मझगवां-रुंझ बांध प्रभावितों के हक में 200 से ज़्यादा नागरिक संगठनों की आवाज़, पुलिस हिंसा और गिरफ्तारियों की निंदा

आदिवासी हक़, न्यायपूर्ण पुनर्वास और कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग
आदिवासी समुदायों पर पुलिस हिंसा के खिलाफ़ कार्रवाई और गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग
आदिवासी समुदायों पर पुलिस हिंसा के खिलाफ़ कार्रवाई और गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग
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केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित समुदायों के ‘चिता आंदोलन' के 25 दिन पूरे होने पर, भारत भर से 200 से ज़्यादा चिंतित नागरिकों व जन-संगठनों ने NHRC, NCST, केंद्र सरकार और मध्य प्रदेश सरकार को पत्र लिखा। उन्होंने आदिवासी समुदायों पर पुलिस हिंसा के खिलाफ़ कार्रवाई और मझगवां व रुंझ बांध से प्रभावित लोगों के उचित और न्यायपूर्ण पुनर्वास की मांग की। यह संघर्ष इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मझगवां बांध से प्रभावित कुछ इलाकों में जल-स्तर बढ़ रहा है, जिससे आदिवासी ग्रामीणों के घर और खेत डूब रहे हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने नाराज़गी जताई कि विरोध कर रहे समुदायों की जायज़ शिकायतों को संवाद से सुलझाने के बजाय, प्रशासन ने सितंबर के आखिरी हफ्ते में आदिवासी महिलाओं और पुरुषों पर पुलिस हिंसा की और 'जय किसान संगठन' के अमित भटनागर, दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत समेत कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया।

विरोध कर रहे समुदायों की जायज़ शिकायतों को संवाद से सुलझाने के बजाय, प्रशासन ने सितंबर के आखिरी हफ्ते में आदिवासी महिलाओं और पुरुषों पर पुलिस हिंसा की और 'जय किसान संगठन' के अमित भटनागर, दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत समेत कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया।
विरोध कर रहे समुदायों की जायज़ शिकायतों को संवाद से सुलझाने के बजाय, प्रशासन ने सितंबर के आखिरी हफ्ते में आदिवासी महिलाओं और पुरुषों पर पुलिस हिंसा की और 'जय किसान संगठन' के अमित भटनागर, दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत समेत कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया।

हस्ताक्षरकर्ताओं ने लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की जो बिना दबे अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं, और अमित भटनागर को लेकर चिंता जताई, जिनकी राज्य-हिरासत में भूख हड़ताल के 8 दिन पूरे हो गए हैं। उन्होंने अधिकारियों से केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से प्रभावित सभी छोटे किसानों और आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया ताकि उनकी आवाज़ और भविष्य डूब न जाएं। यह पत्र राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्षों के साथ-साथ, केंद्रीय जनजातीय और जल संसाधन मंत्रियों, मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री और MP के जल संसाधन मंत्री को भेजा गया, जिनमें कानूनी और संवैधानिक अधिकारों के पालन की मांग की गई।

 मझगवां और रुंझ बांध से प्रभावित लोगों का न्यायपूर्ण पुनर्वास हो !
मझगवां और रुंझ बांध से प्रभावित लोगों का न्यायपूर्ण पुनर्वास हो !

हस्ताक्षर करने वालों में जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, वकील, पर्यावरणविद, शोधकर्ता शामिल हैं, जैसे: प्रो. रूप रेखा वर्मा, प्रो. भंग्या भुक्या, मेधा पाटकर, प्रफुल्ल सामंतरा, आशीष कोठारी, सौम्या दत्ता, जॉन दयाल, शबनम हाशमी, सुधीर वोम्बटकेरे, डॉ. के. बाबू राव, डॉ. गैब्रिएल डिट्रिच, डॉ. आदित्य निगम, सेड्रिक प्रकाश, दीपक ढोलकिया, नीलम अहलूवालिया, राजकुमार सिन्हा, अफलातून, राजेश रामकृष्णन, चित्तरूपा पालित, कैलाश मीणा, छाया दातार, अम्मू अब्राहम, श्रीपाद धर्माधिकारी, अरुंधति धुरू, डॉ. नवशरण सिंह, डॉ. सागरी रामदास, डॉ. सुहास कोल्हेकर, सिंथिया स्टीफन, सुजाता गोथोस्कर, अभिजीत प्रभुदेसाई, कल्याणी मेनन सेन, हसीना खान, चयनिका शाह, थॉमस फ्रेंको, अनमोल ओहरी, एडवोकेट मिनी मैथ्यू, एडवोकेट निकिता सोनावाने, एडवोकेट प्योली स्वातिजा, एडवोकेट शालिनी गेरा, मानशी अशर, एसपी रवि, निशा बिस्वास, सुजाता मधोक, प्रीति संपत, ईश्वर, प्रियदर्शिनी, मीरा संघमित्रा और कई संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले अन्य लोग।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों पर पुलिस की कार्रवाई और पुनर्वास प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जांच की मांग
शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों पर पुलिस की कार्रवाई और पुनर्वास प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जांच की मांग

हस्ताक्षर करने वालों की मुख्य मांगें:

1. जेल में बंद सभी कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए और आंदोलन पर किसी प्रकार की दमन न हो।

2. सभी प्रभावित परिवारों और विस्थापितों का ज़मीन और आजीविका के आधार पर पूरा पुनर्वास किया जाए; उन्हें नागरिक सुविधाओं वाले घर और मुआवज़ा दिया जाए। यह सब निष्पक्ष सर्वे के आधार पर हो और किसी भी योग्य विस्थापित को इससे बाहर न रखा जाए।

3. भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास अधिनियम, 2013; वन अधिकार अधिनियम, 2006 और जैव विविधता अधिनियम, 2002 के सभी प्रावधानों को सही रूप से लागू करना।

4. शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों पर पुलिस की कार्रवाई और पुनर्वास प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जांच; साथ ही, कानून के अनुसार (जिसमें SC & ST (PoA) अधिनियम, 1989 के प्रावधान भी शामिल हैं) सभी उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई।

5. केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के सामाजिक, पर्यावरणीय और जल-संबंधी (हाइड्रोलॉजिकल) प्रभावों (लागत और लाभ) की व्यापक समीक्षा।

संयुक्त रूप से जारीकर्ता: जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (NAPM), राष्ट्रीय जल वायु और पर्यावर्णीय न्याय मंच (NACEJ), राष्ट्रीय नदी घाटी मंच और दिल्ली सॉलिडैरिटी ग्रुप (DSG)

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