CCSU मेरठ में जातिगत भेदभाव: फॉर्म और फीस भरने के बावजूद दलित छात्र को एडमिशन नहीं, अब NCSC ने भेजा नोटिस

शिकायतकर्ता मयंक कुमार वर्मा ने आयोग को दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि वर्ष 2021 में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान उनके साथ जातिगत भेदभाव किया गया।
शिकायतकर्ता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की निष्पक्ष जांच से मामले के तथ्यों को सामने लाने और न्याय सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
शिकायतकर्ता मयंक कुमार वर्मा ने वर्ष 2021 में CCSU मेरठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में अपने साथ जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न तथा शिक्षा से वंचित किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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मेरठ- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने मेरठ निवासी एक दलित स्टूडेंट मयंक कुमार वर्मा द्वारा प्रस्तुत शिकायत पर संज्ञान लेते हुए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU), मेरठ के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया है।

आयोग द्वारा 11 जून को जारी नोटिस में कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने वर्ष 2021 में CCSU मेरठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में अपने साथ जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न तथा शिक्षा से वंचित किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। आयोग ने शिकायत को अनुसूचित जातियों के अधिकारों से जुड़े विषय के रूप में स्वीकार करते हुए मामले की जांच प्रारंभ की है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया है कि नोटिस प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर शिकायत में लगाए गए आरोपों, मामले की वर्तमान स्थिति तथा अब तक की गई कार्रवाई से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध कराई जाए।

आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में उत्तर प्राप्त नहीं होता है, तो संविधान के अनुच्छेद 338 के अंतर्गत प्राप्त शक्तियों का उपयोग करते हुए आयोग आवश्यक कार्रवाई कर सकता है तथा संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अथवा प्रतिनिधि के माध्यम से उपस्थित होने के लिए समन भी जारी कर सकता है।

गौरतलब है कि शिकायतकर्ता मयंक कुमार वर्मा ने आयोग को दी गई शिकायत में आरोप लगाया है कि वर्ष 2021 में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में प्रवेश प्रक्रिया के दौरान उनके साथ जातिगत भेदभाव किया गया। शिकायत के अनुसार, सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने एवं प्रवेश शुल्क जमा कराने के बावजूद उनका प्रवेश विश्वविद्यालय पोर्टल पर लॉक नहीं किया गया।

उन्हें कुछ समय तक नियमित रूप से कक्षाओं में बैठने दिया गया, लेकिन उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं की गई। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विभाग के कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा उनके प्रति भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया गया तथा जातिसूचक टिप्पणियां की गईं। बाद में उन पर दबाव बनाकर प्रवेश वापस लेने संबंधी आवेदन लिखवाया गया और जमा की गई फीस उनके बैंक खाते में वापस कर दी गई।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा। उन्होंने आयोग को बताया है कि मामले से संबंधित दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, ई-मेल पत्राचार, ऑडियो रिकॉर्डिंग एवं अन्य साक्ष्य उनके पास उपलब्ध हैं, जिन्हें आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।

शिकायतकर्ता मयंक कुमार वर्मा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की निष्पक्ष जांच से मामले के तथ्यों को सामने लाने और न्याय सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।

शिकायतकर्ता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की निष्पक्ष जांच से मामले के तथ्यों को सामने लाने और न्याय सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
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शिकायतकर्ता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की निष्पक्ष जांच से मामले के तथ्यों को सामने लाने और न्याय सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
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शिकायतकर्ता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की निष्पक्ष जांच से मामले के तथ्यों को सामने लाने और न्याय सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
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