नई दिल्ली: मुंबई में मंगलवार को उस वक्त भारी गहमागहमी देखने को मिली, जब एक आदिवासी छात्र संगठन के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर मंत्रालय की ओर मार्च निकालने का प्रयास किया। हालांकि, पुलिस ने भारी बल तैनात कर इन छात्रों को तिलक भवन के पास ही रोक दिया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति पैदा हो गई।
प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि उन्होंने मंत्रालय तक एक शांतिपूर्ण मोर्चा निकालने की योजना बनाई थी। लेकिन तिलक भवन पर पुलिस की अभेद्य घेराबंदी ने उनके कदम वहीं रोक दिए। छात्रों की भारी भीड़ और पुलिस बल की व्यापक तैनाती के कारण आसपास के इलाकों में यातायात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ।
आयोजकों के मुताबिक, उन्होंने पहले मुंबई पुलिस से आजाद मैदान में अपना विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति मांगी थी। प्रशासन की ओर से उन्हें यह मंजूरी नहीं दी गई। इसके बाद, छात्रों ने मंगलवार को राज्यपाल से मिलकर अपनी समस्याएं और मांगें उनके सामने रखने का विकल्प चुना था।
छात्रों का आरोप है कि उन्हें राज्यपाल से मिलने का मौका देने के बजाय पुलिस ने जबरन हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों को कई बसों में बैठाकर मौके से हटा दिया गया। आयोजकों ने दावा किया है कि पुलिस इन बसों को नासिक और जलगांव जैसी अलग-अलग जगहों पर ले गई है।
फिलहाल, हिरासत में लिए गए छात्रों की सटीक संख्या और पुलिस की इस कार्रवाई का कोई स्पष्ट कारण तुरंत सामने नहीं आ पाया है। पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले में विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है।
इन तमाम कार्रवाइयों के बावजूद आदिवासी छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने आगामी 25 अक्टूबर को एक बार फिर नए सिरे से प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि वे इस बार फिर से आजाद मैदान में विरोध प्रदर्शन के लिए मुंबई पुलिस से औपचारिक अनुमति मांगेंगे।
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