इस त्रासदी ने नागा समुदाय को गहरा दर्द दिया है और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सरकार की क्षमता पर से उनका विश्वास उठ गया है। इसे नागा लोगों की सामूहिक पहचान और सुरक्षा को सीधी चुनौती बताते हुए यूएनसी ने सभी कुकी विद्रोही गुटों के साथ एसओओ समझौता रद्द करने की मांग उठाई है।

मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने इस पूरी घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगमा ने एक दिन पहले ही नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो और विभिन्न चर्च संगठनों के साथ मिलकर सेनापति जिले से 14 कुकी बंधकों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित की थी। उन्होंने इस हिंसक कृत्य को बेहद विचलित करने वाला और पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है।

मुख्यमंत्री संगमा ने कहा कि यह त्रासदी इसलिए और भी हृदयविदारक है क्योंकि यह घटना तब हुई जब यूएनसी बातचीत, सुलह और शांतिपूर्ण जुड़ाव के लिए सकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास कर रहा था। विश्वास कायम करने की इस पहल का जवाब हिंसा से दिया गया, जिससे निर्दोष लोगों की जान चली गई और उनके परिवारों को अपार दुख सहना पड़ रहा है।

अपने बयान के अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थायी शांति केवल आपसी सम्मान, बातचीत और हिंसा के बजाय शांतिपूर्ण तरीकों से मतभेदों को सुलझाने की दृढ़ प्रतिबद्धता के जरिए ही स्थापित की जा सकती है।

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